बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय द्वारा जारी किए गए डेटा से पता चला है कि चल रही 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाने (deletions) की संख्या में अंतर है। यह अंतर कर्नाटक में वोटर लिस्ट से हटाए गए लगभग 6,000 वोटरों का है।
शनिवार को जारी SIR-2026 की अंतिम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से पता चला कि चुनाव अधिकारियों को 16 जून से 23 अगस्त 2026 के बीच वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए 67,307 'फॉर्म-7' मिले थे। हालांकि, 25 सितंबर 2026 को कर्नाटक CEO कार्यालय द्वारा जारी डेटा में बताया गया कि नाम हटाने के लिए 61,130 'फॉर्म-7' मिले और उन पर कार्रवाई की गई।
'फॉर्म-7' आवेदकों की संख्या में इस अंतर ने चुनाव अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। उन्होंने गलती मानी और कहा कि नाम हटाने के आवेदनों को खारिज करने का प्रावधान बहुत कम इस्तेमाल हुआ। इस संख्या के अंतर की विस्तार से जांच कर्नाटक CEO और भारत निर्वाचन आयोग के सर्वर के डेटा से की जानी चाहिए।
चुनाव अधिकारियों को 6 जून से 24 सितंबर 2026 के बीच कुल 19,48,164 फॉर्म मिले। इनमें से 7,70,988 फॉर्म-6 (नाम शामिल करने के लिए), 4,551 फॉर्म-6A (NRI वोटरों द्वारा नाम शामिल करने के लिए) और 11,11,495 फॉर्म-8 (सुधार के लिए) थे। 25 सितंबर को जारी डेटा से यह भी पता चला कि सबसे ज़्यादा नाम बिदर निर्वाचन क्षेत्र से हटाए गए (5,154), इसके बाद शिवमोगा (3,181), तुमकुरु (3,171) और बैंगलोर अर्बन (2,318) का नंबर रहा। लेकिन ड्राफ़्ट रोल के अनुसार, 16 जून से 23 अगस्त, 2026 के बीच चुनाव अधिकारियों को 14,67,929 फ़ॉर्म मिले थे।