बेंगलुरु। कर्नाटक विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान सोमवार को ‘वंदे मातरम’ गीत को लेकर सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के सदस्यों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल शुरुआती दो पद गाने के फैसले को लेकर भाजपा सदस्यों ने विरोध जताया और सदन में नारेबाजी की।

जानकारी के अनुसार, विधान परिषद की कार्यवाही शुरू होने पर परंपरा के अनुसार ‘वंदे मातरम’ गीत बजाया गया। कांग्रेस सदस्यों ने गीत के दो पद पूरे होने के बाद इसे रोक दिया। इस पर भाजपा सदस्यों ने आपत्ति जताई और कहा कि पूरा गीत गाया जाना चाहिए।

इसके बाद भाजपा सदस्यों ने विरोध करते हुए ‘वंदे मातरम’ का पूरा गीत गाया। इस घटनाक्रम के बाद सदन में कुछ समय के लिए माहौल गरमा गया। बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने संविधान की प्रस्तावना का पाठ कराया।

मामले को लेकर राज्य सरकार की ओर से मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सरकार ने निर्णय लिया है कि राज्य सरकार के आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल दो पद ही गाए जाएंगे।

मंत्री ने कहा कि कुछ विशेष अवसरों पर पूरा गीत गाया जाता है। उन्होंने बताया कि जिन कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति शामिल होते हैं, वहां पूरे गीत का गायन किया जाता है। वहीं, राज्य सरकार के सामान्य कार्यक्रमों में दो पदों की परंपरा का पालन किया जाता है।

मंत्री के इस बयान पर भाजपा सदस्यों ने विरोध जताया। भाजपा नेताओं का कहना था कि ‘वंदे मातरम’ का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए और इसे सीमित करना उचित नहीं है।

भाजपा सदस्यों ने सरकार के फैसले पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सदन में अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस भी हुई।

‘वंदे मातरम’ भारत के ऐतिहासिक राष्ट्रगीतों में शामिल है। इसकी रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों में राष्ट्रीय भावना जगाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना था।

सदन में हुए इस विवाद के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने की संभावना है। विपक्षी भाजपा ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं, जबकि कांग्रेस सरकार ने इसे निर्धारित परंपरा और कार्यक्रमों की व्यवस्था से जुड़ा निर्णय बताया है।

कर्नाटक में इससे पहले भी सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक मुद्दों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस होती रही है। ‘वंदे मातरम’ जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर दोनों दलों के अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं।

विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान यह मुद्दा उस समय उठा जब सदन की नियमित प्रक्रिया के तहत गीत बजाया गया। भाजपा सदस्यों ने गीत रोकने का विरोध किया और अपनी नाराजगी जाहिर की।

सरकार का पक्ष है कि कार्यक्रमों की प्रकृति के अनुसार गीत के चयन और अवधि को तय किया गया है। वहीं, भाजपा सदस्यों का कहना है कि राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान के लिए पूरा गीत गाया जाना चाहिए।

फिलहाल इस मामले को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है। दोनों दल अपने-अपने रुख पर कायम हैं। सदन में हुए इस घटनाक्रम ने कर्नाटक की राजनीति में एक नया मुद्दा जोड़ दिया है।

आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच और बयानबाजी होने की संभावना है। हालांकि, सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि राज्य कार्यक्रमों में दो पद गाने का फैसला पहले से तय व्यवस्था के तहत लिया गया है।

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