कर्नाटक

चर्माडी घाट में नेशनल हाईवे चौड़ीकरण की तैयारी, 7,500 से ज्यादा पेड़ काटने का प्रस्ताव

Kavita2
21 Sept 2026 11:16 AM IST
चर्माडी घाट में नेशनल हाईवे चौड़ीकरण की तैयारी, 7,500 से ज्यादा पेड़ काटने का प्रस्ताव
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बेंगलुरु। लैंडस्लाइड यानी भू-स्खलन के लिहाज से संवेदनशील चर्माडी घाट क्षेत्र में नेशनल हाईवे-73 के चौड़ीकरण की योजना को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं सामने आई हैं। प्रस्तावित परियोजना के तहत सड़क विस्तार के लिए 7,500 से ज्यादा पेड़ों को काटे जाने की संभावना है। इसको लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं और भू-स्खलन जोखिम तथा वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत आकलन किए जाने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) के नेशनल हाईवे डिवीजन की ओर से चर्माडी घाट क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव रखा गया है। परियोजना के लिए करीब 38.70 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई जा रही है।

चर्माडी घाट क्षेत्र अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण पहले से ही संवेदनशील माना जाता है। यहां बारिश के मौसम में भू-स्खलन की घटनाओं का खतरा बना रहता है। ऐसे में सड़क चौड़ीकरण के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी भी बड़े निर्माण कार्य से पहले क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, मिट्टी की मजबूती और भू-स्खलन की संभावना का वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है। उनका आरोप है कि परियोजना से पहले लैंडस्लाइड से जुड़े पर्याप्त आकलन नहीं किए गए हैं।

पर्यावरण संगठनों ने वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चर्माडी घाट क्षेत्र में मौजूद जैव विविधता और वन्यजीवों के आवास पर परियोजना के प्रभाव का सही मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

कार्यकर्ताओं ने विशेष रूप से टाइगर कॉरिडोर पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सड़क विस्तार और पेड़ों की कटाई से वन्यजीवों के प्राकृतिक रास्तों पर असर पड़ सकता है।

हालांकि परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण का उद्देश्य यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना और लोगों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराना है। विभाग की ओर से सभी आवश्यक प्रक्रियाओं और नियमों का पालन करने की बात कही जा रही है।

नेशनल हाईवे-73 क्षेत्रीय संपर्क के लिए महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। सड़क चौड़ीकरण से यात्रा समय कम होने और यातायात सुविधा बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। लेकिन इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण को लेकर संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी सामने है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी और घाट क्षेत्रों में सड़क निर्माण के दौरान प्राकृतिक ढलानों, जल निकासी व्यवस्था और वन क्षेत्र का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। यदि निर्माण कार्यों में सावधानी नहीं बरती जाती तो बारिश के दौरान भूस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि परियोजना शुरू करने से पहले विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) कराया जाए। उनका कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरणीय सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

चर्माडी घाट में पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है, जब देशभर में विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर बहस चल रही है। वन क्षेत्र और जैव विविधता वाले इलाकों में निर्माण कार्यों को लेकर विशेषज्ञ लगातार सतर्कता बरतने की सलाह देते रहे हैं।

फिलहाल परियोजना को लेकर विभागीय स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। वहीं, पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि सभी पहलुओं की जांच और वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाए।

अब नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग पर्यावरणीय चिंताओं और स्थानीय लोगों की मांगों को ध्यान में रखते हुए आगे क्या कदम उठाते हैं। चर्माडी घाट जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सड़क विस्तार के साथ सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों को प्राथमिकता देना बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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