बेंगलुरु। स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर बेंगलुरु में सवाल खड़े हो गए हैं। शहर में कई वर्षों से रह रहे कुछ लोगों के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में सही तरीके से दर्ज नहीं होने की शिकायत सामने आई है। इनमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभारी सचिव डॉ. शरथ चंद्र भी शामिल हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची में उनका नाम स्पष्ट रूप से मौजूद है, लेकिन नई ड्राफ्ट सूची में उनके नाम के सामने ‘नो मैपिंग’ दिखाई दे रहा है।

कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष रह चुके डॉ. शरथ चंद्र अमरज्योति लेआउट, चोलानगर, हेब्बल के निवासी हैं। उन्होंने पुरानी मतदाता सूची डाउनलोड करके अपने नाम और उससे संबंधित विवरण की जांच की। इसके बावजूद नई सूची में रिकॉर्ड की मैपिंग नहीं होने से उन्होंने पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं।

2002 की वोटर लिस्ट में मौजूद है नाम

डॉ. शरथ चंद्र के मुताबिक उन्होंने आधिकारिक वेबसाइट से वर्ष 2002 की मतदाता सूची डाउनलोड की है। इसमें उनका नाम साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि पुराने रिकॉर्ड से संबंधित निर्वाचन क्षेत्र, बूथ नंबर, सेक्शन नंबर और सीरियल नंबर समेत सभी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई है। इसके बावजूद ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनके नाम के आगे ‘नो मैपिंग’ लिखा दिखाई दे रहा है।

डॉ. शरथ चंद्र ने कहा, “मैंने वेबसाइट से 2002 की वोटर लिस्ट डाउनलोड की है। उसमें मेरा नाम साफ-साफ दिख रहा है। मैंने निर्वाचन क्षेत्र, बूथ नंबर, सेक्शन नंबर और सीरियल नंबर समेत सभी जरूरी जानकारी दी है। हालांकि ड्राफ्ट लिस्ट में ‘नो मैपिंग’ दिखा रहा है।”

लंबे समय से बेंगलुरु में रह रहे हैं

70 वर्ष से अधिक उम्र के डॉ. शरथ चंद्र लंबे समय से बेंगलुरु में रह रहे हैं। ऐसे में पुराने मतदाता रिकॉर्ड में नाम होने के बावजूद नई प्रक्रिया में रिकॉर्ड की मैपिंग नहीं होने से सवाल उठना स्वाभाविक है।

मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि डॉ. शरथ चंद्र वरिष्ठ सरकारी अधिकारी हैं और कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी रह चुके हैं।

यदि पुराने दस्तावेज और मतदाता सूची उपलब्ध होने के बाद भी रिकॉर्ड लिंक नहीं हो रहा है तो सामान्य मतदाताओं को भी ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

‘नो मैपिंग’ को लेकर बढ़ी चिंता

ड्राफ्ट सूची में ‘नो मैपिंग’ दर्ज होने का मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। डॉ. शरथ चंद्र का कहना है कि उनके पास पुरानी सूची में नाम होने का स्पष्ट रिकॉर्ड मौजूद है।

उन्होंने संबंधित निर्वाचन क्षेत्र से लेकर बूथ और सीरियल नंबर तक का विवरण उपलब्ध कराया है। इसके बावजूद रिकॉर्ड का मिलान नहीं होना प्रक्रिया में तकनीकी या डेटा संबंधी समस्या की ओर संकेत कर सकता है।

हालांकि इस मामले में संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ‘नो मैपिंग’ की वास्तविक वजह क्या है।

कई लोगों के नाम को लेकर शिकायत

यह समस्या केवल डॉ. शरथ चंद्र तक सीमित नहीं बताई जा रही है। बेंगलुरु में लंबे समय से रहने वाले कई लोगों के नाम और रिकॉर्ड को लेकर भी इसी तरह की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है।

ऐसे मामलों ने SIR के तहत तैयार की गई ड्राफ्ट सूची की जांच और रिकॉर्ड मिलान की प्रक्रिया पर ध्यान खींचा है।

मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया का बुनियादी दस्तावेज है। इसमें किसी योग्य मतदाता के नाम या विवरण में गड़बड़ी होने पर संबंधित व्यक्ति को मतदान के अधिकार के इस्तेमाल में परेशानी हो सकती है।

