बेंगलुरु: लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की जांच से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों पर सफाई दी है। शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसी को कभी कोई चुनौती नहीं दी। कुछ खबरों की हेडलाइन से ऐसा संदेश गया कि वह ईडी को चुनौती दे रहे हैं, जबकि उनका वास्तविक बयान इससे अलग था। उन्होंने मीडिया संस्थानों से उनके वक्तव्य को सही संदर्भ में प्रकाशित करने की अपील की।
जारकीहोली ने पत्रकारों से कहा कि ईडी एक जांच एजेंसी है और उसे चुनौती देने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने पूछा कि वह ईडी को चुनौती क्यों देंगे। मंत्री के अनुसार उन्होंने जांच प्रक्रिया को लेकर कोई टकराव वाला बयान नहीं दिया था। इसके बावजूद उनके वक्तव्य की ऐसी व्याख्या की गई जिससे लगा कि वह केंद्रीय एजेंसी को चुनौती दे रहे हैं।
उन्होंने किसी मीडिया रिपोर्ट की हेडलाइन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके बयान को सनसनीखेज तरीके से प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। जारकीहोली ने कहा कि वह स्वयं स्पष्ट करना चाहते हैं कि उन्होंने वास्तव में क्या कहा था। उनका कहना था कि मीडिया को बयान के पूरे संदर्भ को देखना चाहिए और ऐसी भाषा से बचना चाहिए जो उनके वास्तविक आशय को बदल दे।
मंत्री की यह सफाई ईडी द्वारा उनके परिवार और करीबियों से जुड़े परिसरों पर तलाशी लिए जाने के बाद सामने आई है। ईडी ने 9 और 10 सितंबर को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी फेमा के तहत बेंगलुरु, बेलगावी, गोकक और कोलकाता में 21 परिसरों की तलाशी लेने की जानकारी दी थी। ये परिसर कथित रूप से जारकीहोली, उनके परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों से जुड़े बताए गए हैं।
एजेंसी के अनुसार तलाशी का उद्देश्य कथित अघोषित विदेशी निवेश, सीमा पार व्यापारिक संबंधों और आर्थिक लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों की जांच करना था। ईडी ने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान भारतीय मुद्रा में करीब 3.30 करोड़ रुपये और लगभग 15 लाख रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा मिली। इस तरह जब्त मुद्रा का कुल अनुमानित मूल्य करीब 3.45 करोड़ रुपये बताया गया।
ईडी ने डिजिटल उपकरण और कई दस्तावेज मिलने का भी दावा किया है। एजेंसी के अनुसार इनकी जांच विदेशों में किए गए कथित निवेश और व्यावसायिक संपर्कों की जानकारी जुटाने के लिए की जा रही है। कुछ दस्तावेजों को सार्वजनिक निर्माण विभाग के ठेकों में कथित अनियमितताओं से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि ये सभी ईडी के शुरुआती दावे हैं और अदालत ने आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
केंद्रीय एजेंसी ने जारकीहोली परिवार के कथित विदेशी कारोबारी संबंधों की जांच करने की बात कही है। रिपोर्टों के अनुसार एजेंसी कुछ अफ्रीकी कंपनियों में निवेश और हिस्सेदारी से संबंधित लेन-देन की पड़ताल कर रही है। जांच में यह देखा जा सकता है कि विदेश में निवेश के दौरान भारतीय विदेशी मुद्रा कानूनों और आवश्यक घोषणाओं का पालन किया गया था या नहीं।
फेमा मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा लेन-देन और सीमा पार निवेश के नियमन से संबंधित कानून है। इसके तहत जांच का अर्थ स्वतः किसी व्यक्ति का दोषी होना नहीं होता। एजेंसी को दस्तावेजों, लेन-देन और संबंधित पक्षों के उत्तरों का परीक्षण करना होता है। इसके बाद ही उल्लंघन की प्रकृति और आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होती है।
तलाशी से जुड़े परिसरों में मंत्री के अलावा उनके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के ठिकाने भी शामिल बताए गए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जारकीहोली की बेटी और सांसद प्रियंका जारकीहोली, बेटे राहुल जारकीहोली, बहनोई वाई.डी. मंजुनाथ और कुछ सहयोगियों से संबंधित परिसरों पर जांच की गई। इन सभी के संबंध में आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं।
सतीश जारकीहोली ने इससे पहले किसी बड़े गलत काम से इनकार किया था। उन्होंने संकेत दिया था कि यदि कोई मामूली या तकनीकी गलती सामने आती है तो उसका जवाब दिया जाएगा। उन्होंने जांच के दौरान सहयोग करने की बात कही थी। शनिवार की सफाई में उनका मुख्य जोर इस बात पर रहा कि उन्होंने ईडी के अधिकार या जांच प्रक्रिया को चुनौती नहीं दी।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने ईडी की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया था। कांग्रेस के कई नेताओं ने भी केंद्रीय जांच एजेंसियों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर ईडी ने अपनी कार्रवाई को फेमा के संभावित उल्लंघनों से जुड़ी जांच बताया है। सरकार और कांग्रेस की प्रतिक्रियाएं राजनीतिक पक्ष हैं जबकि एजेंसी के आरोपों की अंतिम पुष्टि कानूनी प्रक्रिया में होनी बाकी है।
इस मामले ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष तलाशी और बरामद मुद्रा के आधार पर मंत्री से जवाब मांग सकता है जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रही है। जारकीहोली की ताजा सफाई का उद्देश्य उन खबरों का खंडन करना है जिनसे यह धारणा बनी कि उन्होंने केंद्रीय एजेंसी को सीधे चुनौती दी थी।
मंत्री ने मीडिया से जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग करने की अपील की है। उनका कहना है कि जांच से जुड़े संवेदनशील मामले में किसी बयान का अर्थ बदलने वाली हेडलाइन से भ्रम फैल सकता है। फिलहाल ईडी द्वारा जब्त दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की समीक्षा किए जाने की संभावना है। जांच पूरी होने और संबंधित पक्षों के जवाब सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।