बेंगलुरु/नई दिल्ली। कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु बैलेंसिंग डैम परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कर्नाटक सरकार ने अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। राज्य सरकार परियोजना से जुड़ी आवश्यक कानूनी और तकनीकी मंजूरियां हासिल करने की दिशा में केंद्र के स्तर पर लगातार संपर्क कर रही है। इसी क्रम में बुधवार को राज्य के जल संसाधन मंत्री एन. चालुवरयास्वामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल आयोग (CWC) के चेयरमैन अनुपम प्रसाद से मुलाकात कर परियोजना से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक का मुख्य केंद्र मेकेदातु परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), इससे जुड़े तकनीकी पहलू और आवश्यक मंजूरियां रहीं। मंत्री ने केंद्रीय जल आयोग से परियोजना की तकनीकी समीक्षा प्रक्रिया जल्द पूरी करने और आगे की प्रक्रिया में आवश्यक तकनीकी सहयोग देने का अनुरोध किया।
मंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, बैठक के दौरान कर्नाटक सरकार की तरफ से सौंपी गई विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट पर भी चर्चा की गई। यह रिपोर्ट मेकेदातु परियोजना की DPR पर CWC की ओर से पहले उठाई गई आपत्तियों और तकनीकी सवालों के जवाब में तैयार की गई है।
कर्नाटक सरकार का कहना है कि केंद्रीय जल आयोग की ओर से उठाए गए विभिन्न तकनीकी बिंदुओं पर आवश्यक जवाब और विवरण अनुपालन रिपोर्ट में उपलब्ध कराए गए हैं। अब राज्य सरकार चाहती है कि आयोग इन दस्तावेजों का जल्द परीक्षण करे, ताकि परियोजना की आगे की मंजूरी प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
मेकेदातु परियोजना लंबे समय से कर्नाटक की प्रमुख जल परियोजनाओं में शामिल रही है। राज्य सरकार इसे पेयजल और जल प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताती रही है। हालांकि कावेरी नदी से जुड़े अंतरराज्यीय जल विवाद और विभिन्न तकनीकी तथा कानूनी प्रक्रियाओं के कारण यह परियोजना लंबे समय से चर्चा और विवाद का विषय बनी हुई है।
बुधवार को हुई बैठक में परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी कानूनी और तकनीकी मंजूरियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कर्नाटक सरकार ने आयोग के सामने परियोजना से संबंधित अपना पक्ष रखा और पहले उठाए गए सवालों पर की गई कार्रवाई की जानकारी दी।
जल संसाधन मंत्री चालुवरयास्वामी ने CWC अधिकारियों से अनुरोध किया कि अनुपालन रिपोर्ट की समीक्षा को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रक्रिया जल्द पूरी होने से परियोजना से जुड़े अगले चरणों की दिशा स्पष्ट हो सकेगी।
मेकेदातु बैलेंसिंग डैम परियोजना कावेरी नदी से जुड़ी होने के कारण राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील है। कर्नाटक और पड़ोसी तमिलनाडु के बीच कावेरी जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। ऐसे में मेकेदातु परियोजना से जुड़ी प्रत्येक प्रशासनिक और तकनीकी गतिविधि पर दोनों राज्यों की नजर रहती है।
कर्नाटक सरकार लगातार यह पक्ष रखती रही है कि परियोजना राज्य की जरूरतों को देखते हुए महत्वपूर्ण है। इसके जरिए जल भंडारण और बेंगलुरु सहित संबंधित क्षेत्रों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की बात कही जाती रही है। वहीं परियोजना को लेकर पड़ोसी राज्य की आपत्तियां भी सामने आती रही हैं।
यही कारण है कि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए केवल राज्य स्तर का निर्णय पर्याप्त नहीं है। इससे जुड़ी केंद्रीय संस्थाओं की तकनीकी समीक्षा और आवश्यक वैधानिक मंजूरियां भी महत्वपूर्ण हैं। केंद्रीय जल आयोग की भूमिका इसी संदर्भ में अहम मानी जा रही है।
DPR किसी बड़ी जल परियोजना की तकनीकी, वित्तीय और संरचनात्मक योजना का महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। इसमें बांध की क्षमता, डिजाइन, जल उपलब्धता, निर्माण से जुड़े पहलुओं और परियोजना के संभावित प्रभावों सहित कई बिंदुओं का विवरण होता है। इसी दस्तावेज की समीक्षा के दौरान CWC ने पहले कुछ तकनीकी मुद्दे और आपत्तियां उठाई थीं।
कर्नाटक सरकार की अनुपालन रिपोर्ट में इन्हीं बिंदुओं पर विस्तृत जवाब दिए जाने की बात कही गई है। अब सरकार की कोशिश है कि आयोग इन जवाबों पर विचार कर तकनीकी समीक्षा की प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ाए।
बैठक को राज्य सरकार की ओर से मेकेदातु परियोजना को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। जल संसाधन मंत्री का सीधे CWC चेयरमैन से मिलना यह संकेत देता है कि कर्नाटक सरकार इस परियोजना को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाना चाहती है।
राज्य सरकार के लिए मेकेदातु केवल एक जल परियोजना नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। राज्य में विभिन्न राजनीतिक दल समय-समय पर इस परियोजना को जल्द लागू करने की मांग करते रहे हैं। इसके कारण केंद्र से जरूरी मंजूरियां हासिल करने का मुद्दा भी राज्य की राजनीति में उठता रहा है।
अब केंद्रीय जल आयोग द्वारा कर्नाटक की अनुपालन रिपोर्ट पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर नजर रहेगी। यदि तकनीकी समीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो परियोजना को लेकर अगले चरण की कार्रवाई का रास्ता स्पष्ट हो सकता है। वहीं यदि आयोग की ओर से अतिरिक्त जानकारी या स्पष्टीकरण मांगा जाता है तो राज्य सरकार को उन बिंदुओं पर भी जवाब देना होगा।
कर्नाटक सरकार ने फिलहाल CWC से तकनीकी सहयोग मांगा है। मंत्री चालुवरयास्वामी ने अधिकारियों से कहा कि परियोजना से संबंधित समीक्षा जल्द पूरी की जाए, ताकि लंबित प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
मेकेदातु परियोजना की संवेदनशीलता को देखते हुए तकनीकी मंजूरी के साथ कानूनी पहलुओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। कावेरी जल से संबंधित मौजूदा व्यवस्थाओं और अंतरराज्यीय हितों को ध्यान में रखते हुए परियोजना की प्रत्येक प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रखी जाएगी।
फिलहाल नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद मेकेदातु परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। कर्नाटक सरकार ने केंद्रीय जल आयोग के सामने अपनी अनुपालन रिपोर्ट और तकनीकी पक्ष रखते हुए समीक्षा जल्द पूरी करने की मांग की है। अब CWC की आगे की कार्रवाई से तय होगा कि लंबे समय से लंबित इस महत्वाकांक्षी परियोजना की मंजूरी प्रक्रिया किस गति से आगे बढ़ती है।