बेंगलुरु। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पथ संचलन में शामिल होना कर्नाटक के दो सरकारी शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। शिक्षा विभाग ने दोनों शिक्षकों को कर्नाटक सिविल सेवा (आचरण) नियमावली, 2021 के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच पूरी होने तक दोनों शिक्षकों को सेवा से अलग रखा गया है।

निलंबित किए गए शिक्षकों में हुनसगी स्थित सरकारी बालिका उच्च विद्यालय के सहायक शिक्षक गुरुराज जोशी और सुरपुर तालुका के कुप्पी स्थित सरकारी निम्न प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक अन्ना साहेब देशमुख शामिल हैं।

शिक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। विभाग का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों के लिए निर्धारित आचरण नियमों का पालन करना जरूरी है, जबकि कुछ लोगों ने इस कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठाए हैं।

आचरण नियमों के उल्लंघन का आरोप

शिक्षा विभाग के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों को किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल होने से बचना चाहिए, जिससे उनकी निष्पक्षता या सरकारी सेवा की मर्यादा प्रभावित हो सकती है। विभाग ने RSS के पथ संचलन में शिक्षकों की भागीदारी को इसी संदर्भ में नियमों का उल्लंघन माना है।

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि दोनों शिक्षकों के खिलाफ प्रारंभिक जांच के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई है। अब विस्तृत जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि उन्होंने किन परिस्थितियों में कार्यक्रम में भाग लिया और क्या यह सेवा नियमों के दायरे में आता है।

दोनों शिक्षकों की भूमिका की होगी जांच

निलंबन आदेश के बाद शिक्षा विभाग अब मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगा। इसमें कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी, भागीदारी की प्रकृति और सरकारी कर्मचारी के रूप में उनके दायित्वों का आकलन किया जाएगा।

विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोप साबित नहीं होते हैं तो विभाग आगे का निर्णय लेगा।

सरकारी कर्मचारियों के लिए तय हैं नियम

सरकारी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों के लिए आचरण नियम बनाए गए हैं, ताकि वे अपने पद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखें। इन नियमों के तहत कर्मचारियों के राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने को लेकर दिशा-निर्देश तय किए गए हैं।

कर्नाटक सिविल सेवा (आचरण) नियमावली, 2021 के तहत सरकारी कर्मचारियों को ऐसी गतिविधियों से दूर रहने की अपेक्षा की जाती है, जो उनकी सरकारी जिम्मेदारियों पर सवाल खड़े कर सकती हैं।

कार्रवाई के बाद शुरू हुई बहस

दो शिक्षकों के निलंबन के बाद राज्य में इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई है। कुछ लोगों का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों को सेवा नियमों का पालन करना चाहिए और विभाग की कार्रवाई उचित है।

वहीं, कुछ लोगों ने सवाल उठाया है कि किसी सामाजिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने को किस सीमा तक सरकारी सेवा नियमों के तहत देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि इस मामले में तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

शिक्षा विभाग ने अपनाया सख्त रुख

कर्नाटक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी कर्मचारी यदि नियमों का उल्लंघन करते पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि सरकारी सेवकों की जिम्मेदारी होती है कि वे अपनी भूमिका को निष्पक्ष और मर्यादित तरीके से निभाएं।

अधिकारियों के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों की गतिविधियों से जनता में सरकार और प्रशासन की छवि प्रभावित होती है। इसलिए आचरण नियमों का पालन जरूरी है।

आगे जांच के बाद होगा फैसला

फिलहाल दोनों शिक्षकों का निलंबन विभागीय जांच पूरी होने तक जारी रहेगा। जांच के दौरान सभी पक्षों को सुना जाएगा और उसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब सरकारी कर्मचारियों की सामाजिक और सार्वजनिक गतिविधियों में भागीदारी को लेकर देशभर में चर्चा होती रही है। अब सबकी नजर कर्नाटक शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर है।

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