बेंगलुरु। कर्नाटक में औद्योगिक विकास और रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में बुधवार को हुई स्टेट हाई लेवल क्लीयरेंस कमेटी (SHLCC) की बैठक में राज्य के औद्योगिक क्षेत्र में 29,679 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दी गई। बैठक में नौ नए प्रोजेक्ट और आठ अन्य प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई है। इन परियोजनाओं के शुरू होने से राज्य में करीब 66,360 नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है।
राज्य सरकार की इस मंजूरी को कर्नाटक के औद्योगिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नए निवेश में रिन्यूएबल एनर्जी, एयरोस्ट्रक्चर, कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, ऑटोमोबाइल, शुगर और बायोएनर्जी जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। बड़े पैमाने पर होने वाले इस निवेश से औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।
मंजूर किए गए प्रमुख निवेश प्रस्तावों में वाइब्रेंसी रिन्यूएबल एनर्जीज का प्रोजेक्ट शामिल है। कंपनी की ओर से 2,194.94 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इस परियोजना से करीब 30 हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। रोजगार के लिहाज से यह मंजूर किए गए प्रमुख प्रस्तावों में सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है।
एयरोस्पेस सेक्टर से जुड़ी महिंद्रा एयरोस्ट्रक्चर्स ने भी राज्य में बड़े निवेश की योजना बनाई है। कंपनी करीब 2,300 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस परियोजना से करीब 3,000 लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। एयरोस्पेस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कर्नाटक पहले से ही देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है और नए निवेश से इस क्षेत्र को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
एक्वस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की ओर से भी 1,104 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी मिली है। कंपनी के प्रस्ताव से करीब 4,813 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना राज्य में कंज्यूमर प्रोडक्ट्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी गतिविधियों के विस्तार में अहम भूमिका निभा सकती है।
बैठक में सबसे बड़े निवेश प्रस्तावों में हीरो फ्यूचर एनर्जीज का नाम शामिल है। कंपनी कर्नाटक में करीब 9,760 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस निवेश से करीब 3,200 नौकरियां पैदा होने का अनुमान है। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में इतनी बड़ी राशि का निवेश राज्य में स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा एप्सिलॉन की ओर से 1,500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। ऑटोमोबाइल सेक्टर की प्रमुख कंपनी टोयोटा किर्लोस्कर भी 1,200 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इन निवेश प्रस्तावों से राज्य में औद्योगिक उत्पादन और संबंधित क्षेत्रों की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
कृषि आधारित उद्योगों में भी बड़े निवेश को मंजूरी मिली है। निरानी शुगर्स की ओर से 4,062 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। वहीं ट्रूऑल्ट बायोएनर्जी करीब 2,988 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इन परियोजनाओं के जरिए शुगर और बायोएनर्जी सेक्टर में उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है।
लाइटहाउस अल्टरनेटिव एसेट्स भी राज्य में 600 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। अलग-अलग क्षेत्रों में प्रस्तावित इन परियोजनाओं को जोड़कर देखें तो कर्नाटक सरकार ने एक ही बैठक में हजारों करोड़ रुपये के निवेश का रास्ता साफ किया है।
SHLCC की बैठक में कुल नौ नए प्रोजेक्ट और आठ प्रस्तावों को मंजूरी मिलने से आने वाले समय में राज्य के औद्योगिक ढांचे के विस्तार की उम्मीद बढ़ गई है। इन परियोजनाओं में बड़े उद्योगों के साथ ऐसे क्षेत्र भी शामिल हैं जिनमें स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में रोजगार पैदा करने की क्षमता है।
सबसे अहम पहलू रोजगार का है। सभी मंजूर प्रस्तावों से कुल 66,360 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद जताई गई है। इनमें वाइब्रेंसी रिन्यूएबल एनर्जीज अकेले करीब 30 हजार रोजगार देने की योजना के साथ सबसे आगे है। इसके अलावा एक्वस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, महिंद्रा एयरोस्ट्रक्चर्स और हीरो फ्यूचर एनर्जीज की परियोजनाओं से भी हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर बनने का अनुमान है।
कर्नाटक लंबे समय से आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए जाना जाता है, लेकिन नए निवेश प्रस्तावों में मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, बायोएनर्जी और कृषि आधारित उद्योगों की हिस्सेदारी राज्य के औद्योगिक आधार को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता वाली हाई लेवल कमेटी की मंजूरी के बाद अब इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं निर्धारित योजना के मुताबिक जमीन पर उतरती हैं तो 29,679 करोड़ रुपये का निवेश राज्य की अर्थव्यवस्था के साथ रोजगार के मोर्चे पर भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है।