बेंगलुरु: एक सफाई कर्मचारी महिला का वीडियो देखकर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार बहुत भावुक हो गए। वीडियो में महिला बता रही थी कि कैसे स्कूल में उसकी बेटी को बेइज्जत किया गया था। इस घटना से प्रभावित होकर, शुक्रवार को 'सफाई कर्मचारी दिवस' (पौराकर्मिका दिवस) के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शिवकुमार ने सफाई कर्मचारियों की यूनिफॉर्म पहनी और उनके साथ बैठकर खाना खाया।

उस घटना को याद करते हुए शिवकुमार ने बताया कि महिला सफाई कर्मचारी ने कहा था कि उसकी बेटी की क्लासमेट ने उससे कहा था, "तुम्हारी माँ कॉर्पोरेशन की यूनिफॉर्म पहनकर आई है। उससे बदबू आती है। दूर बैठो और मेरे पास मत आओ।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला को रोते हुए वह घटना बताते देखकर उन्हें बहुत दुख हुआ। इसी वजह से उन्होंने यूनिफॉर्म पहनी और उनके साथ खाना खाया ताकि यह संदेश दिया जा सके कि सब बराबर हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम सिर्फ दिखावे के लिए नहीं था, बल्कि सफाई कर्मचारियों से जुड़ी गलत सोच को खत्म करने और 'छुआछूत' वाली मानसिकता के खिलाफ संदेश देने के लिए था। उन्होंने सफाई कर्मचारियों को 'असली कर्मयोगी' और 'स्वच्छता क्रांति का नेता' कहा।

उन्होंने घोषणा की कि सरकार सफाई कर्मचारियों के लिए नाश्ते का भत्ता 35 रुपये से बढ़ाकर 70 रुपये करेगी। शिवकुमार ने यह भी घोषणा की कि कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने और उन्हें पूरा करने के लिए एक कैबिनेट सब-कमेटी बनाई जाएगी। उन्होंने सफाई कर्मचारियों के लिए 'पौरा भवन' बनाने और उनके बच्चों के लिए कर्नाटक पब्लिक स्कूल (KPS) की तर्ज पर रेजिडेंशियल स्कूल (आवासीय विद्यालय) शुरू करने की योजना की भी घोषणा की।

शहरी विकास मंत्री डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया ने कहा कि सरकार हर 700 लोगों पर एक सफाई कर्मचारी होने के मौजूदा नियम को बदलेगी और हर 500 लोगों पर एक कर्मचारी तैनात करने की दिशा में काम करेगी। उन्होंने आगे कहा कि पक्के (स्थायी) सफाई कर्मचारियों का विशेष भत्ता 7,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये किया जाएगा और सीधे भर्ती किए गए कर्मचारियों को 5,000 रुपये मिलेंगे।

 

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