COMEDK 2027 परीक्षा के लिए कड़ा साइबर सुरक्षा सिस्टम, तीन विशेषज्ञ होंगे तैनात
बेंगलुरु। कर्नाटक के मेडिकल, इंजीनियरिंग और डेंटल कॉलेजों के संघ COMEDK ने 2027 की प्रवेश परीक्षा को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी, साइबर हस्तक्षेप या तकनीकी हेरफेर को रोकने के लिए संगठन तीन वरिष्ठ साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों को नियुक्त कर रहा है। यह कदम COMEDK-UGET 2026 के दौरान जमशेदपुर के कुछ परीक्षा केंद्रों पर सामने आई कथित अनियमितताओं के बाद उठाया गया है।
COMEDK के सचिव डॉ. एस. कुमार ने बताया कि संगठन 2027 की परीक्षा के लिए एक नया और ज्यादा सुरक्षित परीक्षा सिस्टम तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि तीन अनुभवी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को इस प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। ये विशेषज्ञ मौजूदा परीक्षा प्रणाली की तकनीकी खामियों का अध्ययन करेंगे और ऐसी व्यवस्था सुझाएंगे जिससे परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।
डॉ. कुमार के अनुसार, साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ परीक्षा से जुड़े सॉफ्टवेयर, सर्वर, नेटवर्क, डेटा सुरक्षा और परीक्षा केंद्रों पर इस्तेमाल होने वाली तकनीकी प्रणालियों की समीक्षा करेंगे। इसके बाद वे COMEDK को एक विस्तृत रिपोर्ट और सुझाव देंगे। संगठन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा प्रक्रिया में प्रश्नपत्र, अभ्यर्थियों की पहचान, लॉगिन सिस्टम, ऑनलाइन निगरानी और डेटा ट्रांसफर जैसे सभी संवेदनशील हिस्से सुरक्षित रहें।
COMEDK-UGET देशभर में बड़ी संख्या में छात्रों के लिए महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षा है। इसके जरिए कर्नाटक के निजी इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश का रास्ता खुलता है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के शामिल होने और परीक्षा के कंप्यूटर आधारित होने के कारण तकनीकी सुरक्षा को बेहद अहम माना जाता है। इसी वजह से अब परीक्षा प्रबंधन में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की भूमिका बढ़ाई जा रही है।
2026 की परीक्षा के दौरान जमशेदपुर के कुछ केंद्रों पर सामने आई गड़बड़ी की घटनाओं ने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद COMEDK ने भविष्य की परीक्षाओं में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया। संगठन अब केवल सामान्य तकनीकी निगरानी पर निर्भर रहने के बजाय स्वतंत्र साइबर विशेषज्ञों की मदद से पूरे सिस्टम को नए सिरे से जांचना चाहता है।
नए सुरक्षा मॉडल में परीक्षा केंद्रों की तकनीकी गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी, संदिग्ध लॉगिन की पहचान, अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल पर रोक और परीक्षा के दौरान नेटवर्क गतिविधियों की निगरानी जैसे उपाय शामिल किए जा सकते हैं। हालांकि अंतिम व्यवस्था विशेषज्ञों की रिपोर्ट और COMEDK के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।
अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा केवल भौतिक निगरानी तक सीमित नहीं रह सकती। कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं में साइबर सुरक्षा की भूमिका लगातार बढ़ रही है। यदि किसी परीक्षा केंद्र के नेटवर्क, सिस्टम या सर्वर में अनधिकृत हस्तक्षेप होता है तो परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। इसलिए अब तकनीकी सुरक्षा को परीक्षा प्रबंधन का मुख्य हिस्सा बनाया जा रहा है।
COMEDK की योजना अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापन प्रक्रिया को भी और मजबूत करने की है। परीक्षा के दौरान किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा उम्मीदवार की जगह परीक्षा देने, फर्जी पहचान पत्र के इस्तेमाल या सिस्टम के साथ छेड़छाड़ जैसी कोशिशों को रोकने के लिए नए तकनीकी उपायों पर विचार किया जा रहा है। बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल लॉग की निगरानी जैसे उपायों को भी ज्यादा सख्ती से लागू किया जा सकता है।
परीक्षा केंद्रों का चयन भी अब अधिक सावधानी से किए जाने की संभावना है। जिन केंद्रों पर तकनीकी सुविधाएं पर्याप्त नहीं होंगी या जहां सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल होंगे, उन्हें परीक्षा केंद्र के रूप में शामिल करने से पहले अतिरिक्त जांच की जा सकती है। साथ ही परीक्षा केंद्र संचालकों के लिए भी सख्त दिशानिर्देश तैयार किए जा सकते हैं।
COMEDK का जोर इस बात पर है कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रहे और किसी भी अभ्यर्थी को अनुचित लाभ न मिल सके। संगठन परीक्षा में शामिल होने वाले लाखों छात्रों का भरोसा बनाए रखने के लिए तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की नियुक्ति के बाद वे परीक्षा के प्रत्येक चरण का अध्ययन करेंगे। इसमें आवेदन प्रक्रिया, एडमिट कार्ड जारी करने की व्यवस्था, परीक्षा केंद्रों की तकनीकी तैयारी, प्रश्नपत्र वितरण, उत्तर दर्ज करने और परीक्षा के बाद डेटा सुरक्षित रखने की प्रक्रिया भी शामिल हो सकती है।
डॉ. एस. कुमार ने स्पष्ट किया कि COMEDK एक नया परीक्षा सिस्टम विकसित कर रहा है, जिसमें सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। विशेषज्ञों से मिलने वाले सुझावों के आधार पर 2027 की परीक्षा के लिए नए प्रोटोकॉल तैयार किए जाएंगे।
परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किए जाने की संभावना है। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी, डिजिटल रिकॉर्डिंग और तकनीकी गतिविधियों का लॉग सुरक्षित रखने जैसे उपायों को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है। किसी संदिग्ध गतिविधि का पता चलने पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए अलग मॉनिटरिंग टीम भी बनाई जा सकती है।
COMEDK की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि देशभर में कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं में साइबर सुरक्षा की चुनौती लगातार बढ़ रही है। तकनीक के इस्तेमाल से परीक्षा प्रक्रिया आसान हुई है, लेकिन इसके साथ ही सिस्टम में सेंध लगाने और गलत तरीके अपनाने की कोशिशों का खतरा भी बढ़ा है।
अब COMEDK 2027 परीक्षा से पहले इन चुनौतियों का समाधान तैयार करना चाहता है। तीन वरिष्ठ साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की नियुक्ति इसी व्यापक योजना का हिस्सा है। संगठन का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था बनाना है जिसमें तकनीकी छेड़छाड़, फर्जीवाड़ा और परीक्षा संबंधी अन्य गड़बड़ियों के लिए कोई गुंजाइश न रहे।
फिलहाल विशेषज्ञों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उनकी रिपोर्ट मिलने के बाद COMEDK परीक्षा सुरक्षा से जुड़े नए नियम और तकनीकी बदलाव लागू करेगा। संगठन को उम्मीद है कि नई व्यवस्था से 2027 की परीक्षा ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद होगी।