मद्दुर। कर्नाटक के मद्दुर में इस साल गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश देता नजर आया। पिछले साल गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान पत्थरबाजी की घटना के कारण चर्चा में रहे इस क्षेत्र में रविवार को एक अलग तस्वीर देखने को मिली। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने गणेशोत्सव के जुलूस में शामिल होकर भाईचारे और आपसी सौहार्द का संदेश दिया।
जानकारी के अनुसार, रविवार को गौरी-गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए निकाले गए जुलूस में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी भागीदारी की। उन्होंने न केवल जुलूस का स्वागत किया, बल्कि व्यवस्थाओं में भी सहयोग किया।
जुलूस के दौरान एक खास दृश्य देखने को मिला, जब गौरी-गणेश प्रतिमाओं को ले जा रहे ट्रैक्टर को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने खुद चलाया। इससे लोगों के बीच आपसी सहयोग और सद्भाव का संदेश गया।
जैसे ही विसर्जन जुलूस जामा मस्जिद के पास पहुंचा, वहां मौजूद मुस्लिम नेताओं और समुदाय के लोगों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। उन्होंने जुलूस में शामिल लोगों को छाछ, पीने का पानी, सॉफ्ट ड्रिंक्स और मिठाइयां बांटीं।
स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना की और इसे क्षेत्र में शांति और भाईचारे की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया। लोगों का कहना है कि त्योहारों के दौरान इस तरह की भागीदारी समाज में आपसी विश्वास को मजबूत करती है।
गौरतलब है कि पिछले साल मद्दुर में गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान पत्थरबाजी की घटना सामने आई थी। उस घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी थी। इस बार प्रशासन ने सुरक्षा के साथ-साथ शांति और सौहार्द बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया।
इस वर्ष जुलूस के दौरान दोनों समुदायों के लोगों की भागीदारी ने पिछले तनाव की जगह एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि त्योहार किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं।
मुस्लिम समुदाय के नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य आपसी भाईचारे को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि मद्दुर में सभी समुदायों के लोग लंबे समय से साथ रहते आए हैं और ऐसे आयोजनों में सहयोग करना सामाजिक जिम्मेदारी है।
वहीं, गणेशोत्सव समिति के सदस्यों ने भी मुस्लिम समुदाय की इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जुलूस के दौरान मिले सहयोग से लोगों में सकारात्मक माहौल बना और त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
प्रशासन की ओर से भी जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए गए थे। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने पूरे कार्यक्रम पर नजर रखी ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मद्दुर में इस बार का गणेश विसर्जन जुलूस केवल धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि सामाजिक एकता का उदाहरण भी बना। दोनों समुदायों के लोगों की भागीदारी ने क्षेत्र में शांति और सौहार्द का संदेश पहुंचाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारों के दौरान विभिन्न समुदायों की सकारात्मक भागीदारी सामाजिक रिश्तों को मजबूत करती है। ऐसे प्रयास तनावपूर्ण माहौल को खत्म करने और लोगों के बीच विश्वास बढ़ाने में मदद करते हैं।
मद्दुर की इस पहल की चर्चा अब आसपास के क्षेत्रों में भी हो रही है। पिछले साल की घटना के बाद इस बार जिस तरह दोनों समुदायों ने मिलकर त्योहार मनाया, उसे स्थानीय लोग एक बदलाव के रूप में देख रहे हैं।
गणेश विसर्जन जुलूस शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हुआ। प्रशासन और स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इसी तरह आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना बनी रहेगी।