बेंगलुरु। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार से नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइजेज (NICE) के बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (BMIC) प्रोजेक्ट को तत्काल अपने नियंत्रण में लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस कॉरिडोर पर टोल वसूली बंद करानी चाहिए। कुमारस्वामी ने वाहन चालकों से भी अपील की कि वे इस सड़क पर टोल का भुगतान न करें।

कुमारस्वामी का यह बयान NICE परियोजना और उससे जुड़े भूमि तथा टोल विवाद के बीच आया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को केवल सड़क परियोजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके साथ जुड़े प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को भी ध्यान में रखना होगा।

विधानसभा में उठेगा मामला

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि NICE प्रोजेक्ट और प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप परियोजना एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों मुद्दों को कर्नाटक विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में उठाया जाएगा।

उनके मुताबिक, सरकार को परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं की गंभीरता से समीक्षा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जनता के हितों की अनदेखी न हो। कुमारस्वामी ने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद का समाधान निकालने के लिए सरकार को स्पष्ट और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि सड़क परियोजना से जुड़े अधिकारों, टोल वसूली और भूमि से संबंधित मुद्दों की जांच के बाद राज्य सरकार को अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।

हाई कोर्ट की टिप्पणियों का दिया हवाला

कुमारस्वामी ने NICE परियोजना को लेकर हाई कोर्ट की टिप्पणियों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को अदालत द्वारा की गई गंभीर टिप्पणियों पर ध्यान देना चाहिए।

कुमारस्वामी के अनुसार, अदालत ने परियोजना के कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं और टोल वसूली की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इन टिप्पणियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने NICE से भी तत्काल टोल वसूली बंद करने की मांग की। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब परियोजना से संबंधित कानूनी और प्रशासनिक सवाल मौजूद हैं, तब टोल वसूली जारी रखना उचित नहीं है।

वाहन चालकों से टोल न देने की अपील

कुमारस्वामी ने वाहन चालकों से इस सड़क पर टोल का भुगतान नहीं करने की अपील करके मामले को और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है। उनका कहना है कि टोल वसूली को लेकर स्थिति स्पष्ट होने तक लोगों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

हालांकि, टोल भुगतान को लेकर उनकी अपील का व्यावहारिक और कानूनी असर भी चर्चा का विषय बन सकता है। किसी निजी या रियायत प्राप्त सड़क परियोजना पर टोल व्यवस्था से जुड़े नियम और अदालत के आदेशों का पालन संबंधित पक्षों के लिए महत्वपूर्ण होता है।

ऐसे में कुमारस्वामी की मांग के बाद राज्य सरकार और NICE के बीच विवाद एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ सकता है।

NICE प्रोजेक्ट पर लंबे समय से विवाद

बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर परियोजना का उद्देश्य बेंगलुरु और मैसूर के बीच बेहतर सड़क संपर्क विकसित करना और शहर के भीतर यातायात दबाव को कम करना था। परियोजना में सड़क, टोल और भूमि से जुड़े कई पहलू शामिल रहे हैं।

समय के साथ इस परियोजना को लेकर भूमि अधिग्रहण, टोल वसूली और परियोजना की शर्तों से संबंधित विवाद सामने आते रहे हैं। राजनीतिक दल और विभिन्न समूह समय-समय पर NICE की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं।

कुमारस्वामी भी इस परियोजना को लेकर पहले कई बार सवाल उठा चुके हैं। अब उन्होंने राज्य सरकार से परियोजना को अपने हाथ में लेने की मांग कर इस विवाद को फिर से राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की है।

बिदादी टाउनशिप का भी मुद्दा

कुमारस्वामी ने बिदादी टाउनशिप परियोजना को NICE कॉरिडोर से जोड़ते हुए कहा कि दोनों मामलों को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। बिदादी बेंगलुरु और मैसूर के बीच तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र है और लंबे समय से इसे शहरी विस्तार की संभावनाओं वाले इलाके के रूप में देखा जाता रहा है।

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, बिदादी टाउनशिप और NICE परियोजना के बीच भूमि तथा बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दे हैं, इसलिए विधानसभा में दोनों विषयों पर एक साथ चर्चा की जाएगी।

उनका कहना है कि सरकार को इन परियोजनाओं से जुड़े पुराने रिकॉर्ड, समझौतों और वर्तमान स्थिति की व्यापक समीक्षा करनी चाहिए।

सरकार से स्पष्ट कार्रवाई की मांग

कुमारस्वामी ने राज्य सरकार से केवल बयान जारी करने के बजाय कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को NICE परियोजना को अपने नियंत्रण में लेने की दिशा में कदम उठाना चाहिए और टोल व्यवस्था को खत्म करने पर निर्णय लेना चाहिए।

उनका तर्क है कि यदि परियोजना को लेकर अदालत की ओर से गंभीर सवाल उठाए गए हैं तो सरकार को उन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक हित और यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

टोल विवाद फिर गरमाने के आसार

कुमारस्वामी के ताजा बयान के बाद NICE कॉरिडोर पर टोल वसूली का मुद्दा एक बार फिर गरमाने की संभावना है। यदि राज्य सरकार उनकी मांग पर विचार करती है तो इससे परियोजना के संचालन, वित्तीय व्यवस्था और रियायत समझौते पर भी असर पड़ सकता है।

दूसरी ओर, टोल वसूली बंद करने से पहले सरकार को कानूनी और वित्तीय पहलुओं की समीक्षा करनी पड़ सकती है। परियोजना से जुड़े अनुबंधों और अदालत के आदेशों का भी अध्ययन आवश्यक होगा।

आगामी विधानसभा मानसून सत्र में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं। कुमारस्वामी ने साफ कर दिया है कि वह NICE प्रोजेक्ट और बिदादी टाउनशिप से जुड़े सवालों को सदन में उठाएंगे।

अब नजर इस बात पर होगी कि कर्नाटक सरकार केंद्रीय मंत्री की मांग पर क्या रुख अपनाती है और NICE परियोजना के टोल, भूमि तथा प्रशासनिक विवादों को लेकर क्या कदम उठाती है।

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