इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने शहर की बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। ट्रैफिक समस्याओं से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि लोगों द्वारा लगातार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है और कोर्ट परिसर के बाहर भी नियमों की अनदेखी दिखाई देती है। इससे शहर में ट्रैफिक नियमों के पालन और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े होते हैं।

जस्टिस संदीप भट्ट और जस्टिस गजेंद्र सिंह की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान प्रशासन के कामकाज पर असंतोष जताया। अदालत ने कहा कि ट्रैफिक सुधार को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात में अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आ रहा है।

ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर दायर हुई थी याचिका

इंदौर शहर की ट्रैफिक समस्याओं को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में शहर में बढ़ते जाम, यातायात नियमों के उल्लंघन और ट्रैफिक प्रबंधन की कमियों को लेकर सवाल उठाए गए थे।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रशासन से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और नियमों के पालन को लेकर जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में राज्य सरकार की ओर से हाई कोर्ट में हलफनामा पेश किया गया।

सरकार ने बताए इंतजाम

राज्य सरकार ने अपने जवाब में बताया कि इंदौर शहर के प्रमुख चौराहों पर 660 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो ट्रैफिक निगरानी में मदद कर रहे हैं। इसके अलावा ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की गई है।

सरकार की ओर से बताया गया कि यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

कोर्ट ने उठाए जमीनी हालात पर सवाल

सरकार के जवाब पर हाई कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इतने बड़े स्तर पर व्यवस्था मौजूद है तो फिर सड़कों पर नियमों का उल्लंघन क्यों दिखाई दे रहा है।

अदालत ने कहा कि केवल संसाधन उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी इस्तेमाल भी जरूरी है। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि नियमों के पालन को लेकर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आया है।

कोर्ट के बाहर भी नियम तोड़ने का जिक्र

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि लोग कोर्ट के बाहर भी ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते दिखाई देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि नियमों को लागू करने में कहीं न कहीं कमी रह रही है।

अदालत की इस टिप्पणी को प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल के रूप में देखा जा रहा है। कोर्ट ने संकेत दिया कि केवल कागजी कार्रवाई से ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार नहीं लाया जा सकता।

याचिकाकर्ता ने सरकार के दावों को बताया गलत

याचिकाकर्ता महेश गर्ग की ओर से पेश वकील मनीष यादव और अनस मकरानी ने राज्य सरकार के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहर में ट्रैफिक जाम और नियमों का उल्लंघन आम समस्या बन चुकी है।

उन्होंने तर्क दिया कि सीसीटीवी कैमरे और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद सड़कों पर स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। वाहन चालक खुलेआम नियमों की अनदेखी करते हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

बढ़ते ट्रैफिक दबाव से जूझ रहा इंदौर

इंदौर मध्य प्रदेश के सबसे बड़े और तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शामिल है। बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण शहर में ट्रैफिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

कई प्रमुख चौराहों और व्यस्त इलाकों में जाम की समस्या आम हो गई है। वाहन चालकों द्वारा गलत पार्किंग, सिग्नल तोड़ना और सड़क नियमों की अनदेखी भी यातायात व्यवस्था को प्रभावित करती है।

बेहतर निगरानी और सख्त कार्रवाई की जरूरत

हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह ट्रैफिक नियमों के प्रभावी पालन के लिए ठोस कदम उठाए। केवल कैमरे लगाने और पुलिस तैनात करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि नियम तोड़ने वालों पर लगातार कार्रवाई करनी होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए तकनीक, बेहतर सड़क प्रबंधन और लोगों में जागरूकता तीनों जरूरी हैं।

आगे की सुनवाई पर नजर

मामले की आगे की सुनवाई में प्रशासन को ट्रैफिक सुधार को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी देनी पड़ सकती है। हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।

अदालत ने साफ संकेत दिया है कि शहर में यातायात नियमों का पालन केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका असर सड़कों पर भी दिखाई देना चाहिए। अब देखना होगा कि प्रशासन हाई कोर्ट की नाराजगी के बाद ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या कदम उठाता है।

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