ड्राफ्ट सूची की जांच महत्वपूर्ण

ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी करने का उद्देश्य अंतिम सूची तैयार होने से पहले रिकॉर्ड की जांच और जरूरी सुधार का अवसर देना भी होता है।

ऐसे में मतदाताओं के लिए अपना नाम, पता और अन्य विवरण जांचना महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि किसी मतदाता को अपने रिकॉर्ड में गलती दिखाई देती है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुधार के लिए संबंधित निर्वाचन अधिकारियों से संपर्क किया जा सकता है।

डॉ. शरथ चंद्र का मामला भी इस बात को रेखांकित करता है कि पुराने मतदाता अपने रिकॉर्ड की जांच जरूर करें।

पुराने और नए रिकॉर्ड के मिलान का सवाल

SIR प्रक्रिया में पुराने रिकॉर्ड को मौजूदा मतदाता विवरण से जोड़ना महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति का नाम पुरानी मतदाता सूची में मौजूद है लेकिन वर्तमान रिकॉर्ड में उसका सही मिलान नहीं हो रहा है तो स्थिति स्पष्ट करने की आवश्यकता होती है।

डॉ. शरथ चंद्र ने दावा किया है कि उनके मामले में पुरानी सूची से संबंधित सभी जरूरी जानकारी उपलब्ध है।

ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि डेटा उपलब्ध होने के बावजूद उनके रिकॉर्ड को ‘नो मैपिंग’ के रूप में क्यों दिखाया गया।

वरिष्ठ नागरिकों को हो सकती है ज्यादा परेशानी

मतदाता सूची में रिकॉर्ड से संबंधित तकनीकी या दस्तावेजी समस्या वरिष्ठ नागरिकों के लिए अधिक परेशानी का कारण बन सकती है।

पुराने मतदाताओं के पते, निर्वाचन क्षेत्र या बूथ में वर्षों के दौरान बदलाव हुए हो सकते हैं। परिसीमन या प्रशासनिक बदलावों के कारण भी पुराने और नए रिकॉर्ड के मिलान में चुनौती आ सकती है।

इसी कारण रिकॉर्ड की जांच करते समय पुराने मतदाता विवरण को सावधानी से सत्यापित करना जरूरी है।

अंतिम सूची से पहले सुधार की उम्मीद

चूंकि मामला ड्राफ्ट मतदाता सूची से जुड़ा है, इसलिए संबंधित मतदाताओं को अंतिम सूची तैयार होने से पहले अपनी आपत्तियां और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिलने की उम्मीद रहती है।

डॉ. शरथ चंद्र के पास 2002 की मतदाता सूची में अपना नाम होने का रिकॉर्ड मौजूद है। अब देखना होगा कि निर्वाचन अधिकारी उनके पुराने रिकॉर्ड का सत्यापन करके मौजूदा सूची से उसे किस तरह जोड़ते हैं।

निर्वाचन अधिकारियों के जवाब पर नजर

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ‘नो मैपिंग’ क्यों दिखाई दे रहा है और इसे सुधारने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की ओर से स्पष्टीकरण आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

यदि समस्या डेटा मिलान या तकनीकी प्रक्रिया से संबंधित है तो ऐसे अन्य मामलों की पहचान कर उनमें भी सुधार की आवश्यकता पड़ सकती है।

मतदाता सूची की शुद्धता बेहद जरूरी

भारत की चुनावी व्यवस्था में मतदाता सूची का सटीक होना बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी योग्य नागरिक का नाम गलत तरीके से छूटना या रिकॉर्ड का सही मिलान न होना गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।

इसलिए ड्राफ्ट सूची के चरण में सामने आने वाली शिकायतों का समय रहते समाधान करना आवश्यक है।

डॉ. शरथ चंद्र के मामले ने इसी मुद्दे को सामने ला दिया है। 2002 की मतदाता सूची में नाम होने और सभी जरूरी विवरण उपलब्ध कराने के बावजूद ‘नो मैपिंग’ दिखाई देने से अब SIR की रिकॉर्ड मिलान प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में निर्वाचन अधिकारियों की प्रतिक्रिया और रिकॉर्ड में किए जाने वाले सुधार पर नजर रहेगी।

Tags: