बेंगलुरु। कर्नाटक की वित्तीय स्थिति को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। BJP विधायक डॉ. भरत शेट्टी ने मंगलवार को राज्य सरकार से आर्थिक स्थिति पर एक 'श्वेत पत्र' जारी करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की देनदारियां बढ़ रही हैं, विभिन्न विभागों के बिल लंबित हैं और सरकार को अपनी वित्तीय जिम्मेदारियां पूरी करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यह मांग वित्त विभाग के एक कथित आंतरिक नोट की खबरों के बीच सामने आई है, जिसमें सरकार को नई योजनाओं और परियोजनाओं की घोषणा करते समय यथार्थवादी रहने और अतिरिक्त खर्च से पहले राजस्व के नए स्रोत तलाशने की सलाह दिए जाने की बात कही गई है।वित्त विभाग के नोट को लेकर विपक्ष ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर सरकार के मंत्री सतीश जारकीहोली ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य के बजट और वित्तीय स्थिति से जुड़ी विस्तृत जानकारी वित्त विभाग का प्रभार संभाल रहे मुख्यमंत्री दे सकते हैं।
भरत शेट्टी ने उठाए वित्तीय स्थिति पर सवाल
BJP विधायक डॉ. भरत शेट्टी ने कहा कि सरकार को राज्य की मौजूदा आर्थिक स्थिति स्पष्ट करने के लिए श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। विपक्ष की ओर से दावा किया जा रहा है कि लंबित बिल और बढ़ती देनदारियां राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव का संकेत हैं।BJP की ओर से वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र की मांग केवल शेट्टी तक सीमित नहीं है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने भी राज्य की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र और इस मुद्दे पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।हाल में विधान परिषद में विपक्ष के मुख्य सचेतक एन. रवि कुमार ने भी तटीय कर्नाटक के लिए घोषित ₹32,611 करोड़ के विकास कार्यों के वित्तीय स्रोत पर सवाल उठाते हुए श्वेत पत्र की मांग की थी। उन्होंने विभिन्न विभागों में ठेकेदारों के हजारों करोड़ रुपये के बिल लंबित होने का दावा किया था। सरकार की ओर से इन आरोपों का राजनीतिक रूप से प्रतिवाद किया गया।
वित्त विभाग के नोट ने बढ़ाई चर्चा
मामले में नया मोड़ वित्त विभाग के कथित आंतरिक नोट से आया। रिपोर्ट के मुताबिक विभाग ने सरकार को नई योजनाओं और परियोजनाओं की घोषणा करते समय वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए यथार्थवादी रहने की सलाह दी है।रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य पर खर्च का दबाव है और नई परियोजनाओं के लिए धन आवंटित करने से पहले अतिरिक्त राजस्व स्रोत विकसित करने की जरूरत बताई गई है। मौजूदा वित्तीय दबाव का असर खर्च, वेतन भुगतान और सब्सिडी भुगतान पर पड़ने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।इसके साथ ही बारिश की कमी और सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण बिजली उत्पादन और किसानों के लिए पेयजल व्यवस्था पर राज्य के खजाने पर अतिरिक्त ₹4,000 से ₹5,000 करोड़ तक का भार पड़ने का अनुमान भी रिपोर्ट में बताया गया है।
सतीश जारकीहोली ने क्या कहा?
वित्त विभाग के कथित नोट पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री सतीश जारकीहोली ने कहा कि राज्य के बजट की वास्तविक स्थिति के बारे में मुख्यमंत्री जानकारी दे सकते हैं, क्योंकि वित्त विभाग का प्रभार मुख्यमंत्री के पास है।उनका बयान ऐसे समय आया है जब विपक्ष वित्त विभाग की कथित चेतावनी को सरकार की वित्तीय स्थिति से जोड़कर देख रहा है। सरकार की ओर से वित्तीय प्रबंधन और विकास कार्यों को लेकर विपक्ष के आरोपों का विरोध भी किया गया है।
बजट के आंकड़े क्या बताते हैं?
कर्नाटक के 2026-27 के बजट के मुताबिक राज्य का GSDP मौजूदा कीमतों पर करीब ₹33.05 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। इस वित्त वर्ष में कर्ज की अदायगी को छोड़कर कुल खर्च ₹4.12 लाख करोड़ से अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है। वहीं उधारी को छोड़कर राज्य की प्राप्तियां करीब ₹3.15 लाख करोड़ अनुमानित हैं।2026-27 के लिए राज्य का राजस्व घाटा ₹22,957 करोड़ यानी GSDP का करीब 0.7 प्रतिशत अनुमानित है। राजकोषीय घाटे का लक्ष्य ₹97,448 करोड़ यानी GSDP का 2.9 प्रतिशत रखा गया है। यह राज्यों के लिए 16वें वित्त आयोग की अनुशंसित 3 प्रतिशत की सीमा के आसपास है।वित्त वर्ष के अंत में कर्नाटक की कुल बकाया देनदारियां GSDP के करीब 25 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ये आधिकारिक बजट अनुमान हैं; विपक्ष के मौजूदा नकदी दबाव और लंबित भुगतान संबंधी आरोप अलग दावे हैं, जिनकी स्थिति चालू वर्ष के वास्तविक खातों से अधिक स्पष्ट होगी।
गारंटी योजनाओं पर ₹51 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च
कर्नाटक सरकार की पांच प्रमुख गारंटी योजनाएं भी राज्य के बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। 2026-27 में इन योजनाओं पर करीब ₹51,286 करोड़ खर्च होने का अनुमान है, जो कर्ज भुगतान को छोड़कर राज्य के कुल खर्च का लगभग 12 प्रतिशत है।PRS के बजट विश्लेषण के अनुसार CAG ने पहले कहा था कि गारंटी योजनाओं के कार्यान्वयन से राजस्व व्यय और राजस्व घाटा बढ़ा। दूसरी ओर इन योजनाओं को लेकर सरकार का कहना रहा है कि ये कल्याणकारी कार्यक्रम लोगों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराते हैं।
CAG की रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण
कर्नाटक की वित्तीय स्थिति का स्वतंत्र आकलन करने के लिए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण है। मार्च 2026 में CAG ने कर्नाटक सरकार के 2024-25 के राज्य वित्त पर अपनी रिपोर्ट विधानसभा में पेश की थी।इसके अलावा महालेखाकार की ओर से 2026-27 के मासिक वित्तीय संकेतक भी प्रकाशित किए जा रहे हैं। अगस्त 2026 तक के मासिक आंकड़े उपलब्ध हैं, जिससे बजट अनुमान और वास्तविक आय-व्यय की तुलना की जा सकती है।
श्वेत पत्र की मांग पर सियासत तेज
विपक्ष की मांग है कि सरकार श्वेत पत्र जारी करके राज्य की देनदारियों, लंबित बिलों, उपलब्ध नकदी, नई परियोजनाओं के वित्तीय स्रोत और भविष्य की खर्च प्रतिबद्धताओं की स्थिति सार्वजनिक करे। सरकार की ओर से अभी इस मांग को स्वीकार किए जाने की कोई पुष्टि सामने नहीं आई है।फिलहाल वित्त विभाग के कथित आंतरिक नोट और BJP नेताओं की श्वेत पत्र की मांग ने कर्नाटक की आर्थिक स्थिति को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। आधिकारिक बजट में राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा के भीतर अनुमानित है, जबकि विपक्ष मौजूदा नकदी प्रवाह, लंबित भुगतानों और नई घोषणाओं की फंडिंग पर सवाल उठा रहा है। आने वाले समय में सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और चालू वित्त वर्ष के वास्तविक आय-व्यय के आंकड़े इस बहस को और स्पष्ट कर सकते हैं।