बेंगलुरु। महात्मा गांधी के जीवन और उनके विचारों को समर्पित राज्य के पहले डिजिटल म्यूजियम ‘महात्माना पयाना’ का उद्घाटन शुक्रवार, 2 अक्टूबर को गांधी भवन में किया जाएगा। गांधी जयंती के मौके पर शुरू होने वाला यह म्यूजियम तकनीक और इतिहास के मेल का उदाहरण होगा। यहां महात्मा गांधी के बचपन से लेकर उनके जीवन के आखिरी दिनों तक की यात्रा को डिजिटल माध्यम से दर्शाया गया है। म्यूजियम में तस्वीरों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और QR कोड आधारित डिजिटल तकनीक के जरिए बापू के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को लोगों के सामने रखा जाएगा।

इस डिजिटल म्यूजियम की जानकारी गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गांधी भवन के अध्यक्ष वुडे पी. कृष्णा ने दी। उन्होंने बताया कि ‘महात्माना पयाना’ का कॉन्सेप्ट और डिजाइन दिल्ली स्थित नेशनल गांधी म्यूजियम के निदेशक डॉ. ए. अन्नामलाई ने तैयार किया है। म्यूजियम को इस तरह विकसित किया गया है कि यहां आने वाले लोग महात्मा गांधी के जीवन को केवल तस्वीरों और लिखित सामग्री के जरिए ही नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यमों के जरिए भी समझ और देख सकें।

म्यूजियम की सबसे खास विशेषता इसका डिजिटल स्वरूप है। इसमें गांधीजी के जीवन से जुड़े विभिन्न चरणों को तकनीक की मदद से प्रस्तुत किया गया है। बचपन, शिक्षा, दक्षिण अफ्रीका का दौर, भारत वापसी, स्वतंत्रता आंदोलन, सत्याग्रह, सामाजिक सुधार और जीवन के अंतिम दिनों तक की प्रमुख घटनाओं को क्रमवार तरीके से प्रदर्शित किया गया है।

म्यूजियम में ऐतिहासिक तस्वीरों और दस्तावेजों को विशेष महत्व दिया गया है। इन सामग्रियों के जरिए दर्शकों को गांधीजी के जीवन के उन महत्वपूर्ण पड़ावों की जानकारी मिल सकेगी, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व और विचारों को आकार दिया। म्यूजियम में उपलब्ध सामग्री को डिजिटल तकनीक से जोड़कर इसे अधिक इंटरैक्टिव बनाने का प्रयास किया गया है।

QR कोड सुविधा इस म्यूजियम का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा है। दर्शक किसी तस्वीर, दस्तावेज या प्रदर्शित सामग्री के साथ दिए गए QR कोड को स्कैन करके उससे संबंधित अतिरिक्त जानकारी डिजिटल माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। इससे म्यूजियम में मौजूद ऐतिहासिक सामग्री को समझना आसान होगा और दर्शकों को एक जगह पर अधिक जानकारी मिल सकेगी।

गांधी भवन के अध्यक्ष वुडे पी. कृष्णा के अनुसार, म्यूजियम का उद्देश्य महात्मा गांधी के जीवन को नई पीढ़ी तक आधुनिक माध्यम से पहुंचाना है। आज के दौर में डिजिटल तकनीक लोगों के सीखने और जानकारी हासिल करने का बड़ा माध्यम बन चुकी है। ऐसे में गांधीजी के जीवन और उनके विचारों को डिजिटल रूप में प्रस्तुत करने से युवा वर्ग के साथ-साथ स्कूली बच्चों और अन्य दर्शकों को भी इतिहास से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

‘महात्माना पयाना’ नाम का अर्थ महात्मा गांधी की जीवन यात्रा से जुड़ा है। म्यूजियम का पूरा ढांचा भी इसी अवधारणा पर आधारित है। दर्शकों को गांधीजी के जीवन की एक यात्रा के रूप में अलग-अलग पड़ावों से परिचित कराया जाएगा। इससे उनके व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ उनके सार्वजनिक और राष्ट्रीय योगदान को भी समझने में मदद मिलेगी।

