बेंगलुरु। कर्नाटक के कोटे नाडु क्षेत्र के किसानों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत की उम्मीद जगी है। कई दशकों से चले आ रहे संघर्ष और पानी की मांग के बीच सरकार ने भद्रा अपर रिवर प्रोजेक्ट के तहत भद्रा जलाशय से चित्रदुर्ग ब्रांच नहर में प्रायोगिक तौर पर पानी छोड़ने का फैसला किया है। यह प्रक्रिया रविवार, 6 सितंबर से शुरू की जाएगी।
सरकार के इस फैसले से सूखे की समस्या से जूझ रहे इलाके के किसानों में खुशी का माहौल है। पानी छोड़ने का यह ट्रायल नई नहर के इंफ्रास्ट्रक्चर, जल प्रवाह और उसकी क्षमता की जांच के लिए किया जा रहा है। सफल परीक्षण के बाद परियोजना के जरिए क्षेत्र के अधिक से अधिक सूखा प्रभावित इलाकों तक पानी पहुंचाने की उम्मीद है।
दशकों पुराने इंतजार के बाद उम्मीद
कोटे नाडु क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की कमी लंबे समय से किसानों की बड़ी समस्या रही है। पर्याप्त बारिश नहीं होने की स्थिति में कृषि गतिविधियां प्रभावित होती रही हैं। ऐसे में भद्रा परियोजना से पानी पहुंचाने की मांग लंबे समय से उठती रही है।
अब सरकार के फैसले के बाद किसानों को उम्मीद है कि भद्रा जलाशय का पानी सूखे प्रभावित इलाकों में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेगा।
भद्रा अपर रिवर प्रोजेक्ट के तहत तैयार की गई नई नहर को इसी उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
6 सितंबर से शुरू होगा ट्रायल रन
सरकार ने रविवार 6 सितंबर से भद्रा जलाशय से चित्रदुर्ग ब्रांच नहर में पानी छोड़ने का निर्णय लिया है। यह पानी प्रायोगिक तौर पर छोड़ा जाएगा।
ट्रायल रन का मुख्य उद्देश्य नहर की वास्तविक क्षमता और तैयार किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच करना है। पानी छोड़ने के बाद उसके प्रवाह, नहर की स्थिति और निर्धारित मार्ग से जलाशय तक पानी पहुंचने की प्रक्रिया को देखा जाएगा।
यह परीक्षण परियोजना के संचालन से पहले महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
VJNL ने पूरी की तैयारियां
सरकार के आदेश के बाद विश्वेश्वरैया जल निगम लिमिटेड (VJNL) ने भद्रा जलाशय से पानी छोड़ने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
विभागीय स्तर पर पानी के प्रवाह और नहर की स्थिति को लेकर तैयारियां की गई हैं। ट्रायल के दौरान नहर में पानी के प्रवाह की निगरानी की जाएगी।
नहर के अलग-अलग हिस्सों में पानी किस तरह आगे बढ़ता है, यह भी इस परीक्षण के दौरान देखा जाएगा।
भद्रा जलाशय से चित्रदुर्ग ब्रांच नहर तक पहुंचेगा पानी
भद्रा जलाशय से छोड़ा गया पानी चित्रदुर्ग ब्रांच नहर के माध्यम से आगे बढ़ेगा। इस नहर का मार्ग कई महत्वपूर्ण तालुकों से होकर गुजरता है।
जानकारी के मुताबिक नहर होसादुर्गा, होलालकेरे, हिरियूर और चित्रदुर्ग तालुकों से होते हुए गुनूर झील तक पहुंचेगी।
इस पूरे मार्ग में पानी के प्रवाह की निगरानी ट्रायल रन का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
गुनूर झील तक पहुंचेगा पानी
चित्रदुर्ग ब्रांच नहर से होकर आने वाला पानी गुनूर झील तक पहुंचाने की योजना है। गुनूर झील तक पानी पहुंचने के बाद आगे की जल आपूर्ति की प्रक्रिया प्राकृतिक चैनल के माध्यम से की जाएगी।
यह व्यवस्था परियोजना के व्यापक जल वितरण नेटवर्क का हिस्सा है।
गुनूर झील तक पानी पहुंचना परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाएगा, क्योंकि इसके बाद पानी को दूसरे क्षेत्रों की ओर ले जाने की योजना बनाई गई है।
रानीकेरे तक पहुंचाने की योजना
