मैसूर। कर्नाटक के टी नरसीपुर में गणेश चतुर्थी के जुलूस को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। लोगों ने पुलिस स्टेशन से करीब 200 मीटर की दूरी पर ‘हिंदू महा गणपति’ की प्रतिमा स्थापित की है। संगठन ने 18 सितंबर को लिंक रोड पर बड़ा गणेश जुलूस निकालने की घोषणा भी की है। आयोजकों का दावा है कि इसमें लगभग पांच हजार लोग शामिल होंगे। संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस ने जुलूस और उससे जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, टी नरसीपुर में गणेश जुलूस के मार्ग और आयोजन से संबंधित कथित पाबंदियों को लेकर विवाद शुरू हुआ था। स्थानीय हिंदू संगठनों और भाजपा नेताओं ने पुलिस के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने टी नरसीपुर पुलिस स्टेशन के निरीक्षक धनंजय के कथित बयान का विरोध करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इस विरोध के बीच हिंदू जागरण वेदिके ने पुलिस स्टेशन के पास भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की। संगठन के पदाधिकारियों ने इसे धार्मिक आयोजन और अपनी परंपरा से जुड़ा कार्यक्रम बताया है। प्रतिमा स्थापना के बाद से आसपास का क्षेत्र गणेशोत्सव की गतिविधियों का केंद्र बन गया है। हालांकि, स्थापना के लिए दी गई प्रशासनिक अनुमति और उसकी शर्तों से संबंधित विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
महेश ने बताया कि 18 सितंबर को लिंक रोड पर गणेश जुलूस निकाला जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इसमें मैसूर जिले के अतिरिक्त कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों से हिंदू समर्थक संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल होंगे। आयोजकों ने जुलूस में करीब पांच हजार लोगों के पहुंचने का अनुमान जताया है।
बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के दावे के कारण कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पुलिस के सामने प्रमुख चुनौती बन सकते हैं। जुलूस के मार्ग पर दुकानों, आवासीय इलाकों और सार्वजनिक स्थानों की स्थिति को देखते हुए पर्याप्त व्यवस्था की जरूरत होगी। स्थानीय प्रशासन को वाहनों की आवाजाही, आपात सेवाओं और आम नागरिकों की सुविधा का भी ध्यान रखना होगा।
पुलिस निरीक्षक धनंजय ने कहा है कि प्रस्तावित जुलूस पर नजर रखी जाएगी। इसके साथ ही आयोजन के दौरान शांति और व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पुलिस की ओर से जुलूस की अनुमति, निर्धारित मार्ग, समय और आयोजकों के लिए लागू शर्तों को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान उपलब्ध सामग्री में नहीं दिया गया है।
टी नरसीपुर में विवाद उस समय बढ़ा, जब गणेश जुलूस को लेकर पुलिस और आयोजकों के बीच मतभेद की खबरें सामने आईं। कुछ स्थानीय संगठनों ने निरीक्षक धनंजय पर धार्मिक आयोजन को लेकर अनुचित टिप्पणी करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, पुलिस की ओर से स्थिति को नियंत्रण में रखने और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई है। आरोपों और पुलिस के पक्ष की पूरी जानकारी सामने आए बिना किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।
मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। गणेश जुलूस पर कथित प्रतिबंधों को लेकर विपक्षी भाजपा ने पुलिस स्टेशन के घेराव की चेतावनी दी थी। इसके बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पुलिस को सतर्क रहने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। भाजपा की चेतावनी के बाद पुलिस बल को चौकस रहने के लिए कहा गया था।
स्थानीय स्तर पर सामने आए वीडियो और बयानों में आयोजकों ने दावा किया है कि लिंक रोड पर पहले भी गणेश जुलूस निकाला जाता रहा है। उनका कहना है कि इस बार भी परंपरागत मार्ग से आयोजन की अनुमति मिलनी चाहिए। पुलिस ने किस आधार पर मार्ग या आयोजन पर आपत्ति जताई, इससे संबंधित लिखित आदेश की प्रति सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मार्ग को प्रतिबंधित घोषित करने से पहले आधिकारिक आदेश की पुष्टि जरूरी है।
हिंदू जागरण वेदिके और दूसरे संगठनों ने 18 सितंबर के कार्यक्रम को शक्ति प्रदर्शन के बजाय धार्मिक जुलूस बताया है। हालांकि, विभिन्न क्षेत्रों से हजारों कार्यकर्ताओं को बुलाने की घोषणा के कारण प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क है। जुलूस में शामिल लोगों की वास्तविक संख्या आयोजन के दिन ही स्पष्ट होगी। पांच हजार का आंकड़ा आयोजकों का अनुमान है, आधिकारिक संख्या नहीं।
पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता जुलूस को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराना होगी। भीड़ वाले धार्मिक कार्यक्रमों में निर्धारित मार्ग का पालन, ध्वनि की सीमा, यातायात नियंत्रण और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता जरूरी होती है। आयोजकों से भी प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करने और किसी प्रकार की भड़काऊ टिप्पणी से बचने की अपेक्षा की जाएगी।
टी नरसीपुर में पहले शांति बैठक भी आयोजित की गई थी, जिसमें गणेशोत्सव के दौरान व्यवस्था बनाए रखने पर चर्चा हुई। इसके बावजूद विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ। निरीक्षक धनंजय को निलंबित करने की मांग से जुड़े प्रदर्शन और जुलूस की घोषणा ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। मैसूर जिला पुलिस अधीक्षक की ओर से भी इस विवाद पर स्थिति स्पष्ट किए जाने की खबर है।
प्रस्तावित जुलूस से पहले पुलिस आयोजकों के साथ बैठक कर सकती है। इसमें मार्ग, समय, ध्वनि व्यवस्था, स्वयंसेवकों की तैनाती और भीड़ को नियंत्रित करने के उपायों पर सहमति बनाने का प्रयास किया जा सकता है। फिलहाल आयोजन की अंतिम अनुमति और उससे जुड़ी शर्तों की पुष्टि होना बाकी है।
18 सितंबर को होने वाला कार्यक्रम अब प्रशासन और स्थानीय संगठनों दोनों के लिए महत्वपूर्ण बन गया है। एक ओर आयोजक धार्मिक परंपरा के अनुसार जुलूस निकालने पर जोर दे रहे हैं, वहीं पुलिस शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी का हवाला दे रही है। दोनों पक्षों के बीच संवाद और नियमों का पालन ही विवाद को बढ़ने से रोकने में अहम भूमिका निभाएगा।