बेंगलुरु। कर्नाटक में मॉनसून का मौसम सितंबर के अंत तक समाप्त होने के साथ राज्य सरकार सूखे की स्थिति पर केंद्र सरकार को एक अंतिम ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रही है। डिप्टी मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने सोमवार को कहा कि सूखे से हुए नुकसान का आकलन अभी जारी है और पूरी रिपोर्ट तैयार होने के बाद अक्टूबर के पहले सप्ताह में केंद्र को नया और विस्तृत ज्ञापन भेजा जाएगा।

परमेश्वर ने बताया कि राज्य सरकार पहले भी सूखे को लेकर केंद्र को ज्ञापन सौंप चुकी है, लेकिन मॉनसून अवधि 30 सितंबर को समाप्त होने के बाद अंतिम स्थिति और नुकसान का पूरा आकलन सामने आएगा। इसके आधार पर किसानों, जल संसाधनों और प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान का विवरण शामिल करते हुए अंतिम ज्ञापन तैयार किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की तीन अलग-अलग टीमें कर्नाटक का दौरा करेंगी। इन टीमों का काम राज्य के सूखा प्रभावित इलाकों का जमीनी निरीक्षण करना और वास्तविक स्थिति का आकलन करना होगा। इनके दौरे और रिपोर्ट के आधार पर राज्य की राहत मांग पर केंद्र आगे फैसला कर सकता है।

पहली केंद्रीय टीम तुमकुरु, चित्रदुर्ग और दावणगेरे जिलों का दौरा करेगी। इन जिलों में बारिश की कमी, फसल नुकसान और पानी की स्थिति की जांच की जाएगी। टीम स्थानीय प्रशासन और कृषि अधिकारियों से जानकारी जुटाने के साथ खेतों की स्थिति का भी निरीक्षण कर सकती है।

दूसरी टीम उत्तर कर्नाटक के प्रभावित जिलों का दौरा करेगी। इस क्षेत्र में कई जगह कम बारिश और कृषि संकट की स्थिति सामने आई है। टीम को संबंधित जिलों में सूखे का प्रभाव, फसलों की स्थिति और पानी की उपलब्धता की जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

तीसरी केंद्रीय टीम पुराने मैसूर क्षेत्र का दौरा करेगी। इसमें मंड्या, मैसूर और चामराजनगर जैसे इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भी कृषि और जल संसाधनों पर सूखे के असर का अध्ययन किया जाएगा।

परमेश्वर ने कहा कि केंद्रीय टीमें प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगी। इसके बाद राज्य सरकार उपलब्ध आंकड़ों और जमीनी रिपोर्ट के आधार पर अंतिम ज्ञापन को केंद्र के सामने रखेगी। राज्य सरकार की कोशिश है कि नुकसान और राहत की जरूरत का पूरा विवरण एक ही रिपोर्ट में शामिल हो।

कर्नाटक में इस साल कम बारिश के कारण सूखे का दायरा लगातार बढ़ा है। सरकार अब तक 217 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित कर चुकी है। इससे पहले राज्य ने 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया था, लेकिन बाद के आकलन में संख्या बढ़ती गई।

सरकार का आकलन है कि बारिश की कमी का असर खेती के साथ जलाशयों और पेयजल की उपलब्धता पर भी पड़ा है। कई क्षेत्रों में फसल नुकसान की शिकायतें सामने आई हैं और राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए राहत उपायों की घोषणा भी की है।

राज्य सरकार ने सूखा प्रभावित किसानों के लिए 2,500 रुपये प्रति किसान इनपुट सब्सिडी देने का फैसला किया है। सरकार का अनुमान है कि इस शुरुआती सहायता से करीब 45 से 50 लाख किसानों को लाभ मिल सकता है। इसके लिए लगभग 1,250 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान लगाया गया है।

परमेश्वर ने यह भी कहा कि सूखा किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है और इसका असर पूरे राज्य के लोगों पर पड़ता है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि वे केंद्र से अधिक सहायता की मांग के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर आवाज उठाएं।

राज्य सरकार की ओर से केंद्र के सामने एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ले जाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। सरकार का कहना है कि यदि सत्ता पक्ष और विपक्ष मिलकर सूखा राहत की मांग करेंगे तो केंद्र के सामने कर्नाटक का पक्ष अधिक मजबूती से रखा जा सकेगा।

परमेश्वर ने कहा कि यदि विपक्षी दल प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं होते हैं, तब भी राज्य सरकार अपने स्तर पर कर्नाटक की मांग केंद्र के सामने रखेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि सूखे से प्रभावित किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आवश्यक सहायता हासिल करने का प्रयास करे।

केंद्र की टीमों के दौरे को राहत प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन टीमों की रिपोर्ट के आधार पर सूखे की गंभीरता, कृषि नुकसान और अन्य प्रभावों का केंद्रीय स्तर पर मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद केंद्र की ओर से अतिरिक्त वित्तीय सहायता पर फैसला लिया जा सकता है।

राज्य सरकार को उम्मीद है कि केंद्रीय टीमों के निरीक्षण से जमीनी स्थिति स्पष्ट होगी। सरकार पहले ही कम बारिश, फसल नुकसान और जल संकट से जुड़े आंकड़े केंद्र के सामने रख चुकी है, लेकिन मॉनसून खत्म होने के बाद तैयार होने वाली अंतिम रिपोर्ट में स्थिति की पूरी तस्वीर शामिल की जाएगी।

कर्नाटक सरकार ने कहा है कि सूखा राहत की प्रक्रिया केवल तत्काल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है। पेयजल, पशुओं के लिए चारा, सिंचाई और किसानों की अगली फसल की तैयारी जैसे मुद्दों को भी राहत योजना में शामिल करना जरूरी होगा।

सूखे की वजह से कई क्षेत्रों में किसान पहले ही आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार केंद्र से मिलने वाली सहायता को महत्वपूर्ण मान रही है। सरकार का कहना है कि केंद्र से पर्याप्त सहायता मिलने पर किसानों के लिए अतिरिक्त राहत योजनाएं लागू करना आसान होगा।

तीनों केंद्रीय टीमों का दौरा अक्टूबर की शुरुआत में होने की संभावना है। रिपोर्टों के मुताबिक ये टीमें 3 अक्टूबर से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में निरीक्षण शुरू कर सकती हैं।

फिलहाल राज्य सरकार सूखे से जुड़े अंतिम आंकड़े जुटाने में लगी है। 30 सितंबर को मॉनसून अवधि समाप्त होने के बाद फसल नुकसान, बारिश की कमी और प्रभावित तालुकों की स्थिति को मिलाकर व्यापक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

डॉ. जी. परमेश्वर ने साफ किया है कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में केंद्र सरकार को अंतिम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके साथ ही तीन केंद्रीय टीमों की रिपोर्ट भी आगे की राहत प्रक्रिया में महत्वपूर्ण आधार बनेगी। राज्य सरकार की नजर अब केंद्र के निरीक्षण और उसके बाद मिलने वाली संभावित वित्तीय सहायता पर है।

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