बेंगलुरु। भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और ई-गवर्नेंस मॉडल को समझने के लिए अफ्रीकी देशों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को कर्नाटक का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल में इथियोपिया, मलावी, रवांडा, सिएरा लियोन और जाम्बिया के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। इस दौरान अधिकारियों ने कर्नाटक में डिजिटल माध्यम से सरकारी सेवाओं को नागरिकों तक पहुंचाने की व्यवस्था और ई-गवर्नेंस के विभिन्न मॉडल की जानकारी ली।

प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश, प्रधान सचिव ई-गवर्नेंस पंकज कुमार पांडे और सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस (CeG) के अधिकारियों के साथ बातचीत की। बैठक में राज्य के डिजिटल प्रशासन से जुड़े प्रमुख कार्यक्रमों, एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म और नागरिक केंद्रित सरकारी सेवाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

अफ्रीकी अधिकारियों ने विशेष रूप से यह समझने में रुचि दिखाई कि किस तरह तकनीक का इस्तेमाल कर सरकारी सेवाओं को अधिक कुशल, पारदर्शी और आम नागरिकों के लिए आसानी से उपलब्ध कराया जा सकता है।

डिजिटल प्रशासन के मॉडल पर चर्चा

बैठक के दौरान कर्नाटक सरकार के अधिकारियों ने राज्य में ई-गवर्नेंस के लिए अपनाए गए मॉडल की जानकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ साझा की। अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों की सेवाओं को नागरिकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

डिजिटल प्रशासन का उद्देश्य लोगों को सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत कम करना और सेवाओं की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है। इसके लिए विभिन्न विभागों की सेवाओं और डेटा को तकनीक के माध्यम से जोड़ने पर जोर दिया गया है।

प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि डिजिटल व्यवस्था के जरिए सेवाओं की निगरानी, आवेदन की स्थिति और सरकारी योजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है।

CeG की भूमिका की दी जानकारी

कर्नाटक के सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस की भूमिका भी बैठक का प्रमुख विषय रही। अधिकारियों ने बताया कि CeG राज्य में एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने और विभिन्न सरकारी सेवाओं को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

CeG का उद्देश्य तकनीकी समाधान तैयार कर सरकारी विभागों के कामकाज को सरल और प्रभावी बनाना है। इसके माध्यम से नागरिकों को अलग-अलग सरकारी सेवाओं तक पहुंचने के लिए डिजिटल विकल्प उपलब्ध कराए जाते हैं।

प्रतिनिधिमंडल के सामने यह भी बताया गया कि एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद करते हैं। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में लगने वाला समय कम किया जा सकता है और सेवाओं की जवाबदेही भी बढ़ाई जा सकती है।

पारदर्शिता और आसान पहुंच पर जोर

अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से किसी सेवा के लिए आवेदन करने से लेकर उसके निपटारे तक की प्रक्रिया को ट्रैक करना आसान हो जाता है।

इसके अलावा नागरिकों को सरकारी सेवाओं की जानकारी और उन तक पहुंच डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होने पर प्रशासनिक व्यवस्था अधिक सुलभ बन सकती है।

अधिकारियों ने बताया कि तकनीक का उद्देश्य केवल सरकारी कामकाज को ऑनलाइन करना नहीं बल्कि नागरिकों के अनुभव को बेहतर बनाना भी है। इसी सोच के साथ कर्नाटक में विभिन्न डिजिटल सेवाओं को विकसित और लागू किया गया है।

कंप्यूटर साक्षरता परीक्षा की भी जानकारी

प्रतिनिधिमंडल को कर्नाटक में कंप्यूटर साक्षरता से जुड़े प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी गई। राज्य ने सरकारी व्यवस्था में डिजिटल दक्षता बढ़ाने के लिए कंप्यूटर साक्षरता परीक्षा जैसे कदम उठाए हैं।

इस पहल का उद्देश्य कर्मचारियों में कंप्यूटर और डिजिटल प्रणालियों के उपयोग की क्षमता विकसित करना है। ई-गवर्नेंस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उनका इस्तेमाल करने वाले कर्मचारियों को भी तकनीकी रूप से सक्षम बनाना जरूरी होता है।

