बेंगलुरु। महालक्ष्मीपुरम स्थित बसवेश्वरा एडेड हाई स्कूल में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं की खराब स्थिति को लेकर छात्रों और अभिभावकों ने चिंता जताई है। स्कूल में कक्षा 9वीं और 10वीं के कुल 96 विद्यार्थियों को गणित और विज्ञान पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक नहीं होने की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि नियमित रूप से पढ़ाई नहीं होने के बावजूद विद्यार्थियों को चल रही मिड-टर्म परीक्षाओं में शामिल होना पड़ रहा है।
मामला सामने आने के बाद छात्रों, अभिभावकों और ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (AIDSO) के प्रतिनिधियों के एक दल ने वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों के सामने समस्या रखी है। सूत्रों के मुताबिक फील्ड एजुकेशन ऑफिसर ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की तत्काल जांच कराने का आश्वासन दिया है।
96 विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर
स्कूल में 9वीं और 10वीं कक्षा में कुल 96 विद्यार्थी पढ़ते हैं। इन कक्षाओं के लिए गणित और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की कमी होने की बात सामने आई है।
विद्यार्थियों और अभिभावकों का कहना है कि दोनों विषय आगे की पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि लंबे समय तक संबंधित विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं रहते हैं तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर पड़ सकता है।
विशेष रूप से 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए यह समस्या अधिक गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि उन्हें बोर्ड परीक्षा की तैयारी करनी होती है।
पढ़ाई पूरी नहीं फिर भी मिड-टर्म परीक्षा
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शिक्षकों की कमी के कारण गणित और विज्ञान की पढ़ाई प्रभावित होने के बावजूद विद्यार्थियों को मिड-टर्म परीक्षाओं में बैठना पड़ रहा है।
अभिभावकों का सवाल है कि जब संबंधित विषयों की नियमित पढ़ाई ही प्रभावित है तो विद्यार्थियों से परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
छात्रों का भी कहना है कि उन्हें विषयों को समझने और परीक्षा की तैयारी करने में परेशानी हो रही है। शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण कई महत्वपूर्ण अध्यायों और अवधारणाओं को समझना कठिन हो रहा है।
अधिकारियों के सामने पहुंचा मामला
समस्या का समाधान नहीं होने पर छात्रों, अभिभावकों और AIDSO प्रतिनिधियों ने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने शिकायत रखी। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षकों की नियुक्ति या वैकल्पिक व्यवस्था करने के साथ स्कूल में मौजूद बुनियादी समस्याओं को दूर करने की मांग की है।
सूत्रों के मुताबिक फील्ड एजुकेशन ऑफिसर ने मामले की तत्काल जांच कराने का आश्वासन दिया है।
जांच में यह देखा जा सकता है कि स्कूल में स्वीकृत शिक्षकों के कितने पद हैं, वर्तमान में कितने शिक्षक कार्यरत हैं और गणित तथा विज्ञान की कक्षाओं के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
एक ही टॉयलेट इस्तेमाल के लायक
AIDSO के बेंगलुरु कार्यालय के सचिव किरण कुमार ने दावा किया कि स्कूल की समस्या केवल शिक्षकों की कमी तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक स्कूल में बुनियादी ढांचे की स्थिति भी चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि स्कूल में केवल एक टॉयलेट इस्तेमाल करने लायक है। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के लिए सिर्फ एक उपयोग योग्य शौचालय होने से छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्कूलों में पर्याप्त और साफ शौचालय की उपलब्धता विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिहाज से जरूरी है। छात्राओं के लिए यह सुविधा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
बारिश में छत से टपकता है पानी
AIDSO ने स्कूल की इमारत की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। किरण कुमार के मुताबिक बारिश होने पर स्कूल की छत से पानी टपकने लगता है।
इससे विद्यार्थियों को कक्षाओं में बैठने और पढ़ाई करने में परेशानी होती है। लगातार पानी का रिसाव भवन की स्थिति को भी प्रभावित कर सकता है।
प्रतिनिधियों की मांग है कि शिक्षा विभाग स्कूल भवन का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कराए, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित माहौल में पढ़ाई करने की सुविधा मिल सके।
शिक्षक की कमी सबसे बड़ी चिंता
गणित और विज्ञान जैसे विषयों में शिक्षक का नियमित मार्गदर्शन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण होता है। इन विषयों में केवल पाठ्यपुस्तक पढ़ना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सवाल हल करने, प्रयोगों को समझने और जटिल अवधारणाओं को सरल तरीके से सीखने के लिए शिक्षक की जरूरत होती है।
10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए गणित और विज्ञान में मजबूत तैयारी उनके परीक्षा परिणाम पर भी असर डाल सकती है।
अभिभावकों का कहना है कि शिक्षकों की कमी को जल्द दूर किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई का और नुकसान न हो।
वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
जब तक नियमित शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होती, तब तक विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक शिक्षक उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है।
इसके अलावा अतिरिक्त कक्षाओं के जरिए प्रभावित पढ़ाई को पूरा कराने की जरूरत भी बताई जा रही है। यदि विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम पीछे रह गया है तो परीक्षा से पहले विशेष कक्षाएं आयोजित कर उन्हें तैयारी का पर्याप्त समय दिया जा सकता है।
छात्र संगठन का कहना है कि केवल परीक्षा आयोजित कर देना पर्याप्त नहीं है। परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पढ़ाने और जरूरी शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराना भी स्कूल की जिम्मेदारी है।
बुनियादी सुविधाओं की भी होगी जांच
शिकायत में उठाए गए मुद्दों को देखते हुए स्कूल में शिक्षकों की उपलब्धता के साथ बुनियादी सुविधाओं की स्थिति की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
शौचालय, सुरक्षित कक्षाएं, बारिश से बचाव, साफ पानी और अन्य आवश्यक सुविधाएं विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण का हिस्सा हैं।
यदि निरीक्षण में छत से पानी टपकने और शौचालय की खराब स्थिति की शिकायत सही पाई जाती है तो स्कूल प्रबंधन और संबंधित विभाग से जल्द सुधारात्मक कदम उठाने की अपेक्षा की जाएगी।
छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में शिक्षकों की कमी का समाधान जल्द होना चाहिए, क्योंकि शैक्षणिक सत्र के बीच लंबे समय तक पढ़ाई प्रभावित होने से विद्यार्थियों के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।
9वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए गणित और विज्ञान की मजबूत बुनियाद अगले शैक्षणिक वर्ष के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि 10वीं के विद्यार्थियों के सामने बोर्ड परीक्षा की तैयारी की चुनौती है।
इस कारण अभिभावक चाहते हैं कि विभाग केवल जांच तक सीमित न रहे बल्कि शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए।
जांच के बाद सामने आएगी स्थिति
फिलहाल छात्रों, अभिभावकों और AIDSO की ओर से लगाए गए आरोपों को अधिकारियों के सामने रखा गया है। फील्ड एजुकेशन ऑफिसर की ओर से तत्काल जांच का आश्वासन मिलने के बाद अब स्कूल की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट का इंतजार है।
जांच से यह स्पष्ट होगा कि गणित और विज्ञान के शिक्षकों की कमी कितने समय से है और विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए स्कूल प्रबंधन ने क्या वैकल्पिक व्यवस्था की है।
इसके साथ ही एकमात्र उपयोग योग्य टॉयलेट और बारिश में छत से पानी टपकने की शिकायत की भी पुष्टि हो सकेगी। अभिभावकों और छात्रों को उम्मीद है कि जांच के बाद शिक्षक उपलब्ध कराने और स्कूल के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए जल्द ठोस कदम उठाए जाएंगे।