म्यूजियम में गांधीजी के जीवन के विभिन्न चरणों को तस्वीरों और दस्तावेजों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। इसमें उनके बचपन से जुड़े रिकॉर्ड, सार्वजनिक जीवन के महत्वपूर्ण क्षण, आंदोलन और यात्राएं तथा उनके जीवन के अंतिम समय से संबंधित सामग्री को शामिल किया गया है। इससे दर्शकों को महात्मा गांधी के जीवन की व्यापक तस्वीर देखने को मिल सकेगी।

म्यूजियम की तैयारी में तकनीकी पक्ष के साथ सामग्री के चयन पर भी ध्यान दिया गया है। नेशनल गांधी म्यूजियम से जुड़े विशेषज्ञ के कॉन्सेप्ट और डिजाइन के आधार पर इसे तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसा डिजिटल अनुभव तैयार करना है जिसमें इतिहास और तकनीक दोनों एक साथ दिखाई दें।

गांधी जयंती के दिन इसका उद्घाटन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2 अक्टूबर को देशभर में महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाती है। इस दिन विभिन्न स्थानों पर उनके जीवन, विचारों और योगदान को याद किया जाता है। ऐसे अवसर पर डिजिटल म्यूजियम की शुरुआत गांधीजी की विरासत को आधुनिक तरीके से प्रस्तुत करने की पहल के रूप में देखी जा रही है।

आयोजकों का मानना है कि आने वाले समय में यह म्यूजियम विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, पर्यटकों और गांधीजी के जीवन में रुचि रखने वाले लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। डिजिटल सामग्री होने के कारण दर्शकों को किसी घटना या दस्तावेज के बारे में अतिरिक्त जानकारी सीधे अपने मोबाइल फोन से हासिल करने की सुविधा मिलेगी।

QR कोड आधारित व्यवस्था का एक फायदा यह भी है कि म्यूजियम की सामग्री को समय के साथ डिजिटल रूप से विस्तार दिया जा सकता है। नई जानकारी, दस्तावेज या अतिरिक्त सामग्री को भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा सकता है। इससे म्यूजियम को स्थिर प्रदर्शनी के बजाय विकसित होने वाले डिजिटल अनुभव के रूप में बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा, स्वदेशी, स्वच्छता और सामाजिक सद्भाव जैसे विचारों को अपने सार्वजनिक जीवन में प्रमुखता दी। उनके जीवन की घटनाएं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से गहराई से जुड़ी हैं। ऐसे में उनके जीवन को एक ही स्थान पर अलग-अलग डिजिटल माध्यमों से प्रस्तुत करना दर्शकों के लिए एक अलग अनुभव हो सकता है।

म्यूजियम के जरिए गांधीजी के जीवन को केवल इतिहास के एक अध्याय के रूप में नहीं, बल्कि घटनाओं और विचारों की पूरी यात्रा के रूप में दिखाने की कोशिश की गई है। तस्वीरों और दस्तावेजों के साथ डिजिटल जानकारी जोड़ने से दर्शकों को घटनाओं का संदर्भ समझने में सहायता मिल सकती है।

शुक्रवार को गांधी भवन में होने वाला उद्घाटन कार्यक्रम गांधी जयंती समारोह का भी हिस्सा होगा। इस मौके पर म्यूजियम को आम दर्शकों के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है। आयोजकों को उम्मीद है कि डिजिटल स्वरूप के कारण लोगों की इसमें विशेष रुचि रहेगी।

राज्य के पहले डिजिटल गांधी म्यूजियम के रूप में ‘महात्माना पयाना’ का उद्देश्य इतिहास को तकनीक से जोड़ना और महात्मा गांधी के जीवन की जानकारी को ज्यादा सरल तथा आकर्षक तरीके से लोगों तक पहुंचाना है। बचपन से अंतिम दिनों तक की यात्रा, तस्वीरें, दस्तावेज और QR कोड आधारित जानकारी इस म्यूजियम को पारंपरिक संग्रहालयों से अलग अनुभव देने की कोशिश करती है।

गांधी जयंती के मौके पर शुरू हो रहा यह डिजिटल म्यूजियम आने वाली पीढ़ियों को महात्मा गांधी के जीवन से परिचित कराने की एक नई पहल है। उद्घाटन के बाद यहां आने वाले दर्शक डिजिटल माध्यम से गांधीजी के जीवन के अलग-अलग पड़ावों को देख और उनके बारे में विस्तृत जानकारी हासिल कर सकेंगे।

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