कर्नाटक में नंदिनी दूध हो सकता है महंगा, मिल्क यूनियनों ने कीमत बढ़ाने की रखी मांग
बेंगलुरु। कर्नाटक में नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य की दुग्ध सहकारी यूनियनों ने बढ़ती उत्पादन लागत, पशु चारे की महंगाई और डेयरी किसानों पर बढ़ते आर्थिक दबाव का हवाला देते हुए दूध के खरीद और बिक्री मूल्य में बढ़ोतरी की मांग की है। हालांकि अभी कीमत बढ़ाने पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक पहले 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी मांगी गई थी, लेकिन शुक्रवार को राज्य की 16 जिला दुग्ध सहकारी यूनियनों ने सरकार के सामने 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार इस प्रस्ताव पर फैसला कर सकते हैं।
बेंगलुरु मिल्क यूनियन लिमिटेड (BAMUL) के अध्यक्ष डी.के. सुरेश ने दूध उत्पादकों और सहकारी यूनियनों की आर्थिक स्थिति का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि पिछले छह-सात महीनों में डेयरी क्षेत्र पर आर्थिक दबाव काफी बढ़ा है। पशु चारा, दवाइयां, रखरखाव और दूसरे खर्च बढ़ने के कारण किसानों के लिए मौजूदा कीमत पर दूध उत्पादन करना मुश्किल होता जा रहा है।
दुग्ध सहकारी यूनियनों ने इससे पहले मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात कर नंदिनी दूध के खरीद और खुदरा मूल्य में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने तत्काल फैसला लेने के बजाय प्रतिनिधिमंडल से विस्तृत आंकड़े मांगे। इनमें पिछले दस वर्षों में पशु चारे की कीमतों में वृद्धि, एक लीटर दूध की उत्पादन लागत, दूध खरीद और प्रोसेसिंग का खर्च तथा पड़ोसी राज्यों में किसानों को मिल रही कीमत का तुलनात्मक विवरण शामिल है।
ताजा घटनाक्रम में यह मांग 5 रुपये प्रति लीटर तक आने की रिपोर्ट है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि उपभोक्ताओं के लिए दूध निश्चित रूप से 10 रुपये प्रति लीटर महंगा होने जा रहा है। सरकार के स्तर पर प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है और अंतिम बढ़ोतरी कितनी होगी, इसका फैसला अभी बाकी है।
डी.के. सुरेश ने डेयरी किसानों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि पशु चारे और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमत लगातार बढ़ी है। सूखे की स्थिति ने भी चारे की उपलब्धता को प्रभावित किया है। इसके अलावा पशुओं की चिकित्सा, डेयरी संचालन और दूसरे खर्च बढ़ने से दूध उत्पादन की लागत में इजाफा हुआ है। उनका कहना है कि किसानों को पर्याप्त मूल्य नहीं मिलने से सहकारी दुग्ध क्षेत्र पर दबाव बढ़ रहा है।
दुग्ध यूनियनों की दलील है कि कर्नाटक में किसानों को मिलने वाली दूध की खरीद कीमत आसपास के कई राज्यों की तुलना में कम है। डी.के. सुरेश के मुताबिक कर्नाटक में किसानों से करीब 35 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध खरीदा जा रहा है। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि आंध्र प्रदेश में यह दर करीब 41.50 रुपये, केरल में 41.80 रुपये, महाराष्ट्र में 41 रुपये और तमिलनाडु में 42.24 रुपये प्रति लीटर है।
इस अंतर को आधार बनाकर यूनियनें किसानों को मिलने वाली कीमत बढ़ाने की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि अगर दूध उत्पादन से किसानों को पर्याप्त आय नहीं मिलेगी तो इसका असर दुग्ध उत्पादन और सहकारी संस्थाओं की खरीद पर भी पड़ सकता है।
