बेंगलुरु। यूनाइटेड किंगडम (UK) ने हर्षाबीर संघा को कर्नाटक में नया ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर नियुक्त करने की आधिकारिक घोषणा की है। इस जिम्मेदारी के साथ संघा कर्नाटक और ब्रिटेन के बीच व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और जलवायु परिवर्तन सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। वह दक्षिण एशिया में निवेश के लिए UK के डिप्टी ट्रेड कमिश्नर की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभालेंगे।

नई भूमिका में हर्षाबीर संघा कर्नाटक में ब्रिटेन के साथ होने वाले सभी प्रमुख संपर्क और सहयोग से जुड़े मामलों के लिए जिम्मेदार होंगे। बेंगलुरु भारत के सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी और स्टार्टअप केंद्रों में शामिल है। ऐसे में उनकी नियुक्ति के दौरान तकनीक, इनोवेशन, निवेश और व्यापार से जुड़े संबंधों को विशेष महत्व मिलने की उम्मीद है।

उनकी जिम्मेदारियों में कर्नाटक और UK के बीच व्यापारिक एवं वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करना प्रमुख रूप से शामिल है। दोनों पक्षों के कारोबार और कंपनियों के बीच संपर्क बढ़ाने के साथ निवेश के नए अवसर तलाशने पर भी काम किया जाएगा। कर्नाटक में मौजूद तकनीकी कंपनियों, स्टार्टअप, शोध संस्थानों और अन्य उद्योगों के साथ ब्रिटिश संस्थानों और कंपनियों के सहयोग को बढ़ावा देना भी उनकी भूमिका का हिस्सा होगा।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी का क्षेत्र इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण आधार रहेगा। बेंगलुरु देश के प्रमुख टेक्नोलॉजी हब के रूप में जाना जाता है। यहां आईटी, एयरोस्पेस, अंतरिक्ष, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी और डीप टेक जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कंपनियां और संस्थान काम कर रहे हैं। ऐसे में ब्रिटेन और कर्नाटक के बीच तकनीकी सहयोग के लिए कई संभावनाएं मौजूद हैं।

हर्षाबीर संघा की पिछली पेशेवर भूमिका भी तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी रही है। भारत में पद संभालने से पहले वह UK स्पेस एजेंसी में सैटेलाइट कम्युनिकेशन और PNT यानी पोजीशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग के डिप्टी डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थे। इस भूमिका में उनका काम अंतरिक्ष और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकों के क्षेत्र में रहा।

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का बेंगलुरु से भी गहरा संबंध है। शहर में भारत के अंतरिक्ष और एयरोस्पेस क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण संस्थान और निजी कंपनियां मौजूद हैं। संघा का स्पेस सेक्टर में अनुभव इस क्षेत्र में दोनों देशों के संस्थानों के बीच सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने में उपयोगी हो सकता है।

शिक्षा भी उनकी नई जिम्मेदारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। कर्नाटक में बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय, उच्च शिक्षण संस्थान और शोध केंद्र मौजूद हैं। ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों और कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों के बीच अकादमिक सहयोग, शोध और नवाचार के अवसरों को बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

इसके अलावा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विभिन्न भागीदारों के साथ सहयोग बढ़ाना भी संघा की जिम्मेदारियों में शामिल है। तेजी से बढ़ते शहरों में ऊर्जा, परिवहन, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ शहरी विकास जैसे विषय जलवायु नीति के महत्वपूर्ण हिस्से बन चुके हैं। इस क्षेत्र में सरकार, उद्योग और अन्य संस्थाओं के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की भूमिका ब्रिटिश डिप्टी हाई कमीशन निभा सकता है।

हर्षाबीर संघा दक्षिण एशिया में निवेश के लिए UK के डिप्टी ट्रेड कमिश्नर के तौर पर भी काम करेंगे। इस भूमिका में उनका दायरा केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं रहेगा। उन्हें भारत सहित दक्षिण एशिया के अन्य देशों से ब्रिटेन में निवेश को प्रोत्साहित करने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

आधिकारिक बयान के मुताबिक इस भूमिका में उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में UK को फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के लिए पसंदीदा गंतव्य के रूप में मजबूत करना शामिल होगा। भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों की कंपनियों तथा निवेशकों को ब्रिटेन में मौजूद अवसरों से जोड़ने और वहां निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में वह काम करेंगे।

भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक संबंधों में निवेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारतीय कंपनियों की ब्रिटेन में मौजूदगी के साथ ब्रिटिश कंपनियां भी भारत के विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार कर रही हैं। कर्नाटक, विशेष रूप से बेंगलुरु, वैश्विक कंपनियों के लिए भारत के प्रमुख निवेश केंद्रों में शामिल है। आईटी और टेक्नोलॉजी से लेकर एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोटेक और स्टार्टअप सेक्टर तक यहां व्यापक कारोबारी गतिविधियां हैं।

ऐसे में डिप्टी हाई कमिश्नर के रूप में संघा की भूमिका सरकारी संपर्क तक सीमित नहीं होगी। उद्योग जगत, निवेशकों, शिक्षण संस्थानों, शोध संगठनों और तकनीकी कंपनियों के साथ संवाद भी उनकी जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।

बेंगलुरु में स्थित ब्रिटिश डिप्टी हाई कमीशन दक्षिण भारत में UK के राजनयिक और आर्थिक संपर्क के महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक है। कर्नाटक सरकार और स्थानीय संस्थानों के साथ संपर्क बनाए रखने के साथ यह कार्यालय व्यापार और निवेश संबंधों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाता है।

हर्षाबीर संघा का तकनीकी पृष्ठभूमि से आना उनकी नई जिम्मेदारी को खास बनाता है। UK स्पेस एजेंसी में सैटेलाइट कम्युनिकेशन और पोजीशनिंग, नेविगेशन तथा टाइमिंग जैसे क्षेत्रों में काम करने के बाद अब उन्हें भारत के प्रमुख टेक्नोलॉजी केंद्रों में से एक में ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी मिली है।

कर्नाटक में उनके कार्यकाल के दौरान विज्ञान, तकनीक और इनोवेशन के साथ शिक्षा और जलवायु सहयोग प्रमुख क्षेत्रों में शामिल रहेंगे। इसके समानांतर डिप्टी ट्रेड कमिश्नर के रूप में वह दक्षिण एशिया से ब्रिटेन में निवेश बढ़ाने की दिशा में भी काम करेंगे।

हर्षाबीर संघा की नियुक्ति के साथ UK ने कर्नाटक के साथ अपने बहुआयामी संबंधों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है। अब उनकी भूमिका कर्नाटक और ब्रिटेन के बीच मौजूदा सहयोग को मजबूत करने के साथ व्यापार, निवेश, तकनीक, शिक्षा और जलवायु क्षेत्र में नए अवसरों को विकसित करने पर केंद्रित रहेगी।

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