बेंगलुरु। कर्नाटक में प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT), जिसे बिदादी टाउनशिप परियोजना भी कहा जा रहा है, के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। बैरामंगला क्षेत्र में किसानों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी और बिदादी-हारोहल्ली मुख्य सड़क पर प्रदर्शन किया। शुक्रवार को सड़क से प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। पुलिस ने 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिनमें कई महिलाएं भी शामिल थीं।

पुलिस कार्रवाई के दौरान प्रदर्शन स्थल पर तनाव बढ़ गया। सामने आए वीडियो में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खींचतान दिखाई दी। इसी दौरान एक महिला प्रदर्शनकारी बेहोश होकर जमीन पर गिर गई, जिसके बाद मौके पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई। इस घटना को लेकर विपक्षी जनता दल (सेक्युलर) ने राज्य सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए।

किसान बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए प्रस्तावित कृषि भूमि अधिग्रहण का लंबे समय से विरोध कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी जमीन आजीविका का मुख्य साधन है और वे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया वापस लेने की मांग कर रहे हैं। सोमवार से किसानों ने अपने आंदोलन को और तेज करते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। किसानों ने ट्रैक्टर और बैलगाड़ियां सड़क पर खड़ी कर बिदादी-हारोहल्ली मुख्य मार्ग को भी बाधित किया था।

प्रदर्शन के शुरुआती दिनों में भी आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच विवाद सामने आया था। किसान सड़क पर पंडाल लगाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने यातायात बाधित होने का हवाला देते हुए इसकी अनुमति नहीं दी। पुलिस का कहना था कि किसानों को दूसरी जगह पंडाल लगाने के लिए कहा गया था और कार्रवाई का उद्देश्य मुख्य सड़क पर यातायात व्यवस्था बनाए रखना था।

इसके बाद किसानों ने साड़ियों और ग्रीनहाउस नेट का इस्तेमाल कर धूप से बचने की व्यवस्था की और अपना प्रदर्शन जारी रखा। भूख हड़ताल के दौरान तीन किसानों की तबीयत बिगड़ने की भी खबर सामने आई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखा।

शुक्रवार को स्थिति उस समय फिर तनावपूर्ण हो गई, जब पुलिस ने बिदादी-हारोहल्ली सड़क पर मौजूद प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई की। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, किसान कई दिनों से सड़क पर भूख हड़ताल और रास्ता रोककर प्रदर्शन कर रहे थे। अधिकारियों की ओर से रास्ता खाली करने की अपील के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू किया। इसी दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद जनता दल (सेक्युलर) ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। पार्टी ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे किसानों और महिलाओं की आवाज दबाने की कोशिश की गई। JDS ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और मंत्री एच.सी. बालकृष्ण पर भी निशाना साधा। पार्टी ने अपने बयान में सरकार के लिए बेहद तीखी राजनीतिक भाषा का इस्तेमाल करते हुए पुलिस कार्रवाई के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की।

JDS ने महिला प्रदर्शनकारी के बेहोश होकर गिरने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि इस स्थिति के लिए कौन जिम्मेदार है। ये आरोप विपक्षी दल की राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं; पुलिस कार्रवाई के उद्देश्य को लेकर दूसरी ओर अधिकारियों का कहना रहा है कि मुख्य सड़क पर यातायात सामान्य बनाए रखना आवश्यक था। इससे पहले भी पुलिस ने कहा था कि प्रदर्शन पर रोक नहीं लगाई गई, बल्कि सड़क पर यातायात बाधित करने वाली व्यवस्थाओं को रोकने का प्रयास किया गया।

बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर किसानों और राज्य सरकार के बीच विवाद नया नहीं है। प्रभावित क्षेत्रों के किसान लंबे समय से भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। जून 2026 में सरकार ने तीन गांवों में 518 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना जारी की थी। यह बड़े प्रस्तावित टाउनशिप प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण का हिस्सा बताया गया था।

प्रभावित किसानों का कहना है कि इन क्षेत्रों में आज भी खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों के जरिए बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका चलती है। जमीन मालिकों के अलावा खेतिहर मजदूर, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जुड़े परिवार भी कृषि अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं। सरकार की ओर से परियोजना को बेंगलुरु के भविष्य के शहरी विस्तार और बढ़ती आबादी की जरूरतों से जोड़कर पेश किया गया है।

भूमि अधिग्रहण को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों के दावों में मतभेद भी रहे हैं। इससे पहले डीके शिवकुमार ने कहा था कि किसानों से जबरन जमीन नहीं ली जाएगी। दूसरी ओर प्रदर्शनकारी किसान भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पूरी तरह रोकने की मांग पर कायम हैं।

किसानों ने सरकार की ओर से परियोजना की समीक्षा के लिए बनाई गई उच्चस्तरीय समिति से भी प्रभावित गांवों में आकर सीधे लोगों की शिकायतें सुनने की मांग की है। आंदोलनकारियों का कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर पर सुनवाई होनी चाहिए, जिससे किसान, खेतिहर मजदूर, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक अपनी बात समिति के सामने रख सकें।

बिदादी परियोजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार तेज हो रही है। JDS और भाजपा के नेताओं ने किसानों के आंदोलन का समर्थन किया है, जबकि राज्य सरकार परियोजना और भूमि अधिग्रहण को लेकर अपना पक्ष रखती रही है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री और JDS नेता एच.डी. कुमारस्वामी ने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की आलोचना की थी।

फिलहाल बैरामंगला में शुक्रवार की पुलिस कार्रवाई और महिला प्रदर्शनकारी के बेहोश होने की घटना ने विवाद को और बढ़ा दिया है। एक तरफ किसान अपनी जमीन बचाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन के सामने मुख्य सड़क पर यातायात बहाल रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। भूमि अधिग्रहण और परियोजना के भविष्य को लेकर सरकार तथा किसानों के बीच सहमति बनती है या आंदोलन आगे और तेज होता है, इस पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।

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