
धनबाद। झारखंड राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ की जिला इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों के निराकरण को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) अभिषेक झा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं को विस्तार से रखते हुए उनके समाधान की मांग की और इस संबंध में ज्ञापन सौंपा।
शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए परीक्षा से संबंधित गतिविधियों की समय-सारिणी व्यवस्थित होना जरूरी है। वर्तमान में शिक्षकों के सामने कई प्रशासनिक और वित्तीय समस्याएं हैं, जिनका सीधा असर विद्यालयों के कामकाज और शिक्षण व्यवस्था पर पड़ रहा है।
प्री-बोर्ड और बोर्ड परीक्षा के बीच अंतर की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने 10वीं कक्षा की प्री-बोर्ड परीक्षा और बोर्ड परीक्षा के फार्म भरने की प्रक्रिया के बीच कम से कम एक महीने का अंतर रखने की मांग प्रमुखता से उठाई।
शिक्षकों का कहना है कि दोनों प्रक्रियाओं के बीच पर्याप्त समय नहीं मिलने से विद्यालयों में नियमित शैक्षणिक कार्य प्रभावित होता है। परीक्षा से जुड़े कार्यों के कारण शिक्षकों को लगातार प्रशासनिक जिम्मेदारियों में व्यस्त रहना पड़ता है।
संघ ने मांग की कि प्री-बोर्ड परीक्षा, बोर्ड परीक्षा के फार्म भरने और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए ऐसी समय-सारिणी तैयार की जाए, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। पर्याप्त अंतराल मिलने पर शिक्षक विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी कराने के साथ-साथ पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करने पर भी ध्यान दे सकेंगे।
समय पर वेतन नहीं मिलने की शिकायत
प्रतिनिधिमंडल ने माध्यमिक शिक्षकों के समय पर वेतन भुगतान नहीं होने का मुद्दा भी डीईओ के समक्ष रखा। शिक्षकों ने कहा कि वेतन में देरी के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
शिक्षक संघ ने मांग की कि वेतन भुगतान की प्रक्रिया को नियमित और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि कर्मचारियों को हर महीने समय पर उनका वेतन मिल सके। प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से इस दिशा में आवश्यक पहल करने का आग्रह किया।
शिक्षकों का कहना है कि नियमित वेतन भुगतान कर्मचारी की मूल आवश्यकता है। इसमें लगातार देरी होने से शिक्षक अपने पारिवारिक खर्चों और अन्य वित्तीय दायित्वों को पूरा करने में कठिनाई महसूस करते हैं।
विद्यालयों में शैक्षणिक कार्य प्रभावित होने की चिंता
संघ ने कहा कि शिक्षक विद्यालयों में विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इसके बावजूद परीक्षा संबंधी विभिन्न प्रक्रियाओं और प्रशासनिक कार्यों के कारण उन्हें अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ता है।
10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में विद्यालयों को परीक्षा की तैयारियों के साथ-साथ नियमित पढ़ाई के लिए भी पर्याप्त समय मिलना चाहिए। संघ का मानना है कि यदि परीक्षा संबंधी कार्यक्रमों के बीच उचित अंतर रखा जाए तो शिक्षक विद्यार्थियों पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी संकेत दिया कि शिक्षकों से जुड़ी अन्य समस्याओं को भी संबंधित स्तर पर उठाया जाएगा, ताकि उनका समाधान समय रहते किया जा सके।
डीईओ से समाधान की उम्मीद
प्रतिनिधिमंडल ने डीईओ अभिषेक झा को ज्ञापन सौंपते हुए सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया। शिक्षकों ने उम्मीद जताई कि शिक्षा विभाग उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान होने से विद्यालयों में कार्य का बेहतर माहौल बनेगा। इससे शिक्षक बिना अनावश्यक आर्थिक और प्रशासनिक दबाव के विद्यार्थियों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे पाएंगे।
विशेष रूप से वेतन भुगतान में नियमितता को लेकर शिक्षक संघ ने तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा जताई। संघ का कहना है कि समय पर वेतन मिलने से शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और वे अपने शैक्षणिक दायित्वों को अधिक प्रभावी ढंग से निभा सकेंगे।
परीक्षा व्यवस्था में समन्वय जरूरी
शिक्षक संघ ने कहा कि 10वीं की परीक्षा व्यवस्था में सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। प्री-बोर्ड परीक्षा विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा की तैयारी का अवसर देती है। इसके बाद उन्हें अंतिम परीक्षा की तैयारी के लिए भी पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
यदि प्री-बोर्ड, फार्म भरने और बोर्ड परीक्षा से जुड़े कार्य बहुत कम अंतराल में होते हैं, तो शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे नियमित कक्षाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए संघ ने कम से कम एक महीने का अंतर रखने की मांग की है। इससे विद्यालयों को अपनी शैक्षणिक गतिविधियों की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।
शिक्षकों की मांगों पर जल्द निर्णय की उम्मीद
शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी तरह का विरोध करना नहीं, बल्कि शिक्षकों और विद्यार्थियों से जुड़ी समस्याओं का समाधान कराना है। संघ चाहता है कि शिक्षा विभाग उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल करे और जरूरी निर्देश जारी किए जाएं।
डीईओ से मुलाकात और ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब शिक्षकों की नजर विभाग की आगामी कार्रवाई पर है। वेतन भुगतान में नियमितता और परीक्षा कार्यक्रम में पर्याप्त अंतर रखने जैसी मांगों पर यदि जल्द निर्णय होता है तो इससे विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों के हित और विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उनकी प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं को विभाग के समक्ष रखा गया है और उनके शीघ्र समाधान की उम्मीद की जा रही है।





