बेंगलुरु।कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को भारत निर्वाचन आयोग के उस निर्देश का स्वागत किया, जिसमें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पूरा होने के बाद मतदाता सूची में शामिल होने से छूट गए पात्र मतदाताओं की पहचान करने और उनके पंजीकरण में मदद करने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया है। शिवकुमार ने कहा कि हर पात्र मतदाता की आवाज सुनी जानी चाहिए और उसे मतदाता सूची में शामिल होने का उचित अवसर मिलना चाहिए।
शिवकुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर न रहें, इसे सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए गए थे। उन्होंने चुनाव आयोग के नए निर्देश को इसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने कहा, “हर वोट की बात सुनी जानी चाहिए।” शिवकुमार के मुताबिक योग्य मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर होने से बचाने के लिए लगातार मुद्दा उठाया गया और अब निर्वाचन आयोग ने SIR के बाद छूट गए योग्य मतदाताओं की पहचान कर उनके पंजीकरण में मदद करने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
निर्वाचन आयोग ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाने को कहा है, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसका उद्देश्य ऐसे योग्य मतदाताओं की पहचान करना है, जिनका नाम पहले मतदाता सूची में था, लेकिन मौजूदा सूची में नहीं है। इसके साथ ही पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं को भी पंजीकरण में सहायता दी जाएगी।
आयोग के निर्देश के मुताबिक बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO मौजूदा मतदाता सूची की तुलना SIR से पहले की मतदाता सूची से करेंगे। इस प्रक्रिया में उन मतदाताओं की सूची तैयार की जाएगी, जिनका नाम पहले दर्ज था लेकिन वर्तमान मतदाता सूची में दिखाई नहीं दे रहा है। इसके बाद संबंधित मतदाताओं की स्थिति का पता लगाया जाएगा।
BLO घर-घर जाकर ऐसे मतदाताओं की जानकारी जुटाएंगे। अगर कोई व्यक्ति पात्र पाया जाता है और उसका नाम मौजूदा मतदाता सूची में नहीं है तो उसके पंजीकरण के लिए Form 6 भरने में सहायता की जाएगी। अभियान में छूटे हुए मतदाताओं के साथ नए और पहली बार मतदान के पात्र बने युवाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
निर्वाचन आयोग के अनुसार मतदाता पंजीकरण एक सतत प्रक्रिया है। कोई व्यक्ति अभी तक मतदाता सूची में शामिल नहीं हुआ है या उसका नाम सूची से हट गया है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। विशेष अभियान का उद्देश्य ऐसे लोगों की सक्रिय रूप से पहचान करना और उन्हें पंजीकरण की प्रक्रिया में सहायता देना है।
आयोग ने BLO को घर-घर संपर्क करने के साथ प्रत्येक मतदाता की वर्तमान स्थिति दर्ज करने को भी कहा है। जिन पात्र मतदाताओं के लिए Form 6 भरा जाएगा, उसकी जानकारी भी रिकॉर्ड में रखी जाएगी। इसके बाद आवेदन और फील्ड वेरिफिकेशन से संबंधित जानकारी निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों यानी ERO के पास भेजी जाएगी।
विशेष अभियान के दौरान तैयार की जाने वाली सूचियां मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ भी साझा की जाएंगी। अभियान के अंत में बूथवार जानकारी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम शामिल कराने की प्रक्रिया में एक और अवसर उपलब्ध हो सके।
निर्वाचन आयोग ने बूथ स्तर पर विशेष शिविर लगाने का भी निर्देश दिया है। इन शिविरों के जरिए मतदाताओं को पंजीकरण में सहायता दी जाएगी। रात्रि आश्रय स्थलों, श्रमिक कॉलोनियों और बेघर लोगों सहित ऐसे समूहों तक पहुंचने पर भी ध्यान देने को कहा गया है, जिन्हें सामान्य पंजीकरण प्रक्रिया में कठिनाई हो सकती है।
इसके अलावा मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और ERO को जागरूकता अभियान चलाने को कहा गया है। शिक्षण संस्थानों, स्थानीय स्तर की गतिविधियों और मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए लोगों को विशेष अभियान की जानकारी देने की योजना है।
डी.के. शिवकुमार ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे योग्य मतदाताओं के अधिकारों से जोड़ा। उन्होंने इससे पहले भी SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए थे। कर्नाटक में Form 7 के कथित दुरुपयोग और बड़े पैमाने पर नाम हटाने के प्रयासों को लेकर कांग्रेस की ओर से आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। ये आरोप राजनीतिक विवाद का हिस्सा हैं और संबंधित मामलों में जांच तथा कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
शिवकुमार ने पार्टी के विधायकों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और नेताओं से भी मतदाता सूची की प्रक्रिया पर नजर रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम छूटा हुआ दिखाई देता है या कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के सामने मामला उठाया जाना चाहिए।
निर्वाचन आयोग का यह विशेष अभियान उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जाना है, जहां SIR पूरा हो चुका है। आयोग की ओर से इस संबंध में 29 सितंबर को निर्देश भेजे गए थे और 1 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भी इस अभियान पर चर्चा की गई।
अब विशेष अभियान के जरिए चुनाव अधिकारी SIR से पहले और बाद की मतदाता सूचियों की तुलना कर छूटे हुए पात्र लोगों तक पहुंचेंगे। डी.के. शिवकुमार ने इस पहल का स्वागत करते हुए दोहराया कि प्रत्येक योग्य नागरिक को मतदाता सूची में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए और “हर वोट की बात सुनी जानी चाहिए।”