बेंगलुरु। कर्नाटक विधान परिषद के विशेष सत्र के दूसरे दिन सदन में सूखे और किसानों की समस्याओं पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई। KPCC अध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य बी.के. हरिप्रसाद की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी पर भाजपा सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई। इसके बाद सदन में हंगामा बढ़ गया और विपक्षी भाजपा तथा JD(S) के सदस्यों ने सत्ता पक्ष पर बार-बार बहस में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए वॉकआउट किया।
विशेष सत्र में मुख्य रूप से कर्नाटक में सूखे से किसानों को हो रही परेशानी, कृषि ऋण माफी और राहत के उपायों पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के कारण सदन का माहौल गरमा गया।
कृषि ऋण माफी पर चल रही थी चर्चा
विवाद उस समय शुरू हुआ जब विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलावादी नारायणस्वामी कृषि ऋण माफी को लेकर अपनी बात रख रहे थे। उन्होंने पूर्व की UPA सरकार के समय उठाए गए ऋण राहत के कदमों और केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में किसानों के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख किया।
इसी दौरान सत्ता पक्ष की ओर से हस्तक्षेप हुआ। कांग्रेस सदस्य सुनील ने विपक्ष से पूर्व में किए गए कुछ राजनीतिक वादों को लेकर सवाल किया। इसके बाद बहस तेज होती चली गई और बी.के. हरिप्रसाद ने हस्तक्षेप किया।
हरिप्रसाद की टिप्पणी पर भाजपा का विरोध
बहस के दौरान बी.के. हरिप्रसाद ने किसान आंदोलन में हुई मौतों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराने वाली टिप्पणी की। यह हरिप्रसाद का आरोप था, जिस पर भाजपा सदस्यों ने तत्काल आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं ने टिप्पणी को आपत्तिजनक बताते हुए इसे सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की।
भाजपा विधान परिषद सदस्य सी.टी. रवि ने हरिप्रसाद के बयान की आलोचना की। भाजपा के अन्य सदस्य भी अपनी सीटों से खड़े हो गए और टिप्पणी को कार्यवाही से हटाने की मांग करने लगे।
दूसरी ओर सत्ता पक्ष के कुछ सदस्यों ने हरिप्रसाद का बचाव किया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई और सदन में शोर बढ़ गया।
सभापति ने की व्यवस्था बनाए रखने की अपील
सदन में बढ़ते हंगामे के बीच विधान परिषद के सभापति सलीम अहमद ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने और व्यवस्थित तरीके से चर्चा करने की अपील की।
सभापति ने कहा कि हरिप्रसाद की टिप्पणी को कार्यवाही से हटाने की मांग की जांच की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर किसी टिप्पणी में असंसदीय या अनुचित शब्द पाए जाते हैं तो नियमानुसार उन्हें सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाएगा।
हालांकि इसके बाद भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस जारी रही।
'फिश मार्केट' वाली टिप्पणी पर भी विवाद
हंगामे के दौरान सभापति ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कार्यवाही की स्थिति की तुलना 'फिश मार्केट' से की। इस पर भाजपा सदस्य केशव प्रसाद ने आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि विपक्ष सत्ता पक्ष की टिप्पणियों पर चुप नहीं रह सकता और उसे अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। सभापति ने इसके बाद सभी सदस्यों से एक-दूसरे का सम्मान करते हुए चर्चा आगे बढ़ाने की अपील की।
कुछ देर बाद सदन की कार्यवाही दोबारा किसानों और सूखे से जुड़े मुद्दों की ओर लौटी, लेकिन तनाव खत्म नहीं हुआ।
DBT के मुद्दे पर फिर शुरू हुई बहस
विपक्ष के नेता चलावादी नारायणस्वामी ने सूखे से प्रभावित किसानों और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के माध्यम से दी जाने वाली सहायता का मुद्दा उठाया। इस दौरान मंत्री संतोष लाड ने उनके बयान पर स्पष्टीकरण मांगा।
विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के सदस्य लगातार उनकी बात में हस्तक्षेप कर रहे हैं और उन्हें अपनी बात पूरी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा।
इसके बाद भाजपा सदस्य सी.टी. रवि ने सवाल किया कि यदि सूखे और किसानों की समस्याओं पर सदस्यों को खुलकर अपनी बात रखने का मौका नहीं मिलेगा तो विशेष सत्र बुलाने का उद्देश्य क्या है।
BJP और JD(S) ने किया वॉकआउट
लगातार हो रहे व्यवधान के बीच भाजपा और JD(S) के सदस्यों ने सत्ता पक्ष के रवैये का विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि किसानों के मुद्दों पर उसकी बात को बार-बार बाधित किया जा रहा है।
विपक्षी सदस्यों के बाहर जाने के बाद सभापति सलीम अहमद ने विधान परिषद की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित कर दी।
सूखे पर चर्चा के लिए बुलाया गया विशेष सत्र
कर्नाटक में गंभीर सूखे की स्थिति को देखते हुए 21 से 23 सितंबर तक तीन दिवसीय विशेष विधायी सत्र बुलाया गया है। इसमें सूखा, किसानों की समस्याएं, पेयजल संकट और पश्चिमी घाट से जुड़ी कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट जैसे मुद्दों पर चर्चा निर्धारित की गई।
राज्य सरकार के अनुसार कर्नाटक के 177 तालुक अब तक सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके हैं और आगे के आकलन के बाद यह संख्या करीब 200 तक पहुंच सकती है। सरकार का कहना है कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों की पहचान केंद्र सरकार के निर्धारित दिशा-निर्देशों के आधार पर की जा रही है।
किसानों के कर्ज का मुद्दा भी चर्चा में
सूखे के साथ किसानों के कृषि ऋण का मुद्दा भी विशेष सत्र की बहस के केंद्र में है। राज्य में सूखाग्रस्त तालुकों के किसानों के लिए कर्ज भुगतान को लेकर पहले ही राहत उपायों की घोषणा की गई है।
राज्य सरकार ने सूखाग्रस्त तालुकों में किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि ऋण और डेयरी, रेशम उत्पादन, मत्स्य पालन जैसी कृषि से जुड़ी गतिविधियों के ऋण की अदायगी पर 12 महीने की मोहलत देने का निर्णय लिया है। मध्यम रूप से प्रभावित तालुकों में भुगतान अवधि 36 महीने और गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में 60 महीने तक बढ़ाने का फैसला किया गया है।
हालांकि कृषि ऋण माफी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस जारी है।
किसानों के मुद्दे पर सियासी टकराव
विशेष सत्र का उद्देश्य सूखे और किसानों की परेशानियों पर विस्तार से चर्चा करना है, लेकिन दूसरे दिन की कार्यवाही में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हावी रहे। प्रधानमंत्री मोदी को लेकर हरिप्रसाद की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद बाद में सदन में विपक्ष को बोलने का पर्याप्त अवसर मिलने के सवाल तक पहुंच गया।
सभापति की ओर से बार-बार व्यवस्था बनाए रखने की अपील के बावजूद दोनों पक्षों के बीच टकराव जारी रहा और आखिरकार विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया। सूखे से जूझ रहे किसानों के लिए राहत और कृषि ऋण से जुड़े मुद्दों पर अब सरकार और विपक्ष के आगे के रुख पर नजर रहेगी।