रांची। झारखंड में अवैध खनन, खनिजों के गैरकानूनी परिवहन और अनधिकृत भंडारण पर प्रभावी रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की महत्वपूर्ण बैठक में खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव सह टास्क फोर्स अध्यक्ष अरवा राजकमल ने अधिकारियों को अवैध खनन पूरी तरह रोकने के लिए ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया। उन्होंने संबंधित विभागों और जिलास्तरीय अधिकारियों से आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा।

बैठक में राज्यभर में खनन गतिविधियों की निगरानी, खनिजों के परिवहन और उनके भंडारण से जुड़े विषयों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य अवैध खनन से जुड़े पूरे तंत्र पर एक साथ कार्रवाई सुनिश्चित करना था।

अरवा राजकमल ने कहा कि केवल अवैध खनन स्थल पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। खनिज निकालने के बाद उसका परिवहन और भंडारण भी उसी श्रृंखला का हिस्सा होता है। इसलिए खनन स्थल से लेकर परिवहन मार्ग और भंडारण केंद्र तक सभी स्तरों पर निगरानी जरूरी है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अवैध खनन की शिकायतों और सूचनाओं को गंभीरता से लिया जाए। संबंधित क्षेत्र की स्थिति का आकलन करते हुए नियमों के अनुसार ठोस कदम उठाए जाएं। अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया पूरी करने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में खान निदेशक राहुल सिन्हा उपस्थित रहे। उनके अलावा खान विभाग के अपर निदेशक, मुख्यालय में पदस्थ उप निदेशक और संबंधित क्षेत्रों के खान उप निदेशकों ने भी भाग लिया। जिला स्तर पर कार्रवाई और निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले जिला खनन पदाधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।

परिवहन विभाग के प्रतिनिधियों की मौजूदगी को खनिजों के अवैध परिवहन पर नियंत्रण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया। अवैध खनन के बाद खनिज सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में परिवहन से संबंधित दस्तावेजों और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।

पुलिस मुख्यालय के प्रतिनिधि भी इस उच्चस्तरीय बैठक में शामिल हुए। अवैध खनन से जुड़े मामलों में खान विभाग और स्थानीय प्रशासन के साथ पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा उपलब्ध कराने, आरोपियों की पहचान करने और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में पुलिस का सहयोग लिया जाता है।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के प्रतिनिधि ने भी बैठक में हिस्सा लिया। अवैध खनन केवल राजस्व और कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। बिना अनुमति और निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के विपरीत खनन होने पर भूमि, जल स्रोतों तथा आसपास के क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

बैठक में अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारियों को लेकर समन्वय पर जोर दिया गया। खान विभाग को खनन पट्टों, अनुमति और उत्पादन से संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी रहती है। परिवहन विभाग खनिज ढोने वाले वाहनों और उनके दस्तावेजों पर नजर रखता है। पुलिस सुरक्षा और कानून-व्यवस्था संभालती है, जबकि प्रदूषण नियंत्रण पर्षद पर्यावरणीय मानकों की निगरानी करता है।

अरवा राजकमल ने अधिकारियों से कहा कि सभी विभाग उपलब्ध सूचनाओं को आपस में साझा करें। इससे अवैध खनन और परिवहन में शामिल लोगों तक पहुंचने में आसानी होगी। विभागों के बीच सूचना में देरी या समन्वय की कमी का लाभ अवैध कारोबार करने वाले लोग उठा सकते हैं।

जिला खनन पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया। वे स्थानीय स्तर पर खनन गतिविधियों की निगरानी करते हैं और वैध-अवैध संचालन की पहचान करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। उन्हें प्राप्त सूचनाओं की पुष्टि कर नियमानुसार कदम उठाने को कहा गया।

संबंधित क्षेत्रों के खान उप निदेशकों से भी जिलेवार स्थिति की निगरानी करने की अपेक्षा की गई है। उन्हें स्थानीय अधिकारियों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने और कार्रवाई की प्रगति की समीक्षा करने को कहा गया। राज्य स्तर से जिलों की गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया।

अवैध खनिज भंडारण को रोकना टास्क फोर्स की प्राथमिकताओं में शामिल है। कई मामलों में खनिज सामग्री को निकालने के बाद विभिन्न स्थानों पर जमा किया जाता है। भंडारण स्थल के दस्तावेजों और वहां रखी सामग्री की मात्रा का सत्यापन करके अनधिकृत स्टॉक की पहचान की जा सकती है।

खनिजों के परिवहन के दौरान आवश्यक दस्तावेजों की जांच भी महत्वपूर्ण है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वाहन में ले जाई जा रही सामग्री का स्रोत वैध हो और परिवहन निर्धारित अनुमति के आधार पर किया जा रहा हो। रिकॉर्ड में अंतर मिलने पर संबंधित वाहन और सामग्री के बारे में नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में अवैध खनन को पूरी तरह रोकने का लक्ष्य रखा गया। अधिकारियों को केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित न रहने बल्कि परिणाम देने वाली कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। साथ ही की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड बनाए रखने और उसकी नियमित समीक्षा करने की आवश्यकता बताई गई।

अवैध खनन के कारण सरकार को राजस्व का नुकसान होता है। वैध खनन में निर्धारित शुल्क, रॉयल्टी और अन्य सरकारी भुगतान किए जाते हैं, जबकि गैरकानूनी गतिविधियों में इन नियमों से बचने की कोशिश की जाती है। इसलिए अवैध खनन पर रोक लगाना राज्य के राजस्व संरक्षण से भी जुड़ा है।

बिना अनुमति खनन किए जाने से प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन हो सकता है। खनन क्षेत्र की सुरक्षा, पर्यावरणीय स्वीकृति और सीमाओं से संबंधित नियम इसी उद्देश्य से बनाए जाते हैं कि संसाधनों का उपयोग नियंत्रित तरीके से हो। इन नियमों के उल्लंघन से स्थानीय आबादी और पर्यावरण दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों से अपने-अपने विभाग और क्षेत्र से जुड़ी जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से निभाने को कहा गया। खान एवं भूतत्व विभाग इस पूरे अभियान में समन्वयकारी भूमिका निभाएगा। विभिन्न विभागों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर कार्रवाई की रणनीति तैयार की जाएगी।

अरवा राजकमल ने स्पष्ट किया कि अवैध खनन, परिवहन और भंडारण को अलग-अलग समस्या मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। तीनों गतिविधियां एक-दूसरे से जुड़ी हैं। यदि खनन स्थल पर निगरानी के साथ परिवहन मार्ग और भंडारण केंद्रों की भी जांच होगी तो अवैध कारोबार की पूरी श्रृंखला पर अंकुश लगाया जा सकेगा।

टास्क फोर्स की बैठक के बाद जिलों में निगरानी और विभागीय सक्रियता बढ़ने की संभावना है। स्थानीय अधिकारियों से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी जा सकती है और राज्य स्तर पर उसकी समीक्षा की जाएगी। जहां कमियां मिलेंगी वहां आवश्यक सुधार के निर्देश दिए जा सकते हैं।

फिलहाल राज्य सरकार ने अवैध खनन को पूरी तरह रोकने की प्रतिबद्धता दोहराई है। खान सचिव अरवा राजकमल ने सभी संबंधित अधिकारियों को ठोस और समन्वित कदम उठाने का निर्देश दिया है। अब बैठक में दिए गए निर्देशों के आधार पर जिलों में होने वाली कार्रवाई और उसके परिणामों पर नजर रहेगी।

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