गदग के नीलगुंड गांव में मिली मध्य पाषाण युग की रॉक पेंटिंग और शिलालेख, शोध की मांग तेज
गदग। कर्नाटक के गदग जिले के नीलगुंड गांव के पथरीले इलाके में प्राचीन इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण अवशेष मिलने का दावा किया गया है। यहां की पहाड़ियों में मध्य पाषाण युग यानी मेसोलिथिक काल की मानी जाने वाली रॉक पेंटिंग और एक शिलालेख मिला है। इस खोज के बाद गदग और आसपास के क्षेत्रों के शोधकर्ताओं में रुचि बढ़ गई है और कई विशेषज्ञ इस स्थल का दौरा कर रहे हैं।
नीलगुंड गांव की पहाड़ी गदग शहर से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। लंबे समय तक यह क्षेत्र स्थानीय लोगों के लिए सामान्य पहाड़ी क्षेत्र ही था, लेकिन बाहरी राज्यों से आए शोधकर्ताओं की टीम के दौरे के बाद यहां मौजूद प्राचीन चित्रों और शिलालेखों की ओर ध्यान गया।
जानकारी के अनुसार, जब शोधकर्ताओं की टीम नीलगुंड गांव के बाहरी इलाके में स्थित पथरीली पहाड़ियों पर पहुंची, तब स्थानीय लोगों ने उन्हें आसपास की छोटी पहाड़ियों के बारे में जानकारी दी। टीम ने जब इन चट्टानों और पहाड़ी क्षेत्रों का निरीक्षण किया तो वहां कुछ ऐसे चित्र मिले, जिनके प्राचीन होने की संभावना जताई जा रही है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि चट्टानों पर मौजूद चित्रों से संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में हजारों वर्ष पहले मानव गतिविधियां रही होंगी। प्रारंभिक आकलन के आधार पर इन्हें मध्य पाषाण युग से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
मध्य पाषाण युग को मानव इतिहास का महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इस काल में मानव ने शिकार, भोजन संग्रह और पत्थरों से बने औजारों के उपयोग में कई विकास किए थे। भारत के कई हिस्सों में इस युग से जुड़े रॉक पेंटिंग और पुरातात्विक अवशेष मिले हैं।
नीलगुंड में मिली रॉक पेंटिंग को लेकर स्थानीय और क्षेत्रीय शोधकर्ताओं ने भी रुचि दिखाई है। गदग के कुछ शोधकर्ताओं ने कहा है कि इन खोजों की वैज्ञानिक तरीके से विस्तृत जांच की आवश्यकता है, ताकि इनकी सही उम्र और ऐतिहासिक महत्व का पता लगाया जा सके।
शोधकर्ताओं के अनुसार, केवल प्रारंभिक निरीक्षण के आधार पर किसी भी पुरातात्विक स्थल की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत अध्ययन, चट्टानों की जांच और अन्य वैज्ञानिक प्रक्रियाओं की जरूरत होती है।
स्थानीय लोगों के लिए यह क्षेत्र लंबे समय से जाना-पहचाना रहा है। कई चरवाहे और ग्रामीण नियमित रूप से इन पहाड़ियों पर आते-जाते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने इन चट्टानों पर बने चित्रों और शिलालेखों के ऐतिहासिक महत्व पर ध्यान नहीं दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए ये पहाड़ियां सामान्य स्थान थीं। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि इन चट्टानों पर मौजूद निशान प्राचीन इतिहास से जुड़े हो सकते हैं।
पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे स्थल मानव सभ्यता के विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रॉक पेंटिंग के माध्यम से उस समय के लोगों की जीवनशैली, शिकार के तरीके और सामाजिक गतिविधियों के बारे में जानकारी मिल सकती है।
नीलगुंड क्षेत्र में मिली इस खोज के बाद अब इसे संरक्षित करने की मांग भी उठ रही है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि जांच में यह स्थल प्राचीन साबित होता है तो इसे संरक्षित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों से भी उम्मीद की जा रही है कि वे इस क्षेत्र का सर्वेक्षण कराएं और ऐतिहासिक महत्व वाले अवशेषों की सुरक्षा के लिए कदम उठाएं।
गदग और आसपास के इलाकों के शोधकर्ताओं का मानना है कि नीलगुंड की पहाड़ियों में अभी और भी कई ऐतिहासिक जानकारियां छिपी हो सकती हैं। इसलिए विस्तृत सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।
फिलहाल नीलगुंड गांव की यह खोज क्षेत्र के इतिहास और पुरातत्व के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब विशेषज्ञों की विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यहां मिली रॉक पेंटिंग और शिलालेख वास्तव में किस कालखंड से जुड़े हैं और इनका ऐतिहासिक महत्व कितना बड़ा है।