खूंटी। झारखंड के खूंटी जिले के तोरपा क्षेत्र में हाथी के एक बच्चे को बचाने के लिए वन विभाग को बेहद चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा। बताया जा रहा है कि हाथी का बच्चा एक कुएं में गिर गया था। बच्चे को संकट में देखकर झुंड की मादा हाथियां आसपास मौजूद रहीं और आक्रामक हो गईं। ऐसे हालात में वन विभाग की टीम ने सावधानी से अभियान चलाकर हाथी के बच्चे को कुएं से सुरक्षित बाहर निकाला।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के इलाके में लोगों की भीड़ जुटने लगी। हालांकि हाथियों की मौजूदगी और उनके आक्रामक व्यवहार को देखते हुए लोगों को घटनास्थल से दूर रहने की सलाह दी गई। वनकर्मियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बच्चे को बचाने के साथ-साथ हाथियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
कुएं में कैसे गिरा हाथी का बच्चा?
जानकारी के मुताबिक, हाथियों का झुंड इलाके से गुजर रहा था। इसी दौरान झुंड के साथ चल रहा हाथी का बच्चा कुएं में गिर गया। अचानक बच्चे के गिरने के बाद झुंड में हलचल मच गई।
बच्चे को बाहर निकालने में असमर्थ हाथियां कुएं के आसपास घूमती रहीं। मादा हाथियों के व्यवहार में आक्रामकता दिखाई देने के कारण आसपास जाना जोखिम भरा हो गया था।
स्थानीय लोगों ने हाथी के बच्चे को कुएं में फंसा देखकर वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद विभाग की टीम जरूरी संसाधनों के साथ मौके पर पहुंची।
मादा हाथियों ने बढ़ाई रेस्क्यू टीम की चुनौती
वन विभाग के सामने सबसे बड़ी समस्या कुएं के आसपास मौजूद हाथियों का झुंड था। आमतौर पर हाथियों के झुंड में बच्चे की सुरक्षा को लेकर मादा हाथियां बेहद सतर्क रहती हैं। खतरे का आभास होने पर उनका व्यवहार आक्रामक हो सकता है।
ऐसे में सीधे कुएं के पास पहुंचकर रेस्क्यू करना टीम के लिए खतरनाक हो सकता था। वनकर्मियों ने पहले परिस्थितियों का जायजा लिया और हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी।
टीम ने जल्दबाजी करने के बजाय ऐसी रणनीति अपनाई जिससे हाथियों को ज्यादा परेशान किए बिना बच्चे तक पहुंचा जा सके।
वन विभाग ने शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन
स्थिति सुरक्षित होने के बाद वन विभाग ने हाथी के बच्चे को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। कुएं की गहराई और आसपास की स्थिति को देखते हुए बचाव का रास्ता तैयार किया गया।
रेस्क्यू के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि बच्चे को चोट न पहुंचे। टीम लगातार उसकी स्थिति पर नजर रखती रही और सुरक्षित तरीके से उसे बाहर निकालने का प्रयास किया।
कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार हाथी के बच्चे को कुएं से बाहर निकाल लिया गया। बच्चे के सुरक्षित बाहर आने के बाद वन विभाग की टीम और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
मां से मिलाने की रही कोशिश
रेस्क्यू के बाद सबसे महत्वपूर्ण काम हाथी के बच्चे को उसके झुंड तक सुरक्षित पहुंचाना था। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, छोटे हाथी अपनी मां और झुंड पर काफी निर्भर होते हैं। ऐसे में बचाव के बाद उसे इंसानों के बीच ज्यादा समय तक रखना उचित नहीं माना जाता।
वन विभाग ने आसपास मौजूद हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखते हुए बच्चे को सुरक्षित तरीके से झुंड की ओर जाने का मौका दिया।
ग्रामीणों को दूर रहने की सलाह
हाथियों के झुंड की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग ने स्थानीय लोगों से सावधानी बरतने को कहा। ग्रामीणों को हाथियों के पास जाने, उनका वीडियो बनाने के लिए करीब पहुंचने या उन्हें परेशान करने से बचने की सलाह दी गई।
विशेष रूप से बच्चे के आसपास मौजूद मादा हाथी खतरा महसूस करने पर हमला कर सकती हैं। इसलिए रेस्क्यू के दौरान भीड़ को नियंत्रित करना भी महत्वपूर्ण था।
खुले कुएं वन्यजीवों के लिए बन रहे खतरा
इस घटना ने जंगल और वन क्षेत्रों के आसपास मौजूद खुले कुओं की समस्या को भी सामने ला दिया है। जंगलों से गुजरते समय हाथी और अन्य वन्यजीव कई बार ऐसे कुओं को देख नहीं पाते और उनमें गिर जाते हैं।
विशेष रूप से रात के समय खुले कुएं ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। वन्यजीवों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में कुओं के चारों तरफ सुरक्षित घेराबंदी करने से ऐसी घटनाओं को कम किया जा सकता है।
झारखंड में हाथियों की आवाजाही
झारखंड के कई जिलों में हाथियों की नियमित आवाजाही होती है। भोजन और पानी की तलाश में हाथियों के झुंड जंगल से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास पहुंच जाते हैं।
इस दौरान मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं भी सामने आती हैं। वन विभाग लगातार हाथियों की गतिविधियों की निगरानी करने और ग्रामीणों को सतर्क करने का प्रयास करता है।
हाथी के बच्चे की जान बचने से राहत
तोरपा में हुआ यह रेस्क्यू वन विभाग के लिए आसान नहीं था। एक तरफ कुएं में फंसा हाथी का बच्चा था, तो दूसरी तरफ उसे बचाने की कोशिश कर रहे इंसानों को खतरा समझ रही मादा हाथियां मौजूद थीं।
सावधानी और रणनीति के साथ किए गए अभियान के बाद बच्चे को सुरक्षित निकाल लिया गया। इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि वन्यजीवों के रेस्क्यू में जल्दबाजी के बजाय प्रशिक्षित टीम और सुरक्षित तरीके से कार्रवाई बेहद जरूरी है।
साथ ही वन क्षेत्रों और हाथियों के पारंपरिक रास्तों के आसपास खुले कुओं को सुरक्षित करने की जरूरत भी सामने आई है, ताकि भविष्य में किसी वन्यजीव की जान ऐसे खतरे में न पड़े।
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