नई दिल्ली/रांची। झारखंड की निलंबित IAS अधिकारी **पूजा सिंघल** से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग और मनरेगा घोटाला मामले में अब सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। पूजा सिंघल ने झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ चल रहे मामले में संज्ञान आदेश को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 15 सितंबर को होने की संभावना है।
यह मामला झारखंड के खूंटी जिले में मनरेगा योजना के तहत कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया था कि करीब **18 करोड़ रुपये के कथित घोटाले** से जुड़े मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की गई। पूजा सिंघल को ED ने मई 2022 में गिरफ्तार किया था।
सुप्रीम कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?
पूजा सिंघल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।
उनकी मांग है कि उनके खिलाफ PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत लिए गए संज्ञान आदेश को रद्द किया जाए।
पूजा सिंघल की ओर से दलील दी गई है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।
वहीं जांच एजेंसियों का पक्ष है कि मामले में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और जांच के आधार पर कार्रवाई की गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2009-10 के दौरान झारखंड के खूंटी जिले में मनरेगा योजनाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है।
उस समय पूजा सिंघल खूंटी की उपायुक्त (DC) थीं।
आरोप है कि मनरेगा योजनाओं के लिए जारी सरकारी धन में अनियमितता हुई और सरकारी पैसे के गलत इस्तेमाल की शिकायत सामने आई।
बाद में इस मामले में जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं और ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की।
ED का आरोप था कि कथित अवैध धन को अलग-अलग माध्यमों से छिपाने और इस्तेमाल करने की कोशिश की गई।
ED की कार्रवाई और गिरफ्तारी
प्रवर्तन निदेशालय ने मई 2022 में पूजा सिंघल को गिरफ्तार किया था।
इससे पहले ED ने उनसे लंबी पूछताछ की थी और कई स्थानों पर छापेमारी की थी।
जांच एजेंसी ने दावा किया था कि छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मिले।
मामले में पूजा सिंघल के पति अभिषेक झा, चार्टर्ड अकाउंटेंट सुमन कुमार और कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आए थे।
हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
पूजा सिंघल ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर PMLA कोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान आदेश को चुनौती दी थी।
उन्होंने तर्क दिया था कि उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए जरूरी कानूनी अनुमति नहीं ली गई।
लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
हाईकोर्ट ने कहा था कि इस स्तर पर संज्ञान आदेश को गलत नहीं माना जा सकता और कुछ कानूनी आपत्तियां ट्रायल कोर्ट में भी उठाई जा सकती हैं।
इसके बाद पूजा सिंघल ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
अब सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजरें हैं।
यह तय होगा कि क्या पूजा सिंघल की याचिका स्वीकार की जाती है या हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट यह भी देखेगा कि मामले में कानूनी प्रक्रिया और PMLA के प्रावधानों का सही तरीके से पालन हुआ या नहीं।
कौन हैं पूजा सिंघल?
पूजा सिंघल 2000 बैच की IAS अधिकारी रही हैं।
उन्होंने झारखंड सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।
गिरफ्तारी के समय वह झारखंड में खनन विभाग की सचिव थीं।
उनका नाम सामने आने के बाद राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी राजनीतिक बहस शुरू हुई थी।
मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप कैसे जुड़ा?
ED की जांच केवल मनरेगा राशि तक सीमित नहीं थी।
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि कथित भ्रष्टाचार से जुड़े पैसों को अलग-अलग माध्यमों से इस्तेमाल किया गया।
मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि अवैध तरीके से हासिल धन को किस तरह छिपाया गया या उपयोग किया गया।
पूजा सिंघल पक्ष इन आरोपों से इनकार करता रहा है और कानूनी राहत की मांग करता रहा है।
पति और अन्य आरोपियों की भूमिका
मामले में पूजा सिंघल के पति अभिषेक झा और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच हुई।
ED ने कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही थीं कि कथित लेन-देन और धन के इस्तेमाल में किन लोगों की भूमिका थी।
राजनीतिक रूप से भी रहा चर्चा में
पूजा सिंघल मामला झारखंड की राजनीति में भी काफी चर्चा में रहा।
विपक्ष ने इस मामले को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए थे।
वहीं सरकार और जांच एजेंसियों ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
आगे क्या होगा?
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद यह साफ होगा कि पूजा सिंघल को इस मामले में कोई राहत मिलती है या जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।
अगर सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखता है तो मामला निचली अदालत में आगे बढ़ सकता है।
वहीं अगर कोर्ट कोई राहत देता है तो इसका असर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर पड़ेगा।
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