धनबाद। बरवाअड्डा थाना परिसर में शुक्रवार की रात एक आरोपी की पैरवी को लेकर राजनीतिक विवाद उस समय गहरा गया, जब डुमरी विधायक जयराम महतो अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंच गए। विधायक के थाने पहुंचने की सूचना मिलने के बाद बड़ा पिछड़ी पंचायत की मुखिया यशोदा देवी के समर्थक भी वहां पहुंच गए। देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और तीखी बहस के बाद धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई।

मामला इतना बढ़ गया कि थाना प्रभारी के कक्ष में ही दोनों पक्षों के बीच कथित रूप से मारपीट होने की बात सामने आई। घटना के बाद थाना परिसर में काफी देर तक अफरातफरी का माहौल बना रहा। पुलिसकर्मियों ने किसी तरह दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति को नियंत्रित किया।

आरोपी की पैरवी को लेकर थाने पहुंचे विधायक

जानकारी के अनुसार, बरवाअड्डा थाना क्षेत्र से जुड़े एक मामले में पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में लिया था। इसी मामले में उसकी पैरवी करने के लिए डुमरी विधायक जयराम महतो अपने समर्थकों के साथ शुक्रवार रात थाना पहुंचे।

विधायक और उनके समर्थकों के थाने पहुंचने के बाद मामले को लेकर पुलिस अधिकारियों से बातचीत चल रही थी। इसी दौरान इसकी सूचना बड़ा पिछड़ी पंचायत की मुखिया यशोदा देवी के समर्थकों को मिली। इसके बाद मुखिया पक्ष के लोग भी थाना परिसर में पहुंच गए।

दोनों पक्षों के एक ही स्थान पर पहुंचने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। शुरुआत में दोनों तरफ से बातचीत और बहस हुई, लेकिन कुछ ही देर में विवाद ने उग्र रूप ले लिया।

तीखी बहस के बाद धक्का-मुक्की

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई। आरोप-प्रत्यारोप के बीच मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे के सामने आ गए।

इसके बाद धक्का-मुक्की होने लगी। थाना परिसर में मौजूद पुलिसकर्मियों ने दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी।

विवाद के दौरान थाना प्रभारी के कक्ष में भी दोनों पक्षों के बीच कथित रूप से मारपीट होने की बात सामने आई है। इससे पुलिस अधिकारियों के सामने स्थिति को संभालने की चुनौती खड़ी हो गई।

थाना परिसर में मची अफरातफरी

मारपीट की सूचना के बाद थाना परिसर में मौजूद पुलिसकर्मी सक्रिय हो गए। पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग-अलग किया और स्थिति को नियंत्रण में लेने का प्रयास किया।

घटना के कारण थाने में काफी देर तक अफरातफरी की स्थिति बनी रही। आसपास के लोगों और अन्य समर्थकों की भीड़ जुटने से तनाव और बढ़ गया।

पुलिस ने दोनों पक्षों के लोगों को शांत कराया। इसके बाद मामले को लेकर बातचीत की गई और थाना परिसर में मौजूद लोगों को वहां से हटाया गया।

राजनीतिक रंग लेने से बढ़ा विवाद

एक आरोपी की हिरासत और उसकी पैरवी से शुरू हुआ मामला बाद में राजनीतिक विवाद में बदल गया। एक तरफ डुमरी विधायक के समर्थक थे, जबकि दूसरी तरफ पंचायत की मुखिया यशोदा देवी के समर्थक मौजूद थे।

विधायक के समर्थकों के थाना पहुंचने और उसके बाद मुखिया पक्ष के लोगों के वहां आने से विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया। दोनों पक्षों के बीच पहले से किसी तरह का मतभेद था या घटना के दौरान ही विवाद बढ़ा, इसे लेकर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं।

फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है।

पुलिस की भूमिका पर भी नजर

थाना परिसर में दोनों पक्षों के आमने-सामने आने और थाना प्रभारी के कक्ष तक विवाद पहुंचने के बाद पुलिस की भूमिका भी चर्चा में है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों पक्षों को अलग करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।

अधिकारियों ने स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए हस्तक्षेप किया। पुलिस की ओर से घटना के संबंध में उपलब्ध तथ्यों और प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी जुटाई जा रही है।

यदि मामले में किसी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दी जाती है तो पुलिस उसके आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है।

समर्थकों की मौजूदगी से बढ़ा तनाव

विधायक और मुखिया पक्ष के समर्थकों की बड़ी संख्या में मौजूदगी के कारण थाना परिसर में तनाव का माहौल बन गया। सामान्य तौर पर पुलिस थाना शिकायत और कानूनी कार्रवाई का स्थान होता है, लेकिन राजनीतिक समर्थकों के आमने-सामने आने से स्थिति असामान्य हो गई।

पुलिस ने किसी तरह दोनों पक्षों को अलग कर हालात संभाले। घटना के बाद इलाके में भी इसकी चर्चा रही।

जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

फिलहाल घटना के संबंध में सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि विवाद किस बात से शुरू हुआ और मारपीट की स्थिति कैसे बनी।

साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि हिरासत में लिए गए आरोपी के खिलाफ दर्ज मामले की वास्तविक स्थिति क्या है और उसकी पैरवी को लेकर थाना परिसर में दोनों पक्षों के बीच विवाद क्यों हुआ।

बरवाअड्डा थाना परिसर में हुई इस घटना ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप और समर्थकों की भीड़ के कारण पैदा होने वाली परिस्थितियों पर सवाल खड़े किए हैं। अब सबकी नजर पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर है।

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