कर्नाटक

सीएम शिवकुमार को व्यावहारिक रहने की सलाह

Kavita2
22 Sept 2026 12:02 PM IST
सीएम शिवकुमार को व्यावहारिक रहने की सलाह
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बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की ओर से लगातार नई योजनाओं और विकास परियोजनाओं की घोषणाओं के बीच राज्य के वित्त विभाग ने उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखकर फैसले लेने की जरूरत बताई है। मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना से जुड़े प्रस्ताव पर अपनी राय देते हुए वित्त विभाग ने एक आंतरिक नोट में कहा कि मौजूदा वित्तीय स्थिति में अतिरिक्त संसाधन जुटाए बिना नई परियोजनाओं के लिए पैसा उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है।

वित्त विभाग की टिप्पणी राज्य सरकार की नीतियों पर अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि प्रस्तावों की वित्तीय व्यवहार्यता से जुड़ी विभागीय राय है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने हाल में ग्रामीण सड़क और बुनियादी ढांचे सहित कई बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी है। 18 सितंबर को मंगलुरु में हुई कैबिनेट बैठक में ₹32,611 करोड़ की विभिन्न परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी।

वित्त विभाग ने कहा उपलब्ध फंड का रखें ध्यान

वित्त विभाग ने मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के प्रस्ताव की समीक्षा के दौरान अपने नोट में उपलब्ध धनराशि की सीमा को ध्यान में रखते हुए "व्यावहारिक" रुख अपनाने की बात कही है।

विभाग की चिंता यह है कि राज्य सरकार के सामने पहले से कई योजनाओं और नियमित खर्चों के लिए वित्तीय जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में बड़ी नई परियोजनाओं की घोषणा के साथ उनके लिए स्थायी वित्तीय स्रोत की पहचान करना भी जरूरी होगा।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने हाल के महीनों में बुनियादी ढांचे, रोजगार, शिक्षा, किसानों और क्षेत्रीय विकास से संबंधित कई योजनाओं की घोषणा की है। सरकार ने अपने 100 दिन पूरे होने पर भी कई नई पहलों का रोडमैप पेश किया था।

ग्रामीण सड़कों के लिए ₹10 हजार करोड़ की योजना

राज्य कैबिनेट ने हाल में 'मुख्यमंत्री ग्रामीण रास्ते योजना' के तहत करीब 15 हजार किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के विकास के लिए ₹10 हजार करोड़ निर्धारित करने का फैसला किया है।

इसके अलावा गांवों में सीमेंट-कंक्रीट सड़कों और ड्रेनेज व्यवस्था के निर्माण के लिए ₹6 हजार करोड़ की परियोजना को भी मंजूरी दी गई। इन दोनों मदों को मिलाकर ग्रामीण बुनियादी ढांचे से संबंधित प्रस्तावों का आकार काफी बड़ा हो जाता है।

यही वजह है कि योजनाओं के क्रियान्वयन से पहले वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता महत्वपूर्ण हो गई है। किसी योजना को प्रशासनिक या कैबिनेट मंजूरी मिलने के बाद भी उसके लिए समय पर बजटीय राशि जारी करना जरूरी होता है।

लगातार सामने आ रही नई योजनाएं

डी.के. शिवकुमार ने जून 2026 में मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद कई नई योजनाओं और कार्यक्रमों की घोषणा की है। सरकार ने सितंबर में अपने 100 दिन पूरे होने के अवसर पर किसानों, विद्यार्थियों, युवाओं, औद्योगिक श्रमिकों और आम लोगों से जुड़ी कई पहलों को मंजूरी दी।

इनमें छोटे और सीमांत किसानों की जमीन की मुफ्त जुताई से जुड़ी 'मुख्यमंत्री नेगिला योगी' योजना भी शामिल है। इसके पायलट चरण के लिए करीब ₹152 करोड़ का शुरुआती प्रावधान किया गया। इसके अलावा 'थेगा सिरी' योजना के लिए ₹493 करोड़ और विद्यार्थियों के लिए फिजिकल शक्ति स्मार्ट कार्ड व्यवस्था जैसे प्रस्ताव भी मंजूर किए गए।

