कर्नाटक

वरदा-बेदथी परियोजना की DPR जल्द भेजने की मांग

Kavita2
2 Oct 2026 12:41 PM IST
वरदा-बेदथी परियोजना की DPR जल्द भेजने की मांग
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बेंगलुरु। कर्नाटक में सूखे और पेयजल संकट की आशंका के बीच वरदा-बेदथी नदी जोड़ो परियोजना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद बसवराज बोम्मई ने राज्य सरकार से तत्काल कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और जल संसाधन मंत्री एन. चालुवरायस्वामी से कहा है कि परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR जल्द से जल्द तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी जाए। बोम्मई ने इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा के लिए हावेरी जिले से जुड़े सभी मंत्रियों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और प्रमुख कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाने की भी मांग की है।

बसवराज बोम्मई के अनुसार, वरदा-बेदथी नदी जोड़ो परियोजना का मुद्दा केवल किसी एक क्षेत्र से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि जल संकट से जूझ रहे लोगों के लिए इसका व्यापक महत्व है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि परियोजना को लेकर लंबे समय से चल रही प्रक्रिया में अब तेजी लाई जाए और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर DPR को अंतिम रूप दिया जाए। इसके बाद रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजकर परियोजना के अगले चरण पर बातचीत शुरू की जानी चाहिए।

सांसद ने मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री को लिखे पत्र में राज्य में मौजूदा जल संकट की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक इस समय भीषण सूखे की स्थिति से गुजर रहा है और इसका असर आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। कई इलाकों में पेयजल को लेकर चिंता बढ़ रही है। आने वाले दिनों में यदि स्थिति और गंभीर होती है तो लोगों के सामने पीने के पानी के साथ-साथ मवेशियों के लिए पानी और चारे की समस्या भी खड़ी हो सकती है।

बोम्मई ने अपने पत्र में किसानों की परेशानियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बारिश पर निर्भर रहने वाले किसान लगातार कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। पर्याप्त वर्षा नहीं होने की स्थिति में सिंचाई की सुविधा नहीं मिलने से फसलों पर असर पड़ता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में दीर्घकालिक जल प्रबंधन और नदी जोड़ने जैसी परियोजनाओं पर ठोस निर्णय लेने की जरूरत है।

वरदा-बेदथी नदी जोड़ो परियोजना को कर्नाटक के सूखाग्रस्त और पानी की कमी वाले क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। परियोजना के समर्थकों का तर्क है कि नदी के अतिरिक्त जल को जरूरत वाले इलाकों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित होने से पेयजल और सिंचाई की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता, पर्यावरणीय प्रभाव, पानी की उपलब्धता और वित्तीय पहलुओं का मूल्यांकन विस्तृत रिपोर्ट के जरिए किया जाना जरूरी है।

बसवराज बोम्मई ने कहा है कि DPR तैयार करने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक परियोजना से जुड़े सभी तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं को विशेषज्ञों की मदद से जल्द पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से यह भी आग्रह किया कि हावेरी जिले के निर्वाचित प्रतिनिधियों और प्रमुख नेताओं को साथ लेकर परियोजना पर सामूहिक चर्चा की जाए, ताकि स्थानीय समस्याओं और अपेक्षाओं को भी प्रक्रिया में शामिल किया जा सके।

उन्होंने बेंगलुरु में एक विशेष बैठक बुलाने का सुझाव दिया है। इस बैठक में हावेरी जिले के सभी मंत्रियों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और अन्य प्रमुख कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाए। बोम्मई का कहना है कि इस तरह की बैठक से परियोजना को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर एक साझा दृष्टिकोण तैयार किया जा सकता है और राज्य सरकार के सामने स्थानीय समस्याओं को स्पष्ट रूप से रखा जा सकता है।

सांसद ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और जल संसाधन मंत्री एन. चालुवरायस्वामी से स्पष्ट निर्णय लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार को वर्तमान जल संकट की गंभीरता को देखते हुए केवल तत्काल राहत उपायों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्थायी समाधान पर भी काम करना चाहिए।

सूखे की स्थिति का सबसे सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ता है। जिन इलाकों में खेती मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर है, वहां कम वर्षा होने से किसानों की आय प्रभावित होती है। इसके अलावा गांवों में पेयजल स्रोतों पर दबाव बढ़ जाता है। तालाब, कुएं और दूसरे स्थानीय जलस्रोत सूखने लगें तो लोगों और पशुओं के लिए पानी की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन जाती है। बोम्मई ने अपने पत्र में इसी संभावित स्थिति को लेकर चिंता जताई है।

वरदा-बेदथी परियोजना के संदर्भ में DPR एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होगा। इसमें परियोजना की लागत, जल उपलब्धता, निर्माण कार्य, जल हस्तांतरण की व्यवस्था, संभावित लाभ, पर्यावरणीय प्रभाव और दूसरे तकनीकी पहलुओं का विस्तृत विवरण शामिल होगा। केंद्र सरकार के समक्ष परियोजना को रखने के लिए ऐसी रिपोर्ट का तैयार होना आवश्यक होगा।

बोम्मई की मांग ऐसे समय सामने आई है जब कर्नाटक के कई हिस्सों में जल प्रबंधन और सूखे से निपटने को लेकर चर्चा तेज है। राज्य में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए पेयजल, सिंचाई और मवेशियों के लिए पानी उपलब्ध कराने की योजनाओं पर काम किया जाता रहा है। ऐसे में नदी जोड़ो परियोजना को दीर्घकालिक समाधान के एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय के साथ-साथ तकनीकी मंजूरियों और वित्तीय व्यवस्था की भी जरूरत होगी। इसके अलावा नदी के पानी के उपयोग और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं का आकलन भी जरूरी रहेगा। DPR के आधार पर ही इन सभी मुद्दों पर विस्तृत निर्णय लिया जा सकेगा।

बसवराज बोम्मई ने जोर दिया है कि मौजूदा संकट को देखते हुए सरकार को स्पष्ट और समयबद्ध निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जल संकट को लेकर अभी से ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

फिलहाल उनकी मांग का केंद्र वरदा-बेदथी नदी जोड़ो परियोजना की DPR को जल्द पूरा करना और केंद्र सरकार के समक्ष भेजना है। साथ ही हावेरी जिले के जनप्रतिनिधियों की बैठक बुलाकर परियोजना पर विस्तृत चर्चा करने की अपील की गई है। अब नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर रहेगी कि परियोजना की DPR तैयार करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

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