बेंगलुरु। कर्नाटक पुलिस ने एक IPS अधिकारी के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाने और लोगों से कथित तौर पर पैसे ऐंठने के मामले का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में राजस्थान के एक नाबालिग को पकड़ा है। आरोपी के पास से करीब दो लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि यह रकम फर्जी बैंक खाते के जरिए की गई धोखाधड़ी से हासिल की गई थी।
पुलिस ने बुधवार को मामले की जानकारी देते हुए बताया कि नाबालिग ने बेंगलुरु में डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (इलेक्ट्रॉनिक सिटी डिवीजन) के पद पर कार्यरत IPS अधिकारी नारायण एम. के नाम से कथित तौर पर एक फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाई थी। इस प्रोफाइल पर अधिकारी की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था, ताकि लोगों को अकाउंट असली लगे।
आरोप है कि फर्जी फेसबुक अकाउंट तैयार करने के बाद नाबालिग पुलिस अधिकारी के परिचितों और आम लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजता था। जब लोग प्रोफाइल को असली समझकर फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार कर लेते थे, तब आरोपी उनसे बातचीत शुरू करता और अलग-अलग बहाने बनाकर पैसे मांगता था।
पुलिस के मुताबिक IPS अधिकारी की तस्वीर का गलत इस्तेमाल कर फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाने के संबंध में हेब्बागोडी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और फर्जी अकाउंट के पीछे मौजूद व्यक्ति की पहचान करने के लिए तकनीकी जानकारी जुटाई।
जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस राजस्थान तक पहुंची और मामले में एक नाबालिग की भूमिका सामने आने का दावा किया। इसके बाद उसे पकड़ लिया गया। नाबालिग होने के कारण उसके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई किशोर न्याय से संबंधित प्रावधानों के अनुसार की जाएगी।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से करीब दो लाख रुपये नकद जब्त किए हैं। प्रारंभिक जांच में यह रकम कथित तौर पर धोखाधड़ी के जरिए हासिल किए गए पैसे से जुड़ी बताई जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने कुल कितने लोगों को निशाना बनाया और ठगी के जरिए कितनी रकम हासिल की।
इस मामले में फर्जी बैंक खाते का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस इसकी जांच कर रही है कि संबंधित बैंक खाता किसके नाम पर खोला गया था और आरोपी उसका इस्तेमाल किस तरह कर रहा था। बैंक खाते में हुए लेन-देन का रिकॉर्ड भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नाबालिग अकेले इस कथित ठगी को अंजाम दे रहा था या उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति या समूह भी जुड़ा हुआ था। फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट और बैंक खाते के इस्तेमाल को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
आरोपी ने जिस तरह एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की पहचान का कथित रूप से इस्तेमाल किया, उसने साइबर अपराध के बदलते तरीकों को एक बार फिर सामने ला दिया है। सोशल मीडिया पर किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति, अधिकारी या परिचित की तस्वीर और नाम देखकर लोग अकाउंट पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं। साइबर अपराधी इसी भरोसे का फायदा उठाकर पैसे मांगने की कोशिश करते हैं।
पुलिस के अनुसार आरोपी कथित तौर पर अलग-अलग बहाने बनाकर लोगों से रकम मांगता था। सामने वाले व्यक्ति को लगता था कि पैसे मांगने वाला वास्तव में वही IPS अधिकारी है जिसकी तस्वीर और नाम प्रोफाइल पर मौजूद है। इसी भ्रम का फायदा उठाकर ठगी को अंजाम देने का आरोप है।
मामले में यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी प्रोफाइल कब बनाई गई और वह कितने समय तक सक्रिय रही। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से संबंधित डिजिटल जानकारी जांच एजेंसियों को यह पता लगाने में मदद कर सकती है कि अकाउंट किस डिवाइस और स्थान से संचालित किया जा रहा था।
पुलिस पीड़ितों की संख्या का पता लगाने के लिए बैंकिंग लेन-देन और फर्जी अकाउंट से की गई बातचीत से जुड़े उपलब्ध रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है। यदि अन्य पीड़ित सामने आते हैं तो उनके बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।
दो लाख रुपये नकद बरामद होने के बाद पुलिस अब रकम के स्रोत की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है। जांच में यह देखा जाएगा कि ठगी से प्राप्त रकम बैंक खाते से कब निकाली गई और इससे पहले खाते में किन-किन लोगों ने पैसे ट्रांसफर किए थे।
साइबर अपराध के मामलों में फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर ठगी करने का तरीका नया नहीं है। कई बार वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिसकर्मियों, सरकारी कर्मचारियों या परिचित लोगों की तस्वीरें लेकर नकली अकाउंट बनाए जाते हैं। इसके बाद उनके परिचितों को संदेश भेजकर आपातकालीन जरूरत या किसी अन्य बहाने से पैसे मांगे जाते हैं।
ऐसे मामलों से बचने के लिए सोशल मीडिया पर आने वाली संदिग्ध फ्रेंड रिक्वेस्ट और पैसों की मांग को लेकर सतर्कता जरूरी है। यदि किसी परिचित या अधिकारी के नाम वाले अकाउंट से अचानक पैसे मांगे जाएं तो दूसरे माध्यम से संबंधित व्यक्ति से संपर्क कर उसकी पुष्टि करना उपयोगी हो सकता है।
इस मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि आरोपी ने कथित तौर पर पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल किया। इससे न केवल लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचने का खतरा पैदा हुआ बल्कि संबंधित अधिकारी की छवि और पहचान के दुरुपयोग का मामला भी सामने आया।
हेब्बागोडी पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले की जांच के दौरान अब पुलिस डिजिटल और वित्तीय दोनों तरह के साक्ष्यों को खंगाल रही है। फर्जी फेसबुक अकाउंट से जुड़े तकनीकी विवरण और कथित फर्जी बैंक खाते के लेन-देन से पूरे नेटवर्क की जानकारी मिलने की उम्मीद है।
पुलिस यह भी जांच सकती है कि आरोपी ने IPS अधिकारी नारायण एम. की तस्वीर कहां से हासिल की और क्या उसने इससे पहले भी किसी अन्य अधिकारी या व्यक्ति के नाम से फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाए थे। उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन या अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच से इस संबंध में अतिरिक्त जानकारी मिल सकती है।
फिलहाल राजस्थान के नाबालिग को पकड़ने और दो लाख रुपये नकद जब्त करने के बाद पुलिस ने जांच आगे बढ़ा दी है। मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कथित ठगी में और कितने लोग प्रभावित हुए तथा क्या आरोपी के पीछे कोई बड़ा साइबर नेटवर्क काम कर रहा था। विस्तृत जांच के बाद ही इन सवालों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।