बेंगलुरु। कर्नाटक में स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग की ASDDO सूची को लेकर कुछ मतदाताओं ने हैरानी और चिंता जताई है। बेंगलुरु के सर्वज्ञनगर विधानसभा क्षेत्र के एक मतदाता को उस समय आश्चर्य हुआ, जब उन्होंने चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की गई ASDDO (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लिकेट और अन्य) सूची में अपने परिवार के सभी छह सदस्यों के नाम देखे।
मतदाता आनंद (बदला हुआ नाम) ने बताया कि वह पिछले करीब 30 वर्षों से उसी पते पर रह रहे हैं, लेकिन ASDDO सूची में उनके परिवार के सभी सदस्यों को ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ (Permanently Shifted) के रूप में चिह्नित किया गया था। उन्होंने कहा कि यह देखकर उन्हें काफी हैरानी हुई, क्योंकि उन्होंने और उनके परिवार ने SIR प्रक्रिया के तहत अपने फॉर्म भी उसी पते पर प्राप्त किए और जमा किए थे।
आनंद ने बताया कि उन्होंने कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की प्रेस कॉन्फ्रेंस देखने के बाद उत्सुकतावश अपने विधानसभा क्षेत्र और मतदान केंद्र की ASDDO सूची ऑनलाइन चेक की थी। सूची देखने पर उन्हें पता चला कि परिवार के सभी छह सदस्यों के नाम उसमें शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि उनका परिवार लंबे समय से उसी घर में रह रहा है और मतदाता सूची में भी उनका रिकॉर्ड मौजूद है। इसके बावजूद नाम को स्थानांतरित श्रेणी में डालना उनके लिए चिंता का विषय था।
मामले को लेकर आनंद ने पहले बूथ लेवल अधिकारी (BLO) से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय राजस्व निरीक्षक (Revenue Inspector) से संपर्क किया। राजस्व निरीक्षक की मदद से BLO से संपर्क हुआ और उनके फॉर्म को दोबारा जांच कर ‘ठीक’ कराया गया।
आनंद का कहना है कि यदि उन्होंने खुद ऑनलाइन सूची की जांच नहीं की होती तो उन्हें इस बदलाव की जानकारी नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में मतदाताओं को अपने नाम और विवरण की स्थिति की जांच करते रहना चाहिए, ताकि समय रहते सुधार कराया जा सके।
इसी तरह का एक और मामला बेंगलुरु के विजयनगर क्षेत्र से सामने आया है। यहां एक महिला मतदाता ने बताया कि उन्होंने 5 जुलाई को अपना SIR फॉर्म जमा किया था और उन्हें उसकी पावती (Acknowledgement) भी मिल गई थी। इसके बावजूद उनका नाम ASDDO सूची में दिखाई दे रहा था।
महिला मतदाता ने इसके बाद BLO से संपर्क किया और अपने रिकॉर्ड को ASDDO सूची से हटाकर डिजिटाइज्ड मतदाता सूची में वापस शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू कराई।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, ASDDO सूची में नाम आने का अर्थ यह नहीं है कि मतदाता का नाम तुरंत मतदाता सूची से हटा दिया गया है। यह सूची केवल उन मतदाताओं के रिकॉर्ड को चिन्हित करती है, जिनके विवरण का सत्यापन आवश्यक है।
ASDDO श्रेणी में शामिल नामों की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाता है। यदि सत्यापन में मतदाता का पता और अन्य जानकारी सही पाई जाती है तो रिकॉर्ड को अपडेट किया जा सकता है।
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार ने पहले ही मतदाताओं से अपील की थी कि वे अपनी स्थिति की जांच करें। उन्होंने कहा था कि जिन मतदाताओं ने ऑनलाइन या ऑफलाइन फॉर्म जमा किए हैं और उन्हें पावती मिल चुकी है, लेकिन फिर भी उनका नाम ASDDO सूची में है, वे BLO से संपर्क कर सुधार करा सकते हैं।
चुनाव विभाग का कहना है कि SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। इसके तहत मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट रिकॉर्ड की पहचान की जाती है, ताकि सूची में केवल पात्र मतदाताओं के नाम बने रहें।
हालांकि, कुछ मतदाताओं के नाम गलत श्रेणी में शामिल होने की शिकायतों के बाद चुनाव अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से सुधार कराएं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की त्रुटि को दूर करने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। ऑनलाइन सूची की जांच करना और समय पर आपत्ति दर्ज कराना मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
फिलहाल, चुनाव विभाग ASDDO सूची से जुड़े मामलों की समीक्षा कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन के बाद सही पाए जाने वाले मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखे जाएंगे।
कर्नाटक में सामने आए इन मामलों ने मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज कर दी है। चुनाव विभाग की कोशिश है कि प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलती से प्रभावित न हो।