रांची। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। इसके बाद झारखंड में उनकी सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने की मांग उठी है। पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष और चतरा विधायक जनार्दन पासवान ने बुधवार को राज्यपाल को पत्र भेजकर मामले में तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया।
जनार्दन पासवान ने अपने पत्र में कहा कि एक सितंबर को केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय को एक हस्ताक्षरविहीन संचार प्राप्त हुआ था। इसमें दो मोबाइल नंबरों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को कथित रूप से सीधे जान से मारने की धमकी दी गई थी। मामले को गंभीर बताते हुए विधायक ने झारखंड में चिराग पासवान के कार्यक्रमों और दौरों के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने की मांग की है।
एक सितंबर को मिला था संचार
विधायक जनार्दन पासवान के अनुसार, एक सितंबर को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय को एक ऐसा संचार मिला, जिस पर किसी व्यक्ति के हस्ताक्षर नहीं थे। इसमें दो मोबाइल नंबर दर्ज होने की बात कही गई है।
पत्र में दावा किया गया कि इसी संचार के जरिए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को जान से मारने की धमकी दी गई। धमकी किसने और किस उद्देश्य से दी, इसकी जानकारी फिलहाल स्पष्ट नहीं है। संबंधित मोबाइल नंबरों की जांच से इस मामले में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
राज्यपाल से तत्काल कार्रवाई की मांग
चतरा विधायक जनार्दन पासवान ने मामले को गंभीर बताते हुए राज्यपाल को पत्र लिखा है। उन्होंने आग्रह किया कि केंद्रीय मंत्री की सुरक्षा से जुड़ी परिस्थितियों को देखते हुए झारखंड में आवश्यक कदम तत्काल उठाए जाएं।
उनका कहना है कि केंद्रीय मंत्री के राज्य में आने के दौरान उनकी सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। राजनीतिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाना जरूरी है।
झारखंड में सुरक्षा मजबूत करने की मांग
लोजपा (रामविलास) की झारखंड इकाई ने विशेष रूप से राज्य में चिराग पासवान की सुरक्षा को और मजबूत करने की मांग उठाई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि धमकी की सूचना सामने आने के बाद उनके दौरे और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
केंद्रीय मंत्री होने के साथ चिराग पासवान राजनीतिक कार्यक्रमों में लगातार शामिल होते हैं। विभिन्न राज्यों में उनकी सभाएं और पार्टी कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। ऐसे में किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई गई है।
धमकी की सत्यता की जांच अहम
फिलहाल सामने आई जानकारी कथित धमकी से जुड़ी है। संचार हस्ताक्षरविहीन होने के कारण इसकी उत्पत्ति और इसके पीछे मौजूद व्यक्ति की पहचान जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
संचार में जिन दो मोबाइल नंबरों का उल्लेख किया गया है, उनके बारे में तकनीकी जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि नंबर किसके नाम पर पंजीकृत हैं, उनका इस्तेमाल कहां से हुआ और धमकी से उनका वास्तविक संबंध क्या है।
जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि धमकी वास्तविक थी या इसके पीछे कोई अन्य उद्देश्य था।
केंद्रीय मंत्री की सुरक्षा को लेकर चिंता
किसी केंद्रीय मंत्री को जान से मारने की धमकी की सूचना सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील मानी जाती है। ऐसे मामलों में संबंधित सुरक्षा एजेंसियां उपलब्ध इनपुट की समीक्षा करती हैं और खतरे के स्तर का आकलन किया जाता है।
जनार्दन पासवान ने इसी आधार पर झारखंड में चिराग पासवान की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य में केंद्रीय मंत्री की यात्रा के दौरान स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
कार्यक्रम स्थलों पर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत
राजनीतिक नेताओं के कार्यक्रमों में समर्थकों और आम लोगों की बड़ी भीड़ पहुंचती है। ऐसे में प्रवेश व्यवस्था, कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा, मंच के आसपास निगरानी और यात्रा मार्ग की सुरक्षा महत्वपूर्ण होती है।
धमकी संबंधी किसी इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियां परिस्थितियों के आधार पर कार्यक्रम स्थल की जांच, भीड़ प्रबंधन और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी जैसे उपाय कर सकती हैं।
लोजपा (रामविलास) की प्रदेश इकाई चाहती है कि झारखंड में चिराग पासवान के कार्यक्रमों के दौरान इन पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।
जनार्दन पासवान ने जताई चिंता
चतरा विधायक जनार्दन पासवान ने राज्यपाल को भेजे पत्र में धमकी से जुड़ी जानकारी का उल्लेख करते हुए अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने इस मामले को केंद्रीय मंत्री की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।
उन्होंने राज्य स्तर पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कराने का आग्रह किया है।
दो मोबाइल नंबरों पर टिक सकती है जांच
कथित धमकी से जुड़े संचार में दो मोबाइल नंबरों का उल्लेख इस मामले में जांच की अहम कड़ी हो सकता है। जांच एजेंसियां आवश्यकता के अनुसार नंबरों के स्वामित्व और उनसे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल कर सकती हैं।
इसके साथ ही यह भी जांचा जा सकता है कि मंत्रालय तक यह संचार किस माध्यम से पहुंचा और इसे भेजने वाले व्यक्ति की पहचान से संबंधित कोई अन्य डिजिटल या दस्तावेजी सुराग मौजूद है या नहीं।
पार्टी कार्यकर्ताओं में भी चिंता
कथित धमकी की जानकारी सामने आने के बाद पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। झारखंड में पार्टी संगठन ने इसे गंभीरता से लेते हुए सीधे राज्यपाल के समक्ष मामला उठाया है।
पार्टी का जोर इस बात पर है कि जांच पूरी होने तक किसी भी संभावित जोखिम को नजरअंदाज न किया जाए और केंद्रीय मंत्री के राज्य दौरे के दौरान पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
जांच के बाद स्पष्ट होगी धमकी की हकीकत
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हस्ताक्षरविहीन संचार किस व्यक्ति ने भेजा और उसमें दर्ज मोबाइल नंबरों का धमकी से क्या संबंध है। इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
मामले में पार्टी की ओर से राज्यपाल को पत्र भेजे जाने के बाद अब नजर राज्य प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई पर है। जनार्दन पासवान ने मांग की है कि चिराग पासवान की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए झारखंड में उनके दौरों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए जाएं।
साथ ही कथित धमकी के स्रोत की पहचान कर यह पता लगाया जाए कि इसके पीछे किसी व्यक्ति या समूह की वास्तविक आपराधिक मंशा है या नहीं। जांच के निष्कर्ष आने तक मामले में सतर्कता बरतने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने की मांग की गई है।