चिकमगलूर। धर्म और जाति के आधार पर समाज में मतभेद पैदा करने वाली घटनाओं के बीच कर्नाटक के चिकमगलूर जिले से आपसी भाईचारे की प्रेरक तस्वीर सामने आई है। जिले के एनआर पुरा शहर की रहने वाली मुस्लिम महिला जुबेदा पिछले 18 वर्षों से गणेशोत्सव के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वह राजीव नगर श्री विनायक सेवा समिति की अध्यक्ष हैं और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर हर वर्ष तीन दिवसीय गणेशोत्सव का आयोजन कराती हैं।

एनआर पुरा टाउन पंचायत की पूर्व अध्यक्ष रह चुकीं जुबेदा की इस पहल की स्थानीय स्तर पर खूब सराहना हो रही है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर उनकी अगुवाई में समिति भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करती है। तीन दिनों तक पूजा-अर्चना और विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उत्सव में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग भाग लेते हैं।

जुबेदा का कहना है कि किसी भी त्योहार का वास्तविक उद्देश्य लोगों को जोड़ना और समाज में प्रेम का संदेश देना होता है। इसी भावना के साथ वह वर्षों से गणेशोत्सव समिति की जिम्मेदारी निभाती आ रही हैं। उनके लिए यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मोहल्ले के लोगों को एक मंच पर लाने और नई पीढ़ी को आपसी सद्भाव का संदेश देने का माध्यम भी है।

18 वर्षों से आयोजन में सक्रिय भूमिका

राजीव नगर श्री विनायक सेवा समिति पिछले कई वर्षों से सार्वजनिक रूप से गणेशोत्सव मनाती आ रही है। समिति के आयोजन में स्थानीय निवासी सामूहिक रूप से सहयोग करते हैं। प्रतिमा स्थापना से लेकर पूजा की व्यवस्था, पंडाल की सजावट, प्रसाद वितरण और विसर्जन तक अलग-अलग जिम्मेदारियां सदस्यों के बीच बांटी जाती हैं।

जुबेदा पिछले 18 वर्षों से आयोजन की कमान संभाल रही हैं। समिति के सदस्यों के साथ बैठक करना, आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करना और कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में वह सक्रिय रहती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को हमेशा पूरी गंभीरता से निभाया है।

गणेशोत्सव के तीन दिनों के दौरान राजीव नगर में उत्सव जैसा माहौल रहता है। भगवान गणेश की पूजा में स्थानीय हिंदू परिवार शामिल होते हैं, जबकि मुस्लिम और अन्य समुदायों के लोग व्यवस्था तथा आयोजन में सहयोग करते हैं। इस सामूहिक भागीदारी से त्योहार सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक एकता का संदेश देता है।

पूर्व टाउन पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं जुबेदा

जुबेदा एनआर पुरा टाउन पंचायत की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। सार्वजनिक जीवन से जुड़े रहने के कारण उन्हें स्थानीय समस्याओं और लोगों की जरूरतों की समझ है। पंचायत की जिम्मेदारी संभालने के दौरान भी उन्होंने सभी समुदायों को साथ लेकर काम करने पर जोर दिया।

गणेशोत्सव समिति की अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका को भी इसी सामाजिक सोच से जोड़कर देखा जा रहा है। उनका मानना है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में सभी लोगों की भागीदारी से आपसी विश्वास मजबूत होता है। धार्मिक विविधता के बावजूद मोहल्ले के निवासी एक-दूसरे के त्योहारों और खुशियों में शामिल होते हैं तो समाज में दूरियां कम होती हैं।

उनकी अगुवाई में होने वाले आयोजन में धार्मिक परंपराओं का पालन समिति के जानकार सदस्यों और पुजारियों की देखरेख में किया जाता है। जुबेदा मुख्य रूप से प्रबंधन और सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने का दायित्व निभाती हैं। इस कारण आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का प्रतीक भी बन गया है।

