Karnataka कर्नाटक : 'आज हम तकनीक की दुनिया में जी रहे हैं। इंटरनेट जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है और सोशल मीडिया, वेबसाइट और विभिन्न ऐप्स सूचना के प्रमुख स्रोत हैं। इससे धोखाधड़ी को बढ़ावा मिला है,' उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और बेंगलुरु दक्षिण ज़िले के प्रशासनिक न्यायाधीश, ई.एस. इंद्रेश ने कहा।

वे शनिवार को शहर के सरकारी प्रथम श्रेणी महाविद्यालय में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चन्नपटना तालुक विधिक सेवा समिति, बार एसोसिएशन और महाविद्यालय के सहयोग से आयोजित 'सामाजिक जीवन पर साइबर अपराधों का प्रभाव और सावधानियां' विषय पर एक कानूनी कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए बोल रहे थे।

उन्होंने कहा, "जिन छात्रों को अच्छी तरह से पढ़ाई करनी चाहिए और अपना भविष्य बनाना चाहिए, वे आज इंटरनेट के कारण किताबें पढ़ने में रुचि खो रहे हैं। वे अपनी ज़रूरत की जानकारी के लिए किताबों की बजाय इंटरनेट पर निर्भर हो रहे हैं। तथ्यों की जाँच किए बिना हर बात को सच मान लेने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इसलिए, हमें इंटरनेट के इस्तेमाल पर एक सीमा तय करने की ज़रूरत है।"

अपने प्रारंभिक भाषण में, ज़िला प्रधान एवं सत्र न्यायाधीश तथा ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष, बी.वी. रेणुका ने कहा, "देश में डिजिटल क्रांति के बाद, मोबाइल फ़ोन के ज़रिए पूरी दुनिया हमारी मुट्ठी में है। इसके जितने फ़ायदे हैं, उतने ही ख़तरे भी हैं। इसलिए, मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए।"

"देश में युवाओं की संख्या ज़्यादा है और उनमें से ज़्यादातर के पास स्मार्टफ़ोन हैं। धोखेबाज़ छात्रों को निशाना बना रहे हैं और उन्हें आसानी से पैसे कमाने का लालच देकर ठग रहे हैं। इससे पैसे के साथ-साथ मानसिक शांति भी छिन रही है। ब्लैकमेल और धोखाधड़ी के कारण आत्महत्या की घटनाएँ बढ़ रही हैं," उन्होंने चिंता व्यक्त की।

ज़िले के पुलिस अधीक्षक आर. श्रीनिवास गौड़ा ने कहा, "जब लोगों को अजनबियों से धमकी भरे फ़ोन आते हैं, तो उन्हें बिना घबराए अपनी बात कहनी चाहिए। उन्हें दी जा रही जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। उन्हें ज़बरदस्ती या दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए। उन्हें तुरंत अपने परिवार या प्रियजनों को इसकी जानकारी देनी चाहिए।"

उन्होंने कहा, "किसी भी आपराधिक मामले की जांच या सुनवाई करने वाला कोई भी अधिकारी पैसे ट्रांसफर या जमा करने के लिए नहीं कहेगा। बैंक मोबाइल फोन के जरिए केवाईसी या व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त नहीं करेंगे। धोखाधड़ी के मामले में, साइबर अपराध प्रभाग हेल्पलाइन (1930) और स्थानीय पुलिस को सूचित किया जाना चाहिए।"

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