कर्नाटक

10 महीने में 15 बार ठप हुई ‘नम्मा मेट्रो’, यात्रियों की बढ़ी परेशानी

Kavita2
26 Aug 2026 10:38 AM IST
10 महीने में 15 बार ठप हुई ‘नम्मा मेट्रो’, यात्रियों की बढ़ी परेशानी
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बेंगलुरु। सिलिकॉन सिटी बेंगलुरु की लाइफलाइन मानी जाने वाली ‘नम्मा मेट्रो’ की तकनीकी खराबियों ने यात्रियों की चिंता और नाराजगी बढ़ा दी है। सितंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच महज 10 महीनों में मेट्रो रेल सेवाओं में 15 तकनीकी खराबियां दर्ज की गईं। इनमें पर्पल, ग्रीन और येलो—तीनों प्रमुख रूट प्रभावित हुए। मेट्रो में बार-बार आ रही तकनीकी दिक्कतों को लेकर अब बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौडा ने विधान परिषद में इन घटनाओं से संबंधित आंकड़े जारी किए। उन्होंने बताया कि सितंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच पर्पल रूट पर पांच, ग्रीन रूट पर छह और येलो रूट पर चार तकनीकी खराबी की घटनाएं सामने आईं। यानी इस अवधि में औसतन हर महीने मेट्रो सेवा में एक से अधिक बार तकनीकी व्यवधान हुआ।

मंत्री के मुताबिक, इन खराबियों के पीछे मेट्रो ट्रैक, बिजली आपूर्ति व्यवस्था और ट्रेन कोच से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में मौजूद गंभीर कमियां प्रमुख कारण हैं। तकनीकी समस्याओं के कारण कई बार ट्रेनों की आवाजाही धीमी करनी पड़ी, कुछ सेवाएं रोकनी पड़ीं और यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ा।

मेट्रो में तकनीकी खराबी का सीधा असर रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों पर पड़ता है। बेंगलुरु में बड़ी संख्या में लोग कार्यालय, कॉलेज, बाजार और अन्य जरूरी कामों के लिए मेट्रो पर निर्भर हैं। ऐसे में किसी व्यस्त समय में सेवा बाधित होने पर स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ बढ़ जाती है और सड़कों पर भी यातायात का दबाव बढ़ जाता है।

इन घटनाओं में कुछ तकनीकी खराबियां अपेक्षाकृत ज्यादा गंभीर रहीं। 23 जून को पर्पल लाइन पर थर्ड रेल सिस्टम में खराबी के कारण शाम के व्यस्त समय में मेट्रो सेवा पांच घंटे से अधिक समय तक प्रभावित रही। पीक आवर में इतनी लंबी अवधि तक सेवा बाधित रहने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ बढ़ी और बड़ी संख्या में लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए बस, कैब और ऑटो जैसे दूसरे साधनों का इस्तेमाल करना पड़ा।

पर्पल लाइन बेंगलुरु के महत्वपूर्ण मेट्रो कॉरिडोर में शामिल है और शहर के कई प्रमुख इलाकों को जोड़ती है। इसलिए इस रूट पर तकनीकी समस्या का असर केवल कुछ स्टेशनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बड़ी संख्या में यात्रियों की दैनिक आवाजाही प्रभावित होती है। शाम के समय कार्यालयों से लौटने वाले यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण व्यवधान का प्रभाव और गंभीर हो जाता है।

ग्रीन लाइन पर सबसे ज्यादा छह तकनीकी खराबियां दर्ज की गईं। इसके बाद पर्पल लाइन पर पांच और येलो लाइन पर चार घटनाएं हुईं। आंकड़ों के सामने आने के बाद मेट्रो नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों में तकनीकी रखरखाव की स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यात्रियों का कहना है कि मेट्रो सेवा समय की बचत और सुविधाजनक यात्रा के लिए इस्तेमाल की जाती है, लेकिन बार-बार होने वाली तकनीकी खराबियां इस भरोसे को प्रभावित कर रही हैं।