परियोजना के तहत गुनूर झील से आगे पानी को एक प्राकृतिक चैनल के जरिए चल्लाकेरे तालुक के रानीकेरे तक पहुंचाने की योजना है।
इससे परियोजना का लाभ चित्रदुर्ग के अलावा आसपास के सूखा प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने की उम्मीद है।
हालांकि फिलहाल पानी छोड़ने की प्रक्रिया प्रायोगिक तौर पर शुरू की जा रही है। ट्रायल के दौरान नहर और जल प्रवाह की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा।
नहर की क्षमता की होगी जांच
ट्रायल रन का सबसे बड़ा उद्देश्य नहर की क्षमता की जांच करना है। परियोजना के तहत तैयार किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर में पानी के दबाव और प्रवाह को संभालने की क्षमता का परीक्षण जरूरी है।
पानी छोड़े जाने के बाद अधिकारियों की नजर नहर के विभिन्न हिस्सों पर रहेगी। यदि कहीं तकनीकी समस्या सामने आती है तो उसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
इस तरह ट्रायल रन परियोजना के स्थायी संचालन से पहले एक तरह की तकनीकी परीक्षा भी होगी।
किसानों के लिए सिंचाई की उम्मीद
चित्रदुर्ग और आसपास के क्षेत्रों में किसानों के लिए पानी की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। बारिश की अनिश्चितता के कारण कई बार फसलों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता।
यदि भद्रा जलाशय से पानी निर्धारित क्षेत्रों तक सफलतापूर्वक पहुंचता है तो सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। इससे कृषि क्षेत्र को राहत मिलने और किसानों को खेती के लिए बेहतर जल उपलब्धता की उम्मीद है।
हालांकि पानी का वास्तविक लाभ नहर के संचालन और आगे की जल वितरण व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
सूखे से प्रभावित क्षेत्रों को मिलेगा फायदा
परियोजना का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों तक पानी पहुंचाना है जहां लंबे समय से सूखे की समस्या रही है। चित्रदुर्ग क्षेत्र के कई हिस्से पानी की कमी के कारण कृषि चुनौतियों का सामना करते रहे हैं।
ऐसे में भद्रा परियोजना से मिलने वाला पानी किसानों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन साबित हो सकता है।
पानी की उपलब्धता बढ़ने से केवल सिंचाई ही नहीं बल्कि क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
किसानों में खुशी का माहौल
सरकार के फैसले की जानकारी के बाद कोटे नाडु क्षेत्र के किसानों में खुशी है। लंबे समय से पानी की मांग कर रहे किसानों को अब परियोजना के धरातल पर उतरने की उम्मीद दिखाई दे रही है।
किसानों के लिए यह केवल नहर में पानी छोड़ने का फैसला नहीं बल्कि दशकों से चले आ रहे इंतजार के खत्म होने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
ट्रायल के परिणाम पर रहेगी नजर
6 सितंबर से शुरू होने वाले ट्रायल रन के बाद यह पता चलेगा कि चित्रदुर्ग ब्रांच नहर निर्धारित क्षमता के अनुसार पानी को आगे पहुंचाने में कितनी सफल रहती है।
VJNL और संबंधित अधिकारी पानी के प्रवाह और नहर के इंफ्रास्ट्रक्चर की निगरानी करेंगे। ट्रायल के दौरान सामने आने वाली तकनीकी स्थिति के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
फिलहाल भद्रा जलाशय से चित्रदुर्ग ब्रांच नहर में पानी छोड़ने के फैसले ने कोटे नाडु के किसानों के बीच नई उम्मीद पैदा कर दी है। यदि पानी गुनूर झील और इसके बाद प्राकृतिक चैनल के जरिए रानीकेरे तक सफलतापूर्वक पहुंचता है तो सूखे प्रभावित इलाकों की सिंचाई व्यवस्था को बड़ा लाभ मिल सकता है।