आवारा कुत्तों की नसबंदी में अड़चन, 12 हजार ऑपरेशन का अभियान अटका

Update: 2026-07-24 06:47 GMT

Karnataka कर्नाटक: नगर निकाय की ओर से आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए शुरू किया जाने वाला बड़े स्तर का नसबंदी अभियान अभी तक जमीन पर गति नहीं पकड़ पाया है। कई महीने पहले टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और नसबंदी केंद्र तैयार होने के बावजूद आवारा कुत्तों को पकड़ने का वास्तविक अभियान अब तक शुरू नहीं हो सका है।

अधिकारियों के अनुसार, अभियान में देरी के पीछे कई तकनीकी और व्यवस्थागत कारण सामने आए हैं। इनमें कुत्तों को पकड़ने और उन्हें नसबंदी केंद्र तक लाने-ले जाने के लिए जरूरी मॉडिफाइड वाहनों की उपलब्धता में देरी और नए बने नसबंदी केंद्र में पानी का कनेक्शन नहीं मिल पाना प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।

नगर निकाय की योजना के अनुसार, जुड़वां शहरों में करीब 12,000 आवारा कुत्तों की नसबंदी की जानी है। इसके लिए कई स्तरों पर तैयारियां की गई थीं। टेंडर जारी होने के बाद एजेंसी का चयन भी किया गया और नसबंदी केंद्र को तैयार किया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर कुत्तों को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई।

अब अभियान शुरू करने के लिए असम से डॉग कैचर्स की टीम के आने का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षित कुत्ता पकड़ने वालों की मदद से ही सुरक्षित तरीके से आवारा कुत्तों को पकड़ा जा सकेगा और उन्हें नसबंदी केंद्र तक पहुंचाया जाएगा।

जुड़वां शहरों में आवारा कुत्तों की संख्या 25 हजार से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इतनी बड़ी आबादी को देखते हुए मौजूदा छोटे स्तर पर चल रहा नसबंदी अभियान पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। नगर निकाय का मानना है कि बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर ही आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। कई इलाकों में लोगों ने कुत्तों के झुंड और उनके कारण होने वाली परेशानियों की शिकायतें की हैं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सुबह-शाम आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जाती रही है।

नगर निकाय अधिकारियों के अनुसार, नसबंदी अभियान का उद्देश्य केवल कुत्तों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से उनकी आबादी को नियंत्रित करना है। नसबंदी के बाद कुत्तों की प्रजनन क्षमता कम होगी, जिससे आने वाले वर्षों में उनकी संख्या बढ़ने की रफ्तार को रोका जा सकेगा।

अभियान के तहत पकड़े गए कुत्तों को नसबंदी केंद्र लाया जाएगा, जहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नसबंदी और जरूरी टीकाकरण किया जाएगा। उपचार और देखभाल के बाद उन्हें उसी क्षेत्र में छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था।

विशेषज्ञों के अनुसार, आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए केवल नसबंदी ही नहीं, बल्कि नियमित निगरानी, टीकाकरण और लोगों में जागरूकता भी जरूरी है। बिना वैज्ञानिक तरीके के कुत्तों को हटाने या स्थान बदलने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलता।

नगर निकाय अब अभियान को जल्द शुरू करने की तैयारी में है। अधिकारियों का कहना है कि वाहनों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को पूरा किया जा रहा है। डॉग कैचर्स की टीम के पहुंचने के बाद कुत्तों को पकड़ने का काम चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।

स्थानीय लोगों की नजर अब इस बड़े अभियान पर टिकी हुई है। लंबे समय से इंतजार किए जा रहे इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से उम्मीद है कि शहरों में आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

हालांकि, अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है। 25 हजार से अधिक अनुमानित आवारा कुत्तों की आबादी वाले क्षेत्र में लगातार और बड़े स्तर पर प्रयास किए जाने की जरूरत होगी।

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