सरकार ने अगले वर्षों में रोजगार, निवेश, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विस्तार का व्यापक लक्ष्य भी रखा है।

एक लाख सरकारी नौकरियों का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने 10 सितंबर को राज्य के लिए दीर्घकालिक 'नव संकल्प' रोडमैप पेश किया था। इसमें एक लाख सरकारी नौकरियों, पांच लाख निजी क्षेत्र की नौकरियों और पांच नए प्रमुख शहरों सहित कई लक्ष्य शामिल किए गए हैं।

सरकार ने कर्नाटक को 2037 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य भी रखा है। इसके लिए निवेश, रोजगार, बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम करने की योजना बताई गई है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि सरकार अगले 500 दिनों में ₹1.5 लाख करोड़ के पूंजीगत निवेश का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।

कल्याण कर्नाटक के लिए भी कई घोषणाएं

मुख्यमंत्री ने हाल में कलबुर्गी में आयोजित कल्याण कर्नाटक उत्सव के दौरान भी कई नई पहलों की घोषणा की थी। इनमें निवेश, सरकारी भर्ती, स्वास्थ्य सेवाओं, शहरी बुनियादी ढांचे और पर्यटन से जुड़े कार्यक्रम शामिल थे।

सरकार ने कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के लिए नई क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मिशन और कलबुर्गी में 30 एकड़ में आईटी पार्क स्थापित करने की योजना भी सामने रखी है।

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के लिए सालाना ₹5 हजार करोड़ उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है।

₹32,611 करोड़ की परियोजनाओं को हाल में मंजूरी

मंगलुरु में आयोजित राज्य कैबिनेट की बैठक में सरकार ने कुल ₹32,611 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी। इनमें ग्रामीण सड़कें, डिजिटल बुनियादी ढांचा और सामाजिक कल्याण से जुड़े प्रस्ताव शामिल थे।

सरकार का कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों में कैबिनेट बैठकें आयोजित कर संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

इन बड़े फैसलों के बीच वित्त विभाग की टिप्पणी योजनाओं के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता पर ध्यान खींचती है। विभाग का रुख यह संकेत देता है कि नई योजनाओं के साथ राजस्व और खर्च के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा।

गारंटी योजनाओं पर भी बड़ा खर्च

कर्नाटक सरकार पहले से पांच प्रमुख गारंटी योजनाएं चला रही है। सरकार द्वारा सितंबर में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार मई 2023 के बाद इन गारंटी कार्यक्रमों पर लगभग ₹1.45 लाख करोड़ खर्च किए जाने का दावा किया गया है।

इनमें गृह लक्ष्मी, गृह ज्योति, अन्न भाग्य और शक्ति जैसी योजनाएं शामिल हैं। सरकार इन योजनाओं को सामाजिक कल्याण के अपने प्रमुख कार्यक्रमों के रूप में पेश करती रही है।

ऐसे में नई पूंजीगत परियोजनाओं और मौजूदा कल्याण योजनाओं के लिए एक साथ वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना बजट प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

वित्तीय अनुशासन और विकास के बीच संतुलन की चुनौती

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने अपनी सरकार के लिए तेज विकास और बड़े निवेश का एजेंडा रखा है। सरकार का दावा है कि उसके पहले 100 दिनों में ₹43,214 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। राज्य सरकार ने कर्नाटक की अर्थव्यवस्था का आकार ₹32.81 लाख करोड़ और विकास दर 8.1 प्रतिशत बताई है।

दूसरी ओर वित्त विभाग की ताजा टिप्पणी यह रेखांकित करती है कि परियोजनाओं की घोषणा के साथ उनके वित्तपोषण की स्पष्ट व्यवस्था भी जरूरी है।

फिलहाल ग्रामीण सड़क योजना सहित सरकार की नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बजटीय संसाधनों का प्रबंधन महत्वपूर्ण रहेगा। वित्त विभाग की सलाह और सरकार की विकास प्राथमिकताओं के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है, यह आने वाले बजटीय और प्रशासनिक फैसलों में स्पष्ट होगा।

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