अगुम्बे रेनफॉरेस्ट रिसर्च सेंटर के खिलाफ फिर जांच शुरू

Update: 2026-07-27 05:40 GMT

कर्नाटक : शिवमोग्गा जिले में स्थित अगुम्बे रेनफॉरेस्ट रिसर्च सेंटर (ARRS) के खिलाफ वन विभाग ने दोबारा जांच शुरू करने का फैसला किया है। यह कार्रवाई संस्था और इससे जुड़े लोगों के खिलाफ मिली शिकायत के बाद की जा रही है। इससे पहले वन विभाग ने जांच बंद कर दी थी, जबकि विभाग की ओर से कलिंगा सेंटर फॉर रेनफॉरेस्ट इकोलॉजी (KCRE) द्वारा कथित नियम उल्लंघन पाए जाने की बात सामने आई थी।

नई जांच अजय वी. गिरी और ARRS के खिलाफ नागराज कूवे की शिकायत के आधार पर शुरू की जा रही है। शिकायत में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनकी अब वन विभाग द्वारा दोबारा समीक्षा की जाएगी।

शिकायत की एक प्रति के अनुसार, आरोप लगाया गया है कि सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अजय वी. गिरी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का उल्लंघन करते हुए सांप पकड़ने की गतिविधियों में शामिल रहे हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इन गतिविधियों से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए जाते रहे हैं।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जांच का उद्देश्य शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता का पता लगाना है। विभाग यह देखेगा कि क्या संस्था या उससे जुड़े लोगों ने वन्यजीव संरक्षण और विभागीय नियमों का उल्लंघन किया है या नहीं।

अगुम्बे क्षेत्र पश्चिमी घाट के महत्वपूर्ण वर्षावन क्षेत्रों में शामिल है और अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यह इलाका विशेष रूप से सांपों और अन्य वन्यजीवों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से यहां होने वाली शोध और संरक्षण गतिविधियों पर वन विभाग की नजर रहती है।

ARRS लंबे समय से वर्षावन पारिस्थितिकी और सरीसृपों के अध्ययन से जुड़ा रहा है। संस्था से जुड़े शोधकर्ता सांपों और अन्य जीवों के संरक्षण एवं अध्ययन का काम करते रहे हैं। हालांकि, अब संस्था की गतिविधियां जांच के दायरे में आ गई हैं।

मामले में वन विभाग पहले भी जांच कर चुका है। उस दौरान कुछ संस्थाओं के कामकाज को लेकर सवाल उठे थे और नियमों के उल्लंघन की बातें सामने आई थीं। हालांकि, बाद में जांच प्रक्रिया रोक दी गई थी। अब नई शिकायत के बाद विभाग ने मामले को फिर से खोलने का निर्णय लिया है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ गतिविधियां निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं हो रही थीं और वन विभाग के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। शिकायत में दावा किया गया है कि सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो भी जांच का हिस्सा बनाए जाने चाहिए।

वन विभाग अब उपलब्ध दस्तावेजों, वीडियो सामग्री और संबंधित रिकॉर्ड की जांच करेगा। इसके अलावा, संस्था से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों का कहना है कि सांप पकड़ने जैसे कार्यों के लिए स्पष्ट नियम और अनुमति प्रक्रिया जरूरी होती है। ऐसे मामलों में प्रशिक्षित लोगों और अधिकृत प्रक्रियाओं का पालन करना महत्वपूर्ण होता है, ताकि वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचे और संरक्षण कार्य प्रभावी तरीके से हो सके।

इस मामले ने वन्यजीव संरक्षण और शोध गतिविधियों के बीच संतुलन को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है। जहां वैज्ञानिक शोध और संरक्षण कार्यों की जरूरत है, वहीं नियमों का पालन और पारदर्शिता भी जरूरी मानी जाती है।

फिलहाल वन विभाग की नई जांच शुरू हो गई है। विभाग सभी आरोपों और उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा करेगा। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

अगुम्बे जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों पर प्रशासन की निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है। अब सभी की नजर वन विभाग की जांच रिपोर्ट और उसके बाद उठाए जाने वाले कदमों पर है।

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