बेंगलुरु। कर्नाटक में तुलु भाषा को दूसरी अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा देने के राज्य सरकार के फैसले के बाद अब उर्दू को भी आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग उठी है। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) ने सोमवार को राज्य सरकार से उर्दू भाषा को आधिकारिक मान्यता देने की मांग की।
SDPI के राज्य अध्यक्ष अब्दुल मजीद ने इस संबंध में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को पत्र लिखकर कर्नाटक में उर्दू को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य में उर्दू भाषा का व्यापक स्तर पर उपयोग होता है और बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़े हुए हैं।
तुलु को मिला अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा
यह मांग उस समय सामने आई है, जब कर्नाटक सरकार ने हाल ही में मंगलुरु में डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में तुलु को कर्नाटक की दूसरी अतिरिक्त आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता देने का फैसला किया।
तुलु भाषा को मान्यता देने के फैसले के बाद राज्य में भाषाई पहचान और विभिन्न भाषाओं को सरकारी स्तर पर स्थान देने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच SDPI ने उर्दू को भी इसी तरह का दर्जा देने की मांग रखी है।
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में रखी मांग
SDPI प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मजीद ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि कर्नाटक में उर्दू भाषा का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि उर्दू को भी आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता देने पर विचार किया जाए।
उन्होंने पत्र में बताया कि राज्य में बड़ी संख्या में उर्दू माध्यम के स्कूल संचालित हो रहे हैं। उनके अनुसार, कर्नाटक में करीब 4,236 उर्दू माध्यम के स्कूल हैं, जो राज्य में उर्दू भाषा के उपयोग और शिक्षा व्यवस्था में इसकी भूमिका को दर्शाते हैं।
तेलंगाना मॉडल का दिया उदाहरण
SDPI ने अपनी मांग के समर्थन में तेलंगाना मॉडल का भी हवाला दिया है। पार्टी का कहना है कि जिस तरह तेलंगाना में उर्दू को आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त है, उसी आधार पर कर्नाटक में भी इस दिशा में कदम उठाया जा सकता है।
अब्दुल मजीद ने कहा कि भाषा को आधिकारिक दर्जा मिलने से प्रशासनिक कामकाज और सरकारी सेवाओं में संबंधित भाषा बोलने वाले लोगों को सुविधा मिल सकती है।
भाषा नीति पर चर्चा तेज
कर्नाटक में भाषा का मुद्दा हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। राज्य में कन्नड़ को प्रमुख स्थान प्राप्त है, वहीं अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों की भाषाओं को लेकर समय-समय पर मांगें सामने आती रही हैं।
तुलु को अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलने के बाद अब अन्य भाषाई समूह भी अपनी मांगों को लेकर सक्रिय हो रहे हैं।
उर्दू शिक्षा और उपयोग का मुद्दा
SDPI का कहना है कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं बल्कि बड़ी संख्या में लोगों की शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक जीवन से जुड़ी हुई है। पार्टी ने सरकार से मांग की है कि उर्दू भाषी लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भाषा को आधिकारिक मान्यता दी जाए।
पार्टी ने यह भी कहा कि आधिकारिक दर्जा मिलने से भाषा के संरक्षण और प्रोत्साहन में मदद मिल सकती है।
सरकार के रुख का इंतजार
फिलहाल कर्नाटक सरकार की ओर से SDPI की इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस मांग को लेकर क्या कदम उठाती है।
तुलु को अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा देने का फैसला जहां क्षेत्रीय भाषा के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, वहीं उर्दू को लेकर उठी मांग ने राज्य में भाषा नीति को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बना रह सकता है। फिलहाल SDPI ने अपनी मांग सरकार के सामने रख दी है और अब आगे की कार्रवाई का इंतजार है।