बेंगलुरु। कर्नाटक में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। मंगलवार शाम मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अपने होम ऑफिस ‘कृष्णा’ से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अहम बैठक की। बैठक में SIR के दौरान कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची से नाम हटाने की शिकायतों पर चर्चा की गई। पार्टी ने इस मुद्दे पर लगातार अभियान चलाने और जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी के संकेत दिए हैं।

बैठक में AICC महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इसके अलावा मंत्री के.एच. मुनियप्पा, शिवलिंगेगौड़ा, जमीर अहमद खान, एस.एस. मल्लिकार्जुन, एच.सी. बालकृष्ण, पुत्तरंगाशेट्टी, टी. रघुमूर्ति और के.एस. बसवनाथप्पा ने भी हिस्सा लिया। KPCC कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष विनय कुमार सोराके, लोकसभा और राज्यसभा सदस्य, विधायक तथा पिछले चुनाव में पराजित कांग्रेस उम्मीदवार भी बैठक से जुड़े।

बैठक का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से न हटे। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से SIR प्रक्रिया पर नजर रखने और बूथ स्तर पर मतदाताओं की मदद करने को कहा। कांग्रेस का कहना है कि हर पात्र नागरिक को मतदाता सूची में बने रहने का निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए।

कर्नाटक कांग्रेस ने खास तौर पर Form-7 के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए हैं। Form-7 का उपयोग किसी मतदाता के नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज करने या मौजूदा मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आवेदन करने में किया जाता है। कांग्रेस का आरोप है कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में एक साथ Form-7 आवेदन दाखिल किए गए और इनके जरिए चुनिंदा मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई। भाजपा इन आरोपों को खारिज कर चुकी है।

इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पहले भी राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय पहुंच चुके हैं। 1 अक्टूबर को उन्होंने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ चुनाव अधिकारियों के सामने शिकायत रखी थी और कथित तौर पर बड़े पैमाने पर दाखिल किए गए Form-7 आवेदनों की जांच तथा आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की थी। बाद में मुख्यमंत्री और कई मंत्री निर्वाचन कार्यालय के बाहर बैठ गए थे।

भाजपा ने इस घटनाक्रम पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। भाजपा का आरोप था कि निर्वाचन कार्यालय के बाहर आयोजित प्रदर्शन ने सार्वजनिक विरोध से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया। दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा था कि कांग्रेस नेता वहां प्रदर्शन करने नहीं, बल्कि चुनाव अधिकारियों को ज्ञापन देने गए थे।

कांग्रेस के भीतर अब इस मुद्दे को बूथ स्तर तक ले जाने की रणनीति बनती दिखाई दे रही है। पार्टी नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में मतदाता सूची की जांच करने, मतदाताओं की शिकायतों को दर्ज कराने और दावे-आपत्ति की प्रक्रिया में लोगों की मदद करने के लिए सक्रिय रहने को कहा गया है। पार्टी चाहती है कि SIR के दौरान यदि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से प्रभावित होता है तो समय रहते उसके दस्तावेज और आपत्ति संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जा सके।

इस विवाद को हवा तब और मिली जब जयनगर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की पूर्व विधायक सौम्या रेड्डी ने पुलिस शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र में 4,372 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और 5,698 Form-7 आवेदन नाम हटाने के लिए दाखिल किए गए। इसी तरह पुलकेशीनगर के विधायक ए.सी. श्रीनिवास और कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य मंसूर अली खान ने भी अलग-अलग क्षेत्रों में मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए हैं। ये फिलहाल कांग्रेस नेताओं के आरोप हैं और इन पर निर्वाचन अधिकारियों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बैठक में कहा कि सरकार और पार्टी दोनों SIR प्रक्रिया के दौरान सतर्क रहेंगे। उनका कहना है कि मतदान का अधिकार प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है और किसी पात्र व्यक्ति को मतदाता सूची से बाहर नहीं होना चाहिए। इसी उद्देश्य से कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की रणनीति तैयार की जा रही है।

SIR को लेकर चल रहे विवाद ने कर्नाटक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा दिया है। कांग्रेस कथित मतदाता नाम कटौती को गंभीर लोकतांत्रिक मुद्दा बता रही है, जबकि भाजपा कांग्रेस पर निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगा रही है। दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।

कांग्रेस की मंगलवार की बैठक को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी केवल राज्य स्तर के नेताओं तक मामला सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि सांसदों, विधायकों, पूर्व उम्मीदवारों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं तक इसकी निगरानी व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रही है।

आने वाले दिनों में SIR प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियों के निपटारे का काम आगे बढ़ेगा। ऐसे में कांग्रेस का जोर इस बात पर रहेगा कि उसके नेता मतदाताओं के संपर्क में रहें और निर्वाचन सूची से जुड़ी किसी भी शिकायत को तुरंत संबंधित अधिकारियों के सामने उठाएं।

फिलहाल कर्नाटक में SIR का मुद्दा प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर बड़ा राजनीतिक विषय बन चुका है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की बैठक के बाद साफ है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर लंबा अभियान चलाने की तैयारी में है। अब नजर चुनाव अधिकारियों की कार्रवाई और मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों के निपटारे पर रहेगी।

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