बेंगलुरु। राज्य में लघु सिंचाई परियोजनाओं और जल निकायों की स्थिति को लेकर एक बड़ा सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। लघु सिंचाई तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. अजय धर्म सिंह ने बताया कि राज्य में झीलों और अन्य जल निकायों का सर्वे पूरा हो गया है। सातवीं लघु सिंचाई जनगणना तथा दूसरे जल निकायों, विशेष रूप से तालाबों और झीलों से संबंधित सर्वेक्षण का फील्ड वर्क अगस्त 2026 में पूरा किया गया।
मंत्री के अनुसार, यह सर्वे राज्य के जल संसाधनों की वास्तविक स्थिति को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सर्वेक्षण के दौरान ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को शामिल किया गया। इसके तहत राज्य के 30,671 गांवों, 300 शहरी स्थानीय निकायों और 7,128 शहरी वार्डों में फील्ड स्तर पर जानकारी जुटाई गई। व्यापक स्तर पर किए गए इस सर्वे से राज्य में मौजूद सिंचाई परियोजनाओं और जल निकायों का विस्तृत आंकड़ा तैयार किया गया है।
सर्वेक्षण में पूरे राज्य में कुल 14,18,894 भूजल परियोजनाएं दर्ज की गईं। इसके अलावा 77,573 सतही जल परियोजनाओं की भी पहचान की गई। वहीं, राज्य के विभिन्न हिस्सों में मौजूद 38,960 जल निकायों को सर्वे में दर्ज किया गया है। इन जल निकायों में झीलों, तालाबों, बांधों और अन्य प्रकार के जल स्रोतों से संबंधित जानकारी एकत्र की गई।
अधिकारियों के मुताबिक, सातवीं लघु सिंचाई जनगणना में उन सिंचाई परियोजनाओं को शामिल किया गया, जिनकी सिंचाई क्षमता 2,000 हेक्टेयर तक है। इस श्रेणी में आने वाली परियोजनाओं की स्थिति, उनके प्रकार और सिंचाई से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी जुटाई गई। इससे राज्य में छोटे और मध्यम स्तर की सिंचाई व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी।
वहीं, जल निकायों के सर्वेक्षण का उद्देश्य राज्य में मौजूद झीलों, तालाबों, बांधों और अन्य जल स्रोतों का व्यापक रिकॉर्ड तैयार करना था। जल निकायों से संबंधित जानकारी भविष्य में जल संरक्षण, पुनर्जीवन, सिंचाई, भूजल स्तर सुधारने और स्थानीय जल प्रबंधन की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
इस सर्वेक्षण को पूरा करने में बड़े स्तर पर फील्ड वर्क किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी वार्डों तक अधिकारियों और सर्वेक्षण से जुड़े कर्मचारियों ने मौके पर जाकर जल संसाधनों और सिंचाई परियोजनाओं से संबंधित जानकारी एकत्र की। राज्य के इतने बड़े भौगोलिक क्षेत्र को सर्वे में शामिल किए जाने के कारण इसे जल संसाधनों की स्थिति का व्यापक आकलन माना जा रहा है।
मंत्री डॉ. अजय धर्म सिंह ने बताया कि इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की ओर से पूरी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई। केंद्र की वित्तीय मदद से राज्य में सर्वेक्षण का कार्य व्यवस्थित तरीके से पूरा किया गया। अगस्त 2026 में फील्ड वर्क पूरा होने के बाद अब एकत्र किए गए आंकड़ों का उपयोग आगे की योजनाएं तैयार करने में किया जा सकेगा।
राज्य में बड़ी संख्या में मौजूद झीलों और अन्य जल निकायों की जानकारी सामने आने से जल संरक्षण की योजनाओं को भी नई दिशा मिल सकती है। 38,960 जल निकायों का रिकॉर्ड तैयार होना इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि इससे विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध जल स्रोतों की पहचान और उनकी स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी। भविष्य में इन जल निकायों के संरक्षण, गहरीकरण, पुनर्जीवन और अतिक्रमण से सुरक्षा जैसे कार्यों की योजना तैयार करने में भी यह डेटा उपयोगी हो सकता है।
इसी तरह, 14 लाख से अधिक भूजल परियोजनाओं और 77 हजार से अधिक सतही जल परियोजनाओं का आंकड़ा राज्य की सिंचाई व्यवस्था के व्यापक स्वरूप को दर्शाता है। कृषि क्षेत्र में सिंचाई की उपलब्धता किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में लघु सिंचाई परियोजनाओं का सटीक रिकॉर्ड सरकार को उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद कर सकता है, जहां सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जल संसाधनों का सही आंकड़ा किसी भी राज्य की जल नीति तैयार करने के लिए आधारभूत आवश्यकता है। जब किसी क्षेत्र में उपलब्ध झीलों, तालाबों, बांधों और सिंचाई परियोजनाओं की संख्या तथा उनकी स्थिति का आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद हो, तो सरकार उनके संरक्षण और विकास के लिए प्राथमिकता तय कर सकती है। इसके अलावा, भूजल और सतही जल के बीच संतुलन बनाए रखने की योजनाओं को भी बेहतर तरीके से लागू किया जा सकता है।
शहरी क्षेत्रों में जल निकायों का संरक्षण भी तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। बढ़ते शहरीकरण के कारण कई पारंपरिक जल स्रोत दबाव में हैं। ऐसे में शहरी स्थानीय निकायों और वार्ड स्तर पर किए गए सर्वे से जल निकायों की पहचान और उनके संरक्षण के लिए भविष्य की योजनाएं तैयार करने में सहायता मिल सकती है।
राज्य सरकार की ओर से सर्वेक्षण के आंकड़ों को आगे किस तरह इस्तेमाल किया जाएगा, इस पर भी नजर रहेगी। जल संकट, भूजल स्तर में गिरावट, सिंचाई की बढ़ती मांग और शहरीकरण जैसी चुनौतियों के बीच यह सर्वे सरकार के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार कर सकता है।
कुल मिलाकर, सातवीं लघु सिंचाई जनगणना और जल निकायों के सर्वेक्षण से राज्य के जल संसाधनों का एक व्यापक रिकॉर्ड सामने आया है। 30,671 गांवों, 300 शहरी स्थानीय निकायों और 7,128 शहरी वार्डों को कवर करते हुए किए गए इस सर्वे में 14,18,894 भूजल परियोजनाएं, 77,573 सतही जल परियोजनाएं और 38,960 जल निकाय दर्ज किए गए हैं। अगस्त 2026 में फील्ड वर्क पूरा होने के साथ अब इस आंकड़े के आधार पर जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आगे की रणनीति तैयार करने का रास्ता साफ हो गया है।