बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने तेजी से बढ़ते बेंगलुरु की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। पूरे बेंगलुरु शहरी जिले को बेंगलुरु जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड (BWSSB) के अधिकार क्षेत्र में लाया गया है। ग्रेटर बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने शुक्रवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इस संबंध में 24 सितंबर को अधिसूचना जारी की गई। इस फैसले का उद्देश्य ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) की सीमा से बाहर तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में पेयजल और सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं की दीर्घकालिक योजना तैयार करना है।
अब तक BWSSB का दायरा मुख्य शहरी क्षेत्र, पूर्ववर्ती सात सिटी म्युनिसिपल काउंसिल, एक टाउन म्युनिसिपल काउंसिल और 110 गांवों सहित करीब 800 वर्ग किलोमीटर तक सीमित था। नई व्यवस्था के बाद इसका अधिकार क्षेत्र पूरे बेंगलुरु शहरी जिले तक बढ़ गया है। इसमें बेंगलुरु उत्तर, पूर्व, दक्षिण, येलहंका और अनेकल तालुक के क्षेत्र शामिल होंगे।
सरकार का मानना है कि बेंगलुरु का शहरीकरण अब GBA की मौजूदा सीमाओं से बाहर तेजी से फैल रहा है। आसपास की नगरपालिकाओं और ग्राम पंचायतों में आवासीय और व्यावसायिक विकास बढ़ रहा है। ऐसे में इन इलाकों में आबादी और आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से पानी, सीवरेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग भी आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगी।
इसी को ध्यान में रखते हुए मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने BWSSB, बैंगलोर मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (BMRDA) और लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में GBA की सीमा से बाहर स्थित क्षेत्रों में भविष्य की शहरी बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों पर चर्चा की गई। संबंधित एजेंसियों को विस्तृत योजनाएं तैयार कर सरकार के सामने रखने के निर्देश दिए गए हैं।
BWSSB को अगले पांच और दस वर्षों के साथ उससे आगे की अवधि के लिए पेयजल की संभावित मांग का आकलन करने को कहा गया है। इस अध्ययन में बढ़ती आबादी, नए आवासीय क्षेत्रों और भविष्य में होने वाले शहरी विस्तार को ध्यान में रखा जाएगा। इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि आने वाले वर्षों में किन क्षेत्रों में कितनी अतिरिक्त जल आपूर्ति की आवश्यकता होगी।
योजना केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें जल भंडारण क्षमता, जल उपचार संयंत्र और वितरण नेटवर्क जैसे महत्वपूर्ण ढांचे को भी शामिल किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि नए क्षेत्रों में आबादी बढ़ने के बाद पानी की समस्या पैदा होने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही आवश्यक बुनियादी ढांचे की योजना तैयार कर ली जाए।
इसी तरह भूमिगत सीवरेज नेटवर्क के लिए भी अलग खाका तैयार किया जाएगा। सीवेज नेटवर्क और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट विकसित करने की योजना चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। शहरी विस्तार के साथ आवश्यक सीवरेज सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरे क्षेत्र का संयुक्त मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा।
कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा कि पिछले वर्षों के अनुभव से यह सामने आया है कि कई क्षेत्रों में पहले शहरीकरण हुआ और उसके बाद बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने की कोशिश की गई। इससे सड़क, पेयजल, सीवरेज और अन्य सुविधाओं पर दबाव बढ़ा। सरकार अब GBA से बाहर तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में ऐसी स्थिति दोहराने से बचना चाहती है।
पानी की उपलब्धता इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंत्री के अनुसार GBA के बाहर तेजी से विकसित हो रहे इन क्षेत्रों की मौजूदा पानी की जरूरत का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भूजल से पूरा हो रहा है। भूजल पर इतनी अधिक निर्भरता से भूमिगत जलस्तर पर दबाव बढ़ रहा है।
इसी समस्या को देखते हुए सरकार भूजल स्तर सुधारने की दिशा में भी योजना बना रही है। लघु सिंचाई विभाग को बेंगलुरु में उपचारित अपशिष्ट जल का इस्तेमाल GBA की सीमा के आसपास स्थित झीलों को भरने के लिए करने की संभावनाओं पर योजना तैयार करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य सूख रही झीलों को पुनर्जीवित करने के साथ भूजल रिचार्ज में मदद करना है।
झीलों में उपचारित पानी पहुंचाने से भूजल स्तर सुधारने के अलावा जल संसाधनों के पुन: उपयोग को भी बढ़ावा मिल सकता है। सरकार का मानना है कि इससे खाली या सूखी झीलों पर अतिक्रमण के खतरे को कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल सकती है।
बेंगलुरु शहरी जिले में पानी की समस्या पहले से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। सितंबर में ही कृष्णा बायरे गौड़ा ने अधिकारियों को जिले में वर्षों से बंद पड़े एक हजार से अधिक बोरवेल की स्थिति की समीक्षा करने और जहां संभव हो वहां मौजूदा संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने ग्राम पंचायतों को पेयजल और स्थायी बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान देने को कहा था।
सरकार की नई योजना में तत्काल जरूरतों के साथ भविष्य की आबादी को भी ध्यान में रखा जा रहा है। तेजी से बनते आवासीय परिसर, नए व्यावसायिक क्षेत्र और आसपास की ग्राम पंचायतों का शहरी क्षेत्रों में बदलता स्वरूप आने वाले वर्षों में जल आपूर्ति पर बड़ा दबाव डाल सकता है।
नई अधिसूचना के बाद BWSSB की जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी। बोर्ड को नए क्षेत्रों के लिए पेयजल आपूर्ति की योजना बनाने के साथ सीवरेज व्यवस्था और उपचारित पानी के सुरक्षित प्रबंधन की दिशा में भी काम करना होगा। परियोजनाओं को शहरी विस्तार की गति के अनुसार चरणों में लागू करने की योजना है।
सरकार ने संबंधित एजेंसियों से विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार करने को कहा है। इन योजनाओं का अध्ययन करने के बाद परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर फैसला लिया जाएगा। इसमें पानी के स्रोत से लेकर भंडारण, ट्रीटमेंट और घरों तक वितरण तथा सीवेज संग्रह से लेकर उसके उपचार तक की पूरी व्यवस्था को एकीकृत रूप में विकसित करने पर जोर रहेगा।
पूरे बेंगलुरु शहरी जिले को BWSSB के अधिकार क्षेत्र में लाने का फैसला शहर के भविष्य के विस्तार को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि GBA की सीमा से बाहर विकसित हो रहे क्षेत्रों में आबादी तेजी से बढ़ने से पहले ही पानी और सीवरेज की बुनियादी व्यवस्था की योजना तैयार हो जाए। इसके लिए अब BWSSB, BMRDA और लघु सिंचाई विभाग को मिलकर दीर्घकालिक मास्टर प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।