तकनीकी खराबियों के कारणों में ट्रैक और बिजली आपूर्ति व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई है। मेट्रो ट्रेन संचालन में बिजली की निरंतर और स्थिर आपूर्ति बेहद जरूरी होती है। बिजली आपूर्ति में खराबी आने पर ट्रेनें रुक सकती हैं या उनकी गति सीमित करनी पड़ सकती है। इसी तरह ट्रैक से संबंधित किसी समस्या की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए सेवा रोकना या धीमी करना आवश्यक हो जाता है।

थर्ड रेल सिस्टम में खराबी का मामला भी इसी वजह से महत्वपूर्ण है। मेट्रो ट्रेन को बिजली उपलब्ध कराने वाली इस व्यवस्था में समस्या आने पर प्रभावित हिस्से में ट्रेनों का संचालन सीधे तौर पर बाधित हो सकता है। 23 जून की घटना ने दिखाया कि ऐसी तकनीकी खराबी लंबे समय तक बनी रहने पर पूरे कॉरिडोर के परिचालन पर कितना व्यापक असर पड़ सकता है।

ट्रेन कोच के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याएं भी मेट्रो संचालन में बाधा डाल सकती हैं। कोच में तकनीकी खराबी आने पर संबंधित ट्रेन को सेवा से हटाना पड़ सकता है। यदि पीक आवर में ऐसा होता है तो उपलब्ध ट्रेनों की संख्या कम होने के कारण यात्रियों की भीड़ बढ़ सकती है और सेवा का अंतराल लंबा हो सकता है।

बार-बार तकनीकी समस्याओं के बीच अब रखरखाव और नियमित निरीक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के साथ ट्रेनों की संख्या और यात्रियों की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में मौजूदा बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। इसके बावजूद यात्रियों को भरोसेमंद और समयबद्ध सेवा उपलब्ध कराना मेट्रो प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बड़े शहरी मेट्रो नेटवर्क के लिए केवल नए कॉरिडोर का निर्माण पर्याप्त नहीं होता। ट्रैक, सिग्नलिंग, बिजली आपूर्ति, कोच और अन्य तकनीकी प्रणालियों का नियमित रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। छोटी तकनीकी समस्या को समय रहते पहचानकर दूर करने से बड़े व्यवधान को रोका जा सकता है।

यात्रियों के लिए समस्या तब और बढ़ जाती है जब सेवा बाधित होने की जानकारी समय पर नहीं मिलती। अचानक ट्रेन रुकने या स्टेशन पर सेवा बंद होने की स्थिति में यात्रियों को वैकल्पिक साधन तलाशने पड़ते हैं। ऐसे में मेट्रो प्रबंधन द्वारा वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

विधान परिषद में सामने आए आंकड़ों ने मेट्रो सेवा की विश्वसनीयता को लेकर एक गंभीर तस्वीर पेश की है। सितंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच 15 तकनीकी खराबियां केवल एक आंकड़ा नहीं हैं, बल्कि यह बताता है कि नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों में तकनीकी चुनौतियां बनी हुई हैं।

बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते शहर में सार्वजनिक परिवहन की भूमिका लगातार बढ़ रही है। सड़क यातायात और प्रदूषण कम करने के लिए बड़ी संख्या में लोग मेट्रो को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में मेट्रो की सेवाओं में बार-बार आने वाली रुकावटों का समाधान करना जरूरी है। इसके लिए ट्रैक, बिजली आपूर्ति, कोच और अन्य तकनीकी प्रणालियों की व्यापक समीक्षा तथा प्रभावी रखरखाव व्यवस्था की जरूरत होगी।

फिलहाल 15 तकनीकी खराबियों के आंकड़े सामने आने के बाद यात्रियों की नजर अब इस बात पर है कि मेट्रो प्रबंधन और सरकार इन समस्याओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाते हैं। खास तौर पर 23 जून जैसी लंबी अवधि की सेवा बाधित होने वाली घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना बड़ी चुनौती होगी। ‘नम्मा मेट्रो’ को बेंगलुरु की लाइफलाइन बनाए रखने के लिए सुरक्षित, भरोसेमंद और निर्बाध संचालन सुनिश्चित करना अब पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।

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