इसी वजह से डिजिटल कौशल और प्रशिक्षण को ई-गवर्नेंस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

पांच अफ्रीकी देशों के अधिकारी हुए शामिल

प्रतिनिधिमंडल में इथियोपिया, मलावी, रवांडा, सिएरा लियोन और जाम्बिया के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने इस दौरे को महत्वपूर्ण बनाया। इन देशों में भी प्रशासनिक सेवाओं को डिजिटल बनाने और तकनीक के माध्यम से नागरिकों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने पर काम किया जा रहा है।

भारत में विकसित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे में विभिन्न देश भारत के अनुभव और तकनीकी ढांचे को समझने में रुचि दिखा रहे हैं।

कर्नाटक का दौरा इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जहां अफ्रीकी अधिकारियों को राज्य स्तर पर डिजिटल प्रशासन के व्यावहारिक इस्तेमाल को समझने का अवसर मिला।

भारत के DPI मॉडल में बढ़ी दिलचस्पी

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग नागरिकों को बड़े पैमाने पर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। इसके जरिए पहचान, भुगतान, दस्तावेज और सरकारी सेवाओं जैसी विभिन्न सुविधाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ा जा सकता है।

भारत ने पिछले वर्षों में डिजिटल सार्वजनिक ढांचे के क्षेत्र में कई पहल की हैं। केंद्र के साथ राज्यों ने भी अपनी आवश्यकताओं के अनुसार ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं।

कर्नाटक तकनीक और आईटी क्षेत्र में देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है। बेंगलुरु वैश्विक तकनीकी केंद्र के रूप में जाना जाता है। ऐसे में राज्य के ई-गवर्नेंस अनुभव का अध्ययन विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के लिए उपयोगी माना जा रहा है।

डिजिटल तकनीक से बेहतर प्रशासन का प्रयास

बैठक के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल प्रशासन में दक्षता बढ़ाने में मदद कर सकता है। सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण से आवेदन और मंजूरी जैसी प्रक्रियाओं में तेजी लाई जा सकती है।

इसके साथ ही डेटा आधारित प्रशासन से सरकार को योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके प्रभाव का बेहतर आकलन करने में मदद मिल सकती है। डिजिटल रिकॉर्ड होने से सरकारी प्रक्रियाओं की निगरानी और जवाबदेही भी बेहतर हो सकती है।

हालांकि डिजिटल प्रशासन के साथ डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता जैसी चुनौतियों पर भी ध्यान देना आवश्यक है। किसी भी ई-गवर्नेंस व्यवस्था की सफलता के लिए तकनीकी ढांचे के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन भी जरूरी हैं।

अनुभव साझा करने से मजबूत होगा सहयोग

अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल का कर्नाटक दौरा भारत और अफ्रीकी देशों के बीच डिजिटल सहयोग की संभावनाओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत में विकसित तकनीकी और प्रशासनिक मॉडल से मिले अनुभवों का इस्तेमाल अन्य देश अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार कर सकते हैं।

प्रतिनिधिमंडल और कर्नाटक के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई बातचीत से डिजिटल प्रशासन, क्षमता निर्माण और सरकारी सेवाओं में तकनीक के इस्तेमाल को लेकर अनुभव साझा करने का अवसर मिला।

इस दौरे के जरिए अफ्रीकी अधिकारियों ने यह समझने की कोशिश की कि बड़े पैमाने पर डिजिटल प्लेटफॉर्म को किस तरह सरकारी व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है और नागरिकों के लिए सेवाओं को अधिक सरल बनाया जा सकता है।

कर्नाटक सरकार के लिए भी यह दौरा अपने ई-गवर्नेंस मॉडल और डिजिटल प्रशासन से जुड़े अनुभव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा करने का अवसर बना। आने वाले समय में इस तरह के संवाद भारत और अफ्रीकी देशों के बीच डिजिटल तकनीक और प्रशासन के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत कर सकते हैं।

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