गदग। कर्नाटक के गदग जिले में सूखे से जूझ रहे किसानों ने राहत और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने की मांग तेज कर दी है। किसानों का कहना है कि जिले के सभी तालुक अब सूखाग्रस्त घोषित हो चुके हैं, लेकिन राहत राशि मिलने में देरी के कारण छोटे और सीमांत किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। हालात ऐसे हैं कि कई किसान परिवार गुजर-बसर के लिए रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करने लगे हैं।

किसानों के मुताबिक पिछले करीब एक साल से फसल नुकसान ने उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर कर दी है। लगातार नुकसान के कारण खेती से होने वाली आय कम हुई है और कई परिवारों के सामने रोजमर्रा का खर्च चलाने की चुनौती खड़ी हो गई है। ऐसे में जिन किसानों के पास बहुत कम जमीन है, वे खेत छोड़कर अस्थायी काम की तलाश में शहरों का रुख कर रहे हैं।

स्थानीय किसानों ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि केंद्रीय टीम ने पड़ोसी विजयनगर जिले का दौरा कर सूखे से हुए नुकसान का आकलन किया, जबकि गदग में भी लंबे समय से गंभीर स्थिति बनी हुई है। किसानों का कहना है कि अब जब पूरे गदग जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया है, तो मुआवजा, राहत और अन्य सहायता के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया को बिना देरी पूरा किया जाना चाहिए।

गदग में सूखा राहत को लेकर पिछले दिनों राजनीतिक और सामाजिक विरोध भी देखने को मिला था। भाजपा के सदस्यों, युवा मतदाताओं और नागरिक संगठनों से जुड़े लोगों ने जिले को सूखा राहत सूची से कथित तौर पर बाहर रखे जाने का विरोध किया था। इस मुद्दे पर किसानों ने मुलगुंड में भी प्रदर्शन आयोजित किया था, जिसमें गदग के विधायक एच.के. पाटिल शामिल हुए थे।

पाटिल ने उस समय सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि 10 अक्टूबर तक गदग तालुक को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया, तो वह अपने विधायक पद से इस्तीफा देने पर विचार करेंगे। उन्होंने सरकार पर दबाव बनाते हुए कहा था कि इलाके में बारिश की कमी और फसल नुकसान के बावजूद सूखा घोषणा में देरी किसानों के लिए परेशानी बढ़ा रही है।

विरोध और राजनीतिक दबाव के बाद राज्य सरकार ने गदग, रोन और मुंडरगी तालुकों में फील्ड निरीक्षण कराया। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर इन तीनों तालुकों को भी सूखाग्रस्त सूची में शामिल कर लिया गया। इसके साथ ही अब गदग जिले के सभी तालुक सूखा प्रभावित श्रेणी में आ गए हैं।

इस फैसले से किसानों को राहत की उम्मीद तो जगी है, लेकिन अब उनका जोर वास्तविक आर्थिक मदद जल्द मिलने पर है। रोन के किसान सोमप्पा नरगुंड ने कहा कि सभी तालुकों को सूखा प्रभावित सूची में शामिल करना अच्छा कदम है, लेकिन केवल घोषणा से किसानों की मौजूदा आर्थिक समस्या दूर नहीं होगी। उन्होंने सरकार से मुआवजा राशि का वितरण तेजी से शुरू करने की मांग की।

किसानों का कहना है कि फसल बर्बाद होने के बाद उनके पास दोहरी समस्या खड़ी हो गई है। एक तरफ खेती में लगाया गया पैसा डूब गया, दूसरी तरफ अगली फसल के लिए बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री खरीदने के लिए रकम नहीं बची। कई परिवारों पर कर्ज का दबाव भी बढ़ा है। ऐसे में समय पर राहत राशि नहीं मिलने पर ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन और तेज हो सकता है।

गदग जिले की अर्थव्यवस्था में कृषि का बड़ा योगदान है और बड़ी संख्या में परिवार खेती तथा उससे जुड़े कामों पर निर्भर हैं। इसलिए सूखे का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कृषि मजदूरों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण बाजारों पर भी पड़ता है। खेतों में काम कम होने से मजदूरों को भी रोजगार के अवसर नहीं मिलते और उन्हें अन्य शहरों में काम तलाशना पड़ता है।

कर्नाटक सरकार ने गंभीर सूखे की स्थिति को देखते हुए केंद्र से 7,142 करोड़ रुपये की राहत सहायता मांगी है। राज्य के कई जिलों में कृषि, पेयजल और ग्रामीण आजीविका पर सूखे का असर दर्ज किया गया है। राज्य सरकार की ओर से नुकसान का आकलन कर केंद्र के सामने सहायता की मांग रखी गई है।

गदग के किसानों की मांग है कि जिला स्तर पर मुआवजा प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए। इसके साथ ही रोजगार के वैकल्पिक अवसर उपलब्ध कराए जाएं ताकि छोटे किसान और कृषि मजदूर अपने गांवों को छोड़ने के लिए मजबूर न हों। मनरेगा जैसे ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों के तहत काम बढ़ाने की मांग भी ऐसे हालात में महत्वपूर्ण हो सकती है।

एच.के. पाटिल ने गदग, रोन और मुंडरगी तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने का स्वागत करते हुए सरकार से अब मुआवजा वितरण में तेजी लाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि घोषणा में पहले ही देरी हो चुकी है और किसानों को अब आर्थिक सहायता के लिए लंबा इंतजार नहीं कराना चाहिए।

किसानों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि राहत राशि कब तक उनके खातों में पहुंचेगी। राहत मिलने से उन्हें कर्ज चुकाने, घरेलू खर्च पूरा करने और अगली खेती के लिए जरूरी संसाधन जुटाने में कुछ मदद मिल सकती है। वहीं देरी होने पर ग्रामीण परिवारों पर आर्थिक दबाव और बढ़ने की आशंका है।

गदग में मौजूदा स्थिति यह दिखाती है कि सूखा केवल फसल नुकसान का मामला नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार और पलायन से भी सीधे जुड़ा हुआ है। सभी तालुकों के सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद अब किसानों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है। उनका स्पष्ट कहना है कि राहत की घोषणा के साथ-साथ मुआवजा और रोजगार सहायता भी तत्काल जमीन पर दिखाई देनी चाहिए।

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