राज्य में सूखे और चारे की कमी का असर दूध की खरीद पर भी दिखाई दे रहा है। कर्नाटक मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अनुसार करीब तीन महीने पहले KMF प्रतिदिन लगभग 1.11 करोड़ लीटर दूध खरीद रहा था, जो घटकर करीब 1.03 करोड़ लीटर प्रतिदिन रह गया। एसोसिएशन ने इस गिरावट के पीछे चारे की उपलब्धता में कमी को एक प्रमुख कारण बताया है।
दूध उत्पादकों की मांग का मुद्दा कर्नाटक विधानसभा में भी उठा है। कांग्रेस के कुछ विधायकों ने किसानों को मिलने वाली दूध की कीमत बढ़ाने की मांग की, जबकि JDS विधायक एच.डी. रेवन्ना ने किसी भी संभावित मूल्य वृद्धि का बड़ा हिस्सा दुग्ध उत्पादक सहकारी यूनियनों को दिए जाने की मांग की। इस पर अलग-अलग नेताओं ने बढ़ती उत्पादन लागत का हवाला दिया है।
दूध की कीमत बढ़ाने का मामला सरकार के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा असर लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। एक तरफ डेयरी किसान और सहकारी यूनियनें उत्पादन लागत बढ़ने का हवाला देकर बेहतर कीमत मांग रही हैं, जबकि दूसरी तरफ खुदरा कीमत में बड़ी बढ़ोतरी घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल नंदिनी का ब्लू पैकेट टोंड दूध 46 रुपये प्रति लीटर, ग्रीन पैकेट 50 रुपये और ऑरेंज पैकेट 52 रुपये प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है। अगर प्रस्तावित बढ़ोतरी को मंजूरी मिलती है तो इनकी कीमतों में बदलाव हो सकता है। हालांकि अलग-अलग उत्पादों के लिए नई कीमतें तभी स्पष्ट होंगी जब सरकार और संबंधित संस्थाएं अंतिम निर्णय की घोषणा करेंगी।
नंदिनी ब्रांड के तहत दूध के अलावा दही, घी, मक्खन, पनीर और कई दूसरे डेयरी उत्पाद भी बेचे जाते हैं। दूध की खरीद और उत्पादन लागत में बदलाव का असर डेयरी उद्योग के दूसरे उत्पादों पर भी पड़ सकता है, लेकिन अभी सभी उत्पादों की कीमत बढ़ने के संबंध में कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
डी.के. सुरेश ने कहा है कि निजी डेयरियां किसानों से अधिक कीमत पर दूध खरीदने की कोशिश कर रही हैं, जिससे सहकारी यूनियनों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। यूनियनों का तर्क है कि किसानों को बेहतर खरीद मूल्य नहीं दिया गया तो वे निजी कंपनियों की ओर जा सकते हैं और इससे सहकारी व्यवस्था की दूध खरीद प्रभावित हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने पहले हुई बैठक में तुरंत मूल्य वृद्धि की घोषणा करने के बजाय उत्पादन लागत और दूसरे राज्यों की कीमतों का विस्तृत अध्ययन कराने का रास्ता चुना था। उन्होंने अधिकारियों से दूध उत्पादन, खरीद, बिक्री और लागत से जुड़े आंकड़े जुटाने को कहा था। इससे संकेत मिलता है कि सरकार किसानों की आय और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले संभावित बोझ दोनों को ध्यान में रखकर निर्णय करना चाहती है।
फिलहाल नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाने की मांग सरकार के विचाराधीन है। 8 से 10 रुपये प्रति लीटर की शुरुआती मांग के बाद ताजा प्रस्ताव 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी का बताया जा रहा है। इसलिए उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी किसी निश्चित बढ़ोतरी की घोषणा नहीं हुई है। मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के अंतिम फैसले के बाद ही साफ होगा कि नंदिनी दूध महंगा होगा या नहीं और अगर होगा तो कीमत में कितनी बढ़ोतरी की जाएगी।