बेंगलुरु। कर्नाटक के मलनाड और तटीय इलाकों में करीब 20 दिनों के अंतराल के बाद मानसून की बारिश ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। सोमवार शाम से शुरू हुई तेज बारिश मंगलवार को भी जारी रही। कोडगु, उडुपी, दक्षिण कन्नड़, उत्तर कन्नड़ और शिवमोग्गा के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया, जबकि दक्षिण कन्नड़ और कोडगु जिलों के कुछ हिस्सों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं। राहत की बात यह रही कि राज्य में अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

मंगलवार को मलनाड क्षेत्र के कई हिस्सों में बारिश का दौर तेज रहा। पहाड़ी और वन क्षेत्रों में लगातार पानी गिरने से छोटे-बड़े नाले उफान पर आ गए। कई स्थानों पर पानी का बहाव सामान्य से काफी अधिक रहा। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी की जा रही है।

सोमवार शाम से अचानक बढ़ी बारिश ने उन इलाकों में फिर से मानसूनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं, जहां पिछले करीब तीन सप्ताह से बारिश अपेक्षाकृत कमजोर रही थी। लंबे अंतराल के बाद हुई तेज बारिश से किसानों और स्थानीय लोगों को जहां राहत मिली, वहीं पहाड़ी इलाकों में जलभराव और भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है।

दक्षिण कन्नड़ जिले के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों से मिट्टी और मलबा सड़कों पर आने की घटनाएं हुईं। कोडगु में भी कुछ स्थानों पर भूस्खलन की सूचना मिली। इन इलाकों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन का खतरा बना रहता है। प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों द्वारा प्रभावित सड़कों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

कोडगु, जिसे कर्नाटक का प्रमुख पहाड़ी और कॉफी उत्पादक क्षेत्र माना जाता है, में भारी बारिश का असर सामान्य जनजीवन पर भी पड़ सकता है। जिले में कई नदियां, जलधाराएं और छोटे-बड़े जलस्रोत हैं। लगातार बारिश होने पर इनका जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बन सकती है।

उडुपी और दक्षिण कन्नड़ के तटीय क्षेत्रों में भी बारिश के कारण नदियों और नालों में पानी का बहाव बढ़ गया। तटीय कर्नाटक में बारिश के दौरान जलभराव और सड़क किनारे मिट्टी खिसकने की घटनाएं आम हैं। कई ग्रामीण और पहाड़ी मार्गों पर वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

उत्तर कन्नड़ और शिवमोग्गा के कुछ हिस्सों में भी पिछले 24 घंटों के दौरान कई बार भारी बारिश हुई। मलनाड क्षेत्र में पहले से ही मिट्टी में नमी अधिक होने के कारण लगातार बारिश होने पर भूस्खलन की आशंका बढ़ जाती है। प्रशासन द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाए जाने की संभावना है।

बारिश की वापसी का असर कृषि गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। लंबे अंतराल के बाद हुई बारिश से खेतों और बागानों को पानी मिला है। खासकर मलनाड और तटीय क्षेत्रों में धान, सुपारी, नारियल और कॉफी जैसी फसलों के लिए बारिश महत्वपूर्ण है। हालांकि, अत्यधिक बारिश फसलों और खेतों के लिए नुकसानदायक भी हो सकती है। खेतों में पानी जमा होने या मिट्टी बहने से किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

स्थानीय प्रशासन के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती बारिश से होने वाले संभावित नुकसान को रोकना है। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें भूस्खलन की वजह से बाधित हो सकती हैं। ऐसे में जेसीबी और अन्य मशीनरी को जरूरत वाले स्थानों पर तैयार रखना महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा नदी और नालों के किनारे रहने वाले लोगों को जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने की सलाह दी जा सकती है।

करीब 20 दिनों के अंतराल के बाद तटीय कर्नाटक में मानसून की सक्रियता बढ़ने से मौसम में भी बदलाव देखने को मिला है। सोमवार शाम से बारिश तेज होने के बाद मंगलवार को कई क्षेत्रों में रुक-रुककर तेज बारिश हुई। कुछ स्थानों पर बारिश की अवधि लंबी रही, जिससे सड़कों पर पानी भरने और यातायात प्रभावित होने की स्थिति बनी।

हालांकि, अभी तक राज्य में किसी व्यक्ति के हताहत होने की खबर नहीं है। यह राहत की बात है, लेकिन मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है। लगातार बारिश की स्थिति में छोटी घटनाएं भी बड़े हादसे का रूप ले सकती हैं, विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में।

दक्षिण कन्नड़ और कोडगु में भूस्खलन की घटनाओं के बाद स्थानीय अधिकारियों की नजर उन क्षेत्रों पर है, जहां पहले भी बारिश के दौरान सड़कें और पहाड़ी ढलान प्रभावित होते रहे हैं। लोगों से भी अपील की जा सकती है कि वे अनावश्यक रूप से ऐसे रास्तों पर यात्रा न करें जहां पानी का तेज बहाव हो या पहाड़ी से मलबा गिरने की आशंका हो।

मौसम की यह सक्रियता आने वाले दिनों में किस रूप में रहती है, इस पर किसानों, प्रशासन और आम लोगों की नजर रहेगी। यदि बारिश लगातार जारी रहती है तो नदियों और नालों का जलस्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में बाढ़ और भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में निगरानी और राहत तैयारियों को मजबूत रखना जरूरी होगा।

फिलहाल कर्नाटक के मलनाड और तटीय जिलों में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। कोडगु, उडुपी, दक्षिण कन्नड़, उत्तर कन्नड़ और शिवमोग्गा के कई हिस्सों में भारी बारिश ने जहां सूखे जैसे हालात से राहत दी है, वहीं पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और जलभराव का खतरा भी बढ़ा दिया है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है।

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