बेंगलुरु: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के बाहरी इलाके में कथित तौर पर अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री करने वाले एक गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से स्थानीय स्तर पर बनी पांच पिस्तौल और 10 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। जांच की शुरुआत अनेकल इलाके में गश्त के दौरान संदिग्ध हालत में बैग लेकर खड़े एक व्यक्ति को हिरासत में लेने से हुई थी।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रदीप रमेश (30), रिजवान पाशा (36), मनोज (28), वेंकटराज (26), शिवराज (30), गोपी (28) और नंजप्पा (30) के रूप में हुई है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने हथियार कहां से हासिल किए और इन्हें किन लोगों को बेचने की तैयारी थी।

रेलवे गेट के पास संदिग्ध हालत में मिला प्रदीप

पुलिस के अनुसार मामले का खुलासा 14 अगस्त को हुआ। पुलिस की टीम अनेकल क्षेत्र में नियमित गश्त कर रही थी। इसी दौरान हल्देनाहल्ली रेलवे गेट के पास एक व्यक्ति संदिग्ध हालत में बैग लेकर खड़ा दिखाई दिया।

पुलिसकर्मियों ने उसकी गतिविधियों पर संदेह होने के बाद उससे पूछताछ की। व्यक्ति की पहचान प्रदीप रमेश के रूप में हुई। उसके पास मौजूद बैग की तलाशी लेने पर कथित तौर पर हथियार और उससे संबंधित सामग्री मिलने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।

इसके बाद प्रदीप से विस्तृत पूछताछ शुरू की गई। पुलिस का दावा है कि इसी पूछताछ से अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी सामने आई।

एक आरोपी से खुली पूरे नेटवर्क की परतें

प्रदीप से पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने अन्य संदिग्धों की तलाश शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर रिजवान पाशा, मनोज, वेंकटराज, शिवराज, गोपी और नंजप्पा के नाम सामने आए।

पुलिस ने अलग-अलग कार्रवाई करते हुए इन सभी को गिरफ्तार कर लिया। इस तरह मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या सात हो गई।

पुलिस का आरोप है कि ये लोग अवैध रूप से हथियार हासिल करने और उन्हें आगे बेचने वाले नेटवर्क से जुड़े थे। हालांकि आरोपियों की अलग-अलग भूमिका और हथियारों की खरीद-बिक्री में उनकी भागीदारी की विस्तृत जांच अभी जारी है।

पांच देसी पिस्तौल और 10 कारतूस बरामद

पुलिस के अनुसार पूरे ऑपरेशन के दौरान आरोपियों के कब्जे से स्थानीय स्तर पर तैयार पांच पिस्तौल और 10 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।

बरामद हथियारों को जब्त कर जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन हथियारों का निर्माण कहां किया गया था और वे बेंगलुरु तक किस रास्ते से पहुंचे।

हथियारों की बैलिस्टिक और फॉरेंसिक जांच से यह भी पता लगाया जा सकता है कि इनका इस्तेमाल पहले किसी आपराधिक वारदात में हुआ था या नहीं।

हथियारों के स्रोत की तलाश में पुलिस

मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल अवैध हथियारों के स्रोत का है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि स्थानीय स्तर पर बनी पिस्तौल आरोपियों तक किस व्यक्ति या गिरोह के माध्यम से पहुंचीं।

इसके साथ ही आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और संपर्कों की जांच के जरिए संभावित खरीदारों और आपूर्तिकर्ताओं की जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि यह नेटवर्क केवल बेंगलुरु और उसके आसपास सक्रिय था या इसके तार दूसरे जिलों अथवा राज्यों से भी जुड़े हुए हैं।

किन लोगों को बेचे जाने थे हथियार

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि बरामद हथियार किस उद्देश्य से रखे गए थे। आरोप है कि गिरोह इन्हें अवैध रूप से बेचने की गतिविधि में शामिल था।

जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि क्या आरोपियों ने पहले भी हथियारों की बिक्री की है और यदि ऐसा हुआ है तो वे हथियार किन लोगों तक पहुंचे। पुराने आपराधिक मामलों में इस्तेमाल हथियारों से भी बरामद पिस्तौलों की जानकारी का मिलान किया जा सकता है।

जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि हथियार केवल अपराधियों को बेचे जा रहे थे या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क सक्रिय था।

आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा

पुलिस गिरफ्तार किए गए सभी सात आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। अलग-अलग पुलिस थानों से उनके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

यह पता लगाया जा रहा है कि इनमें से किसी आरोपी के खिलाफ पहले हथियार रखने, मारपीट, लूट, धमकी या दूसरे गंभीर अपराधों से जुड़े मामले दर्ज हैं या नहीं।

यदि किसी आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने आता है तो पुलिस उन मामलों और मौजूदा हथियार नेटवर्क के बीच संभावित संबंध की भी जांच करेगी।

अनेकल इलाके से शुरू हुई जांच

पूरे मामले में अनेकल क्षेत्र में हुई प्रारंभिक गिरफ्तारी महत्वपूर्ण साबित हुई। पुलिस की नियमित गश्त के दौरान प्रदीप के संदिग्ध व्यवहार पर ध्यान नहीं जाता तो कथित हथियार नेटवर्क का खुलासा शायद इतनी जल्दी नहीं हो पाता।

14 अगस्त की कार्रवाई के बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने धीरे-धीरे अन्य संदिग्धों तक पहुंच बनाई। अधिकारियों के मुताबिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे गिरफ्तारियां भी संभव हैं।

अवैध हथियारों की सप्लाई पर पुलिस की नजर

बेंगलुरु जैसे बड़े शहर के बाहरी क्षेत्रों में अवैध हथियारों की मौजूदगी कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे हथियारों का इस्तेमाल लूट, हत्या, धमकी और गिरोहों के बीच संघर्ष जैसी घटनाओं में होने का खतरा रहता है।

इसी वजह से पुलिस हथियारों की सप्लाई चेन की जड़ तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। स्थानीय स्तर पर बनी पिस्तौलें कहां तैयार की गईं, उन्हें कौन लेकर आया और किस कीमत पर आगे बेचा जाना था, इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।

आगे बढ़ सकती है जांच

सात आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अब उनके संपर्कों और वित्तीय लेनदेन की ओर बढ़ सकती है। संदिग्ध बैंक लेनदेन, डिजिटल भुगतान और मोबाइल संचार की जांच से हथियारों के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का पता चल सकता है।

फिलहाल पुलिस ने पांच पिस्तौल और 10 जिंदा कारतूस जब्त किए हैं। बरामद हथियारों की तकनीकी जांच के साथ आरोपियों से पूछताछ जारी है।

पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह गिरोह कितने समय से सक्रिय था और इसके जरिए अब तक कितने हथियारों की कथित खरीद-बिक्री की गई। गिरफ्तार लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगा।

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