बसवराज रायरेड्डी बोले दो दिन की पब्लिसिटी ने मुझे दुनिया भर में मशहूर कर दिया
कोप्पल। कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री बसवराज रायरेड्डी ने अपने एक बयान को लेकर मिली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चर्चा पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलचस्प अंदाज में कहा कि पहले बहुत से लोग यह तक नहीं जानते थे कि बसवराज रायरेड्डी कौन हैं, लेकिन अब उन्हें सऊदी अरब और ईरान तक में पब्लिसिटी मिल गई है। उन्होंने कहा कि दो दिनों तक उन्हें इतनी चर्चा मिली कि उनका नाम दुनिया भर में पहुंच गया। इसके लिए उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में सभी का धन्यवाद भी किया।
कोप्पल जिले के कल्लर गांव में एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए बसवराज रायरेड्डी ने हाल के दिनों में अपने बयान को लेकर हुई चर्चा का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मुझे दो दिनों तक पब्लिसिटी देने और दुनिया भर में मशहूर बनाने के लिए धन्यवाद।” उन्होंने दावा किया कि उनके बयान की चर्चा केवल कर्नाटक या देश तक सीमित नहीं रही बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची।
रायरेड्डी ने कहा कि उन्हें सऊदी अरब और ईरान में भी प्रचार मिला। उन्होंने अपने बयान पर मिली प्रतिक्रियाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार के सांसद दानिश अली ने भी उन्हें फोन किया था। इसके अलावा मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी उनसे इस बारे में पूछा। रायरेड्डी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान अल जज़ीरा ने भी इस विषय को दिखाया।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले दो दिनों में उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो कवरेज मिली, उसके लिए वह आभारी हैं। उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि इससे पहले बहुत से लोगों को उनके बारे में जानकारी नहीं थी, लेकिन अब उनका नाम व्यापक स्तर पर चर्चा में आ गया है।
इस दौरान रायरेड्डी ने मंदिर जाने और धार्मिक आस्था को लेकर अपने विचार भी स्पष्ट किए। उन्होंने कहा कि वह आमतौर पर मंदिरों में इसलिए नहीं जाते क्योंकि वहां अपने लिए या अपने निजी हितों को पूरा करने के लिए कुछ मांगने में उनका विश्वास नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी धार्मिक आस्था व्यक्तिगत लाभ या राजनीतिक पद हासिल करने से जुड़ी हुई नहीं है।
बसवराज रायरेड्डी ने कहा कि वह मंत्री बनने की इच्छा लेकर मंदिरों में नहीं जाते और न ही किसी पद या व्यक्तिगत लाभ के लिए संतों के पैर छूते हैं। उनके मुताबिक आस्था को व्यक्तिगत इच्छाओं और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से अलग रखना चाहिए।
उन्होंने बताया कि इस बार वह बारिश के लिए प्रार्थना करने मंदिर गए थे। उनका कहना था कि यह प्रार्थना निजी लाभ के लिए नहीं बल्कि लोगों और क्षेत्र के हित से जुड़ी हुई थी। बारिश का सीधा संबंध किसानों, खेती और आम लोगों के जीवन से है, इसलिए उन्होंने मंदिर जाकर बारिश के लिए प्रार्थना की।
रायरेड्डी ने अपनी धार्मिक सोच बताते हुए कहा कि भगवान मन में बसते हैं। उनके मुताबिक ईश्वर के प्रति विश्वास केवल धार्मिक स्थलों पर जाने से तय नहीं होता। उन्होंने कहा कि मंदिर नहीं जाने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति की ईश्वर में आस्था नहीं है।
मंत्री के इस बयान के बाद एक बार फिर उनकी धार्मिक आस्था और मंदिर जाने को लेकर चर्चा शुरू हो सकती है। हालांकि रायरेड्डी ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि उनका मंदिरों में कम जाना धर्म या भगवान के प्रति अविश्वास से जुड़ा मामला नहीं है। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत सोच बताते हुए कहा कि वह अपने लिए कुछ मांगने के उद्देश्य से धार्मिक स्थलों पर नहीं जाते।
कल्लर गांव में दिए गए संबोधन में रायरेड्डी का जोर अपने हालिया बयान को लेकर मिली प्रसिद्धि पर भी रहा। उन्होंने इसे हल्के और व्यंग्यात्मक अंदाज में लेते हुए कहा कि विवाद के कारण उन्हें दो दिनों तक लगातार पब्लिसिटी मिली। उनके मुताबिक इस चर्चा ने उन्हें राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिला दी।
उन्होंने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री ने भी उनसे मामले के बारे में पूछा था। इसके अलावा सांसद दानिश अली का फोन आने और अल जज़ीरा में विषय दिखाए जाने का उल्लेख करते हुए रायरेड्डी ने यह बताने की कोशिश की कि उनके बयान ने कितने व्यापक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया।
राजनीतिक नेताओं के धार्मिक स्थलों पर जाने और सार्वजनिक रूप से आस्था व्यक्त करने को लेकर अक्सर राजनीतिक बहस होती रहती है। ऐसे में रायरेड्डी का यह कहना कि वह मंत्री बनने या निजी हित के लिए मंदिर नहीं जाते, चर्चा का विषय बन गया है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सामूहिक हित से जुड़े मुद्दे पर प्रार्थना करने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
बारिश के लिए मंदिर जाकर प्रार्थना करने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य व्यक्तिगत फायदा हासिल करना नहीं था। बारिश किसानों और आम जनता की जरूरत है, इसलिए उन्होंने इसके लिए प्रार्थना की। उन्होंने अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि उनके लिए भगवान मन में हैं और आस्था को निजी स्वार्थ से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
बसवराज रायरेड्डी के इस बयान में जहां अपने ऊपर हुई चर्चा को लेकर व्यंग्य दिखाई दिया, वहीं उन्होंने अपनी धार्मिक मान्यताओं पर भी खुलकर बात की। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली कवरेज का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे अपने लिए अप्रत्याशित प्रसिद्धि बताया। अब उनका नया बयान भी कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।