तीन दिनों तक होती है गणपति की आराधना

राजीव नगर श्री विनायक सेवा समिति हर वर्ष गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करती है। तीन दिनों तक चलने वाले आयोजन में सुबह और शाम पूजा तथा आरती की जाती है। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था भी की जाती है। स्थानीय परिवार अपने बच्चों के साथ पंडाल में पहुंचकर भगवान गणेश का आशीर्वाद लेते हैं।

कार्यक्रम के अंतिम दिन परंपरागत तरीके से प्रतिमा विसर्जन किया जाता है। इस दौरान समिति के सदस्य व्यवस्था संभालते हैं और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हैं। आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से पूरा कराने में सभी समुदायों के लोगों का सहयोग लिया जाता है।

उत्सव के दौरान बच्चों और युवाओं की भागीदारी पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। माना जाता है कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति समझने के साथ विविधता का सम्मान करने की सीख मिलती है। जब बच्चे अलग-अलग समुदायों के लोगों को मिलकर त्योहार मनाते देखते हैं तो उनमें सामाजिक सद्भाव की भावना विकसित होती है।

स्थानीय लोगों ने की पहल की सराहना

जुबेदा की भूमिका को लेकर स्थानीय लोगों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि किसी मुस्लिम महिला का लगातार 18 वर्षों तक गणेशोत्सव की अगुवाई करना एनआर पुरा के सामाजिक ताने-बाने की मजबूती को दर्शाता है। यह आयोजन बताता है कि धार्मिक पहचान अलग होने के बाद भी समाज के लोग एक-दूसरे की आस्था का सम्मान कर सकते हैं।

क्षेत्र के लोगों के अनुसार, राजीव नगर में त्योहारों के दौरान हमेशा सहयोग का वातावरण रहता है। गणेशोत्सव में मुस्लिम परिवार सहयोग करते हैं तो दूसरे अवसरों पर हिंदू परिवार भी अपने मुस्लिम पड़ोसियों की खुशियों में शामिल होते हैं। यही व्यवहार स्थानीय स्तर पर भाईचारे की बुनियाद को मजबूत बनाता है।

हालांकि, सोशल मीडिया पर किसी भी सांप्रदायिक दावे को साझा करते समय तथ्य और स्थानीय संदर्भ की पुष्टि जरूरी होती है। इस मामले में उपलब्ध जानकारी के अनुसार जुबेदा लंबे समय से समिति से जुड़ी हैं और आयोजन के प्रबंधन में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं।

धार्मिक सद्भाव का मजबूत संदेश

भारत में विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के त्योहार लंबे समय से सामुदायिक भागीदारी के साथ मनाए जाते रहे हैं। कई स्थानों पर अलग धर्म के लोग पंडाल बनाने, सजावट करने, प्रसाद बांटने और व्यवस्थाएं संभालने में सहयोग करते हैं। एनआर पुरा का यह आयोजन उसी साझा सांस्कृतिक परंपरा का उदाहरण बनकर सामने आया है।

जुबेदा और राजीव नगर श्री विनायक सेवा समिति की पहल ऐसे समय में विशेष संदेश देती है, जब छोटी-छोटी घटनाओं को सांप्रदायिक रंग देकर सामाजिक तनाव पैदा करने की कोशिश होती है। उनका कार्य यह दिखाता है कि आस्था का सम्मान करते हुए भी अलग-अलग समुदाय मिलकर सामाजिक जिम्मेदारियां निभा सकते हैं।

गणेशोत्सव की अगुवाई कर रहीं जुबेदा ने अपने व्यवहार से साबित किया है कि त्योहार केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे लोगों को जोड़ने का अवसर भी बन सकते हैं। लगातार 18 वर्षों से जारी उनकी यह पहल धार्मिक सद्भाव, परस्पर सम्मान और सामाजिक एकता की प्रेरक मिसाल बन गई है।

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