झारखंड में खनिज वाहनों के लिए लागू होगा इंटर स्टेट ट्रांजिट पास, देना पड़ेगा टैक्स
रांची। झारखंड में दूसरे राज्यों से बालू, गिट्टी और बोल्डर जैसे लघु खनिज लेकर आने वाले वाहनों के लिए जल्द नई व्यवस्था लागू हो सकती है। इसका नाम इंटर स्टेट ट्रांजिट पास यानी आईएसटीपी होगा। नई व्यवस्था के तहत दूसरे राज्य से झारखंड की सीमा में प्रवेश करने वाले लघु खनिज वाहनों को ट्रांजिट पास लेना होगा और राज्य सरकार को निर्धारित टैक्स या शुल्क देना पड़ेगा।
खान एवं भूतत्व विभाग आईएसटीपी व्यवस्था लागू करने के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर रहा है। प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसे राज्य मंत्रिपरिषद के सामने रखा जाएगा। मंत्रिपरिषद की स्वीकृति मिलने के बाद नियमों की अधिसूचना जारी होगी। इसके बाद अंतरराज्यीय खनिज परिवहन करने वाले वाहनों के लिए नया पास लेना अनिवार्य किया जा सकता है।
फिलहाल यह व्यवस्था प्रस्ताव के स्तर पर है। टैक्स या ट्रांजिट शुल्क की दर, पास की वैधता, भुगतान का तरीका और नियम का उल्लंघन करने पर जुर्माने से संबंधित विस्तृत जानकारी मंत्रिपरिषद की मंजूरी तथा अधिसूचना जारी होने के बाद सामने आएगी। खान एवं भूतत्व विभाग इसके लिए दूसरे राज्यों में लागू व्यवस्थाओं और झारखंड की आवश्यकताओं का अध्ययन कर सकता है।
नई व्यवस्था विशेष रूप से बालू, गिट्टी और बोल्डर जैसे लघु खनिजों के अंतरराज्यीय परिवहन पर लागू होगी। दूसरे राज्य से इन खनिजों को लेकर झारखंड आने वाले वाहन चालक या कारोबारी को प्रवेश से पहले आवश्यक विवरण देना होगा। इसमें वाहन संख्या, खनिज का प्रकार, मात्रा, खनिज प्राप्त करने का स्थान, गंतव्य और संबंधित परिवहन दस्तावेज की जानकारी मांगी जा सकती है।
इंटर स्टेट ट्रांजिट पास व्यवस्था लागू होने से खनिज लेकर राज्य में प्रवेश करने वाले वाहनों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो सकेगा। इससे विभाग को यह पता लगाने में सुविधा होगी कि प्रतिदिन कितने वाहन राज्य की सीमा में दाखिल हो रहे हैं और वे कितनी मात्रा में खनिज लेकर आ रहे हैं। दस्तावेजों में दर्ज मात्रा और वाहन में लदे वास्तविक खनिज का मिलान भी किया जा सकेगा।
खनिज परिवहन की निगरानी के लिए सीमावर्ती जिलों और प्रमुख सड़कों पर चेकनाके बनाए जा सकते हैं। इन चेकनाकों पर वाहन के आईएसटीपी, खनिज चालान और अन्य दस्तावेजों की जांच होगी। बिना वैध पास या अधूरे दस्तावेज के खनिज लेकर प्रवेश करने वाले वाहनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का उद्देश्य नई व्यवस्था के माध्यम से अवैध खनिज परिवहन पर रोक लगाने के साथ राजस्व बढ़ाना है। वर्तमान व्यवस्था में दूसरे राज्यों से आने वाले खनिज वाहनों की पूरी जानकारी एकीकृत रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी निगरानी में परेशानी आती है। आईएसटीपी के माध्यम से वाहनों का पंजीकरण और शुल्क भुगतान अनिवार्य होने पर इस समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
झारखंड की सीमाएं बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से जुड़ी हुई हैं। इन राज्यों के बीच बालू, पत्थर, गिट्टी, बोल्डर और अन्य निर्माण सामग्री का परिवहन होता है। कई वाहन झारखंड में खनिज पहुंचाने के साथ राज्य की सीमा का इस्तेमाल दूसरे स्थानों तक जाने के लिए भी करते हैं। नई व्यवस्था में झारखंड के भीतर आने वाले और केवल यहां से गुजरने वाले वाहनों के लिए अलग नियम बनाए जाएंगे या नहीं, यह प्रस्ताव मंजूर होने के बाद स्पष्ट होगा।
अवैध खनिज परिवहन में कई बार दूसरे राज्यों के चालान का दुरुपयोग किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। एक ही दस्तावेज पर कई बार परिवहन करने, चालान में दर्ज मात्रा से अधिक खनिज लाने और वाहन या गंतव्य बदलने जैसे मामलों को रोकना विभाग के लिए चुनौती है। डिजिटल ट्रांजिट पास लागू होने से प्रत्येक यात्रा के लिए अलग रिकॉर्ड बनाया जा सकेगा।
आईएसटीपी पर क्यूआर कोड या डिजिटल सत्यापन की सुविधा दिए जाने की संभावना भी है। चेकनाके पर तैनात अधिकारी मोबाइल या अन्य उपकरण से पास की वास्तविकता की जांच कर सकेंगे। इससे फर्जी या दोबारा इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। हालांकि नई व्यवस्था में कौन-कौन सी तकनीकी सुविधाएं शामिल होंगी, इसका अंतिम विवरण अभी जारी नहीं हुआ है।
नई व्यवस्था का असर खनिज कारोबारियों, वाहन मालिकों, ट्रांसपोर्टरों और निर्माण सामग्री के व्यापार से जुड़े लोगों पर पड़ेगा। टैक्स या शुल्क लगने से परिवहन खर्च बढ़ सकता है। कारोबारी इस अतिरिक्त लागत को बालू, गिट्टी और बोल्डर की कीमत में जोड़ सकते हैं। ऐसी स्थिति में निर्माण सामग्री की कीमतों पर भी आंशिक असर पड़ने की संभावना है।
दूसरी ओर, वैध तरीके से कारोबार करने वाले व्यापारियों को नई व्यवस्था से लाभ भी मिल सकता है। सभी वाहनों के लिए समान नियम लागू होने से अवैध खनिज लाने वाले कारोबारियों पर नियंत्रण होगा। इससे बिना टैक्स दिए कम कीमत पर सामग्री बेचने की प्रवृत्ति पर रोक लग सकती है और बाजार में प्रतिस्पर्धा अधिक पारदर्शी हो सकती है।
खनिज कारोबारियों के लिए यह जरूरी होगा कि वे संबंधित राज्य से जारी मूल चालान, रॉयल्टी भुगतान का प्रमाण, वाहन की जानकारी और खनिज की मात्रा का सही विवरण रखें। झारखंड में प्रवेश से पहले निर्धारित पोर्टल पर जानकारी दर्ज कर ट्रांजिट पास बनवाना पड़ सकता है। पास नहीं मिलने या उसमें गलत जानकारी होने पर वाहन को सीमा या चेकनाके पर रोका जा सकता है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद खान एवं भूतत्व विभाग को परिवहन, वाणिज्य कर, पुलिस और जिला प्रशासन के साथ समन्वय करना होगा। अंतरराज्यीय सीमाओं पर तैनात अधिकारियों को पास सत्यापन की प्रक्रिया के बारे में प्रशिक्षण देना भी आवश्यक होगा। इसके अलावा इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों की व्यवस्था करनी होगी ताकि जांच के दौरान अनावश्यक देरी न हो।
बिहार में भी दूसरे राज्यों से लघु खनिज लेकर आने वाले व्यावसायिक वाहनों के लिए अंतरराज्यीय ट्रांजिट पास की व्यवस्था लागू की गई है। ऐसी व्यवस्था से खनिज वाहनों की निगरानी और राजस्व संग्रह का डिजिटल रिकॉर्ड रखने में मदद मिलती है। झारखंड का विभाग इन्हीं अनुभवों के आधार पर अपने राज्य के लिए प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
आईएसटीपी लागू होने के बाद अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ चल रहे अभियान को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। किसी वाहन के पास दूसरे राज्य का वैध चालान होने के बावजूद झारखंड में प्रवेश का रिकॉर्ड नहीं मिलता है तो उसकी जांच की जा सकेगी। इससे खनिजों के स्रोत और उनके अंतिम गंतव्य का पता लगाने में भी सहायता मिलेगी।
फिलहाल खान एवं भूतत्व विभाग प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में जुटा है। मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के बाद ही शुल्क, पास बनाने की प्रक्रिया, जांच का अधिकार और दंड से जुड़े नियम स्पष्ट होंगे। प्रस्ताव मंजूर होने पर दूसरे राज्यों से बालू, गिट्टी और बोल्डर लेकर झारखंड आने वाले सभी संबंधित वाहन नई व्यवस्था के दायरे में आ